वरदान भी है इंडियन प्रीमियर लीग

  • 30 अप्रैल 2011
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इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल पर क्रिकेट की आत्मा के साथ खिलवाड़ करने का ख़ूब आरोप लगता है. खिलाड़ियों को अंधाधुंध पैसा देने और टेस्ट क्रिकेट की अंत की शुरुआत करने का आरोप भी आईपीएल पर लगता है.

लेकिन आईपीएल की आलोचना करने वाले भी शायद ही इससे इनकार करेंगे कि इस प्रतियोगिता के कारण कई नवोदित खिलाड़ी राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर नाम रोशन कर रहे हैं.

आज आलोचनाओं को थोड़ा विराम देते हुए चलिए इसकी बात करते हैं कि आईपीएल कैसे कुछ खिलाड़ियों के लिए वरदान साबित हो रहा है.

आज किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाड़ी पॉल वल्थाटी की सभी वाहवाही कर रहे हैं, लेकिन एक सीज़न पहले तक उन्हें शायद ही कोई जानता था. लेकिन आईपीएल ने ऐसी कई प्रतिभाएँ लोगों को दी है.

चार साल पहले उन्हीं खिलाड़ियों पर लोगों की नज़र जाती थी, जो राष्ट्रीय टीम का हिस्सा होते थे. रणजी ट्रॉफ़ी में नहीं चले तो समझिए राष्ट्रीय टीम में आने की संभावना ख़त्म.

ये सच है कि नवोदित खिलाड़ियों का रास्ता घरेलू प्रतियोगिताओं से ही निकलकर आता है.

लेकिन एक टीम और एक ज़ोन के कई खिलाड़ियों को इतनी तगड़ी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ता था कि कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी बिना मौक़ा पाए अंधेरे में ग़ुम हो गए.

इनकार नहीं

ऐसे खिलाड़ियों की सूची काफ़ी लंबी है. लेकिन पिछले चार सालों के दौरान जिस तरह आईपीएल ने नवोदित भारतीय खिलाड़ियों को अपना जौहर दिखाने का अवसर दिया है, उससे शायद ही किसी को इनकार होगा.

हाँ, ये सवाल ज़रूर उठाए जा सकते हैं कि 20 ओवरों के फटाफट क्रिकेट में किसी क्रिकेटर का चलना क्या उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लायक़ बनाता है?

सवाल वाजिब है, लेकिन इसका जवाब भी मुश्किल है. अगर आईपीएल के प्रदर्शन के आधार पर चयनकर्ता किसी खिलाड़ी को मौक़ा देते हैं, तो वे आँख बंद करके ऐसा नहीं करेंगे.

ज़ाहिर है ऐसे खिलाड़ियों को बार-बार अच्छा प्रदर्शन करना होगा. एक बार किसी खिलाड़ी को राष्ट्रीय टीम में मौक़ा मिल जाए, तो कम से कम उनके मन में ये ग्लानि तो नहीं रहेगी कि उन्हें अवसर नहीं मिले. चाहे वो ट्वेन्टी-20 में हो या वनडे में.

आईपीएल के कारण कई खिलाड़ी अपने प्रदर्शन के कारण सुर्ख़ियों में आए हैं. रवींद्र जडेजा और यूसुफ़ पठान जैसे खिलाड़ी पहले से ही चर्चा में थे, लेकिन आईपीएल के पहले सीज़न में अच्छे प्रदर्शन के कारण चयनकर्ताओं का ध्यान उन्होंने अपनी ओर खींचा.

खोज

आर अश्विन जैसे स्पिनर को भी आईपीएल की खोज कहा जा सकता है, तो युवा टीम के हिस्सा रहे विराट कोहली और सौरभ तिवारी जैसे क्रिकेटर अंतरराष्ट्रीय स्टार खिलाड़ियों की संगत में और फले-फूले.

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Image caption मनोज तिवारी भी अच्छा खेल रहे हैं

अंबाटी रायडू लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए चयनकर्ताओं पर दबाव बनाए हुए हैं. तेज़ गेंदबाज़ आर विनय कुमार तो आईपीएल के कारण राष्ट्रीय टीम का हिस्सा भी बन चुके हैं.

मनीष पांडे ने भी अपनी आक्रामक बल्लेबाज़ी से सबका मन मोह लिया था. तो मनप्रीत गोनी भी अपनी गेंदबाज़ी के कारण चर्चा में रहे हैं. एस बद्रीनाथ भी आईपीएल के कारण पैसा भी कमा रहे हैं और नाम भी.

सुरेश रैना जैसे खिलाड़ियों की भी आईपीएल ने ख़ूब मदद की. मुरली विजय ने जब आईपीएल में फटाफट रन बनाए, तो उन्हें वनडे की राष्ट्रीय टीम में जगह भी मिली. अन्यथा पहले वे टेस्ट खिलाड़ी के रूप में ही जमे हुए थे.

इस सीज़न में कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से खेल रहे मनोज तिवारी भी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. तो अपनी अगली गेंदबाज़ी से इक़बाल अब्दुल्ला भी चयनकर्ताओं को प्रभावित कर रहे हैं.

उदाहरण बहुत हैं और सभी नामों को यहाँ समेटना मुश्किल हैं.

कई बार ये सवाल उठते हैं कि आईपीएल में खिलाड़ियों को ज़रूरत से ज़्यादा पैसा मिल रहा है. ऐसी आलोचनाएँ कुछ हद तक जायज़ हो सकती हैं, लेकिन ये भी सच है कि आईपीएल के कारण कई युवा खिलाड़ियों को अपना दम दिखाने का मौक़ा मिला है.

और ऐसे खिलाड़ियों के लिए आईपीएल किसी वरदान से कम नहीं.

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