धोनी कैसे आएं अपने गांव !

  • 11 अप्रैल 2011
धोनी का गांव

ऊंचे पहाडों के बीच सूखी हुई नदी के किनारे-किनारे, ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों से मीलों पैदल चलकर पंहुचा जा सकता है कुमांऊ के सुदूर ल्वाली गांव.

इस छोटे से गांव में करीब 20-25 घर हैं. एक घर की देहरी पर कुछ बूढे़ बैठे गप-शप कर रहे हैं, कुछ महिलाएं मवेशियों को दाना-पानी दे रही हैं और एक ओर लकड़ी के ठूंठ से कुछ बच्चे क्रिकेट खेल रहे हैं.

न सड़क, न स्कूल, न अस्पताल, गांव के पिछड़ेपन को बंया करती ये तस्वीर उत्तराखण्ड के किसी भी गांव की हो सकती है. लेकिन ल्वाली एक आम नहीं बेहद खास गांव है.

ये विश्व क्रिकेट के जगमगाते सितारे, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का पुश्तैनी गांव है.

सालों पहले धोनी के पिता पानसिंह नौकरी के लिए यहां से रांची चले गए थे हांलाकि गांव से उनका जुड़ाव बना हुआ है. अब यहां उनके पुश्तैनी घर में धोनी के चाचा-चाची और कुछ और रिश्तेदार रहते हैं.

अलमोड़ा से करीब 45 किमी दूर जयती नामक जगह तक सड़क जाती है और वहां से ल्वाली पैदल ही जाया जा सकता है.

इलाके की बदहाली का पता इसी से चलता है कि जयती के स्कूल में भी कई सालों से अध्यापक नहीं हैं और अस्पताल में मवेशी चरते हुए दिखते हैं और तो और ल्वाली में पीने के साफ पानी की व्यवस्था भी नहीं है.

'कब आएंगे धोनी'

लेकिन ल्वाली को धोनी पर गर्व बहुत है. ल्वाली में जिससे भी मिलो वो यह बताने को आतुर है कि वो धोनी से कैसे जुडा है या उसके परिवार के कितने निकट है और यह भी कि वो उस दिन का कितनी बेसबब्री से इंतजार कर रहे हैं जब धोनी अपने गांव आएंगे.

धोनी के परिवार के एक क़रीबी किशन नेगी कहते हैं, “धोनी आखिरी बार 2003 में यहां अपने परिवार की एक शादी में आए थे और तभी उनका यज्ञोपवीत संस्कार हुआ था. उसके बाद कभी नहीं आए जबकि हमारे गांव की प्रथा है शादी के बाद नवविवाहित यहां आकर पूजा ज़रूर करते हैं. धोनी की शादी को एक साल होने जा रहे हैं पता नहीं वो कब आएंगे.”

यही सवाल धोनी के चाचा धनपत सिंह धोनी के सामने रखा, जो रिटायर्ड अध्यापक हैं, तो उनका कहना था, “धोनी यहां आना ज़रूर चाहते हैं लेकिन कैसे आएं. हमारे यहां सड़क तक नहीं है और बिना सुरक्षा और व्यवस्था के वो कैसे आ सकते हैं. अगर सरकार प्रबंध कर दे तो ज़रूर आएंगे. हमारी इच्छा होती है तो हमीं जाकर उनसे मिल आते हैं.”

पिछले ही महीने धोनी के माता-पिता परिवार की एक शादी में शामिल होने के लिए ऐसे ही पैदल सफर तय करके पंहुचे थे.

Image caption धोनी के माता-पिता परिवार की एक शादी में शामिल होने इस घर तक पैदल सफर तय करके पंहुचे थे.

जब पूरा देश विश्वकप के जश्न में डूबा हुआ है और धोनी पर इनामों की बरसात हो रही है अनुकूल समय देखते हुए गांव के लोगों ने ल्वाली में सड़क बनाने की मांग कर दी है.

घोषणा पर अमल

उत्तराखंड सरकार ने भी धोनी को उत्तराखंड रत्न देने और मसूरी में घर बनाने के लिए ज़मीन देने की घोषणा की है. साथ ही गांव के लोगों की मांग पर ल्वाली में भी सड़क बनाने का वादा कर दिया गया है.

लेकिन धोनी के चाचा इस घोषणा को संदेह से देखते हैं, “ऐसी घोषणाओं का पालन बहुत अनिश्चित होता है. हम सालों से सरकार से गुज़ारिश कर रहे हैं कि ल्वाली के विकास के लिए कुछ करें लेकिन कोई सुनता नहीं.”

गौरतलब है कि पिछली काँग्रेस सरकार के समय भी ल्वाली में सड़क बनाने की घोषणा हुई थी लेकिन वो कोरी घोषणा ही रही.

प्रशासन शायद इस बार गंभीर हो, ल्वाली को यही उम्मीद है. धोनी जब चाहे आएं लेकिन कम से कम गांव के लोगों को अस्पताल और सड़क के लिये पैदल तो नहीं जाना होगा.

जयती के एसडीएम एनएस डांगी आश्वस्त करते हैं, “इस घोषणा पर जल्द ही अमल किया जाएगा और अगले कुछ महीनों में सड़क का काम शुरू हो जाना चाहिए.”

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