आराम की मांग हराम नहीं

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भारतीय टीम के विश्व कप जीतने का जश्न भी अभी पूरा नहीं हुआ था कि इंडियन प्रीमियर लीग आ गया. क्रिकेट प्रेमी भी अभी जश्न के मूड से उबर नहीं पाए थे कि एकाएक उनकी निष्ठा अपने-अपने इलाक़ों की टीमों के लिए होने लगी.

विश्व कप से आईपीएल के बीच इतना कम फ़ासला था कि लगा इतनी लंबी प्रतियोगिता के बाद खिलाड़ी कैसे आईपीएल में खेल पाएँगे.

खिलाड़ियों की मुश्किल समझी जा सकती थी, लेकिन भारी भरकम राशि के साथ टीमों से अनुबंध करने वाले खिलाड़ी पीछे कैसे हट सकते थे.

उन्हें आईपीएल में खेलना पड़ा और वे खेल भी रहे हैं. विश्व कप विजेता टीम के सभी शीर्ष खिलाड़ी दिन-रात एक जगह से दूसरे जगह न सिर्फ़ आ-जा रहे हैं, बल्कि टीमों के लिए जी-जान लगा रहे हैं.

रिपोर्टें

इस बीच में मीडिया में ऐसी रिपोर्टें आई कि टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी समेत कई सीनियर खिलाड़ी जून के पहले सप्ताह से शुरू हो रहे वेस्टइंडीज़ के दौरे पर नहीं जाना चाहते.

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Image caption सचिन तेंदुलकर और ज़हीर ख़ान को आराम मिलना ही चाहिए

ख़बर ये भी थी कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) उन्हें ये छूट देने के लिए तैयार भी है. लेकिन एकाएक बोर्ड का रुख़ कड़ा हो गया और कहा जाने लगा कि सीनियर खिलाड़ियों को वेस्टइंडीज़ जाना ही होगा.

अब सीनियर खिलाड़ी वेस्टइंडीज़ जाते हैं या नहीं, ये तो 13 मई को पता चलेगा. लेकिन इतना तो तय है कि जिस तरह बीसीसीआई की छत्रछाया में खिलाड़ियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है, वो अपने आप में अनोखी चीज़ है.

विश्व कप जीतने के बाद खिलाड़ियों को न जश्न का समय मिला और न ही परिवार के साथ समय बिताने का वक़्त. भारी भरकम राशि ख़र्च करने वाली कॉरपोरेट टीमें उन्हें राहत क्यों दे.

बहस

आईपीएल पर बहस फिर हो सकती है, लेकिन आईपीएल के कर्ता-धर्ता बीसीसीआई को ये बात समझ में आनी चाहिए कि खिलाड़ियों की भी एक सीमा होती है.

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Image caption गंभीर जैसे खिलाड़ी कई महीनों से क्रिकेट खेल रहे हैं

अगर महीनों-महीने खिलाड़ी सिर्फ़ और सिर्फ़ क्रिकेट खेलेंगे तो उनके लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलने का मौक़ा कम होता जाएगा.

आईसीसी ने स्पष्ट कर दिया है कि फ़िलहाल आईपीएल उनके भविष्य के कार्यक्रमों का हिस्सा नहीं है. यानी बीसीसीआई ख़ुद तय करे कि उसे आईपीएल कब कराना है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मैचों का कार्यक्रम पहले से तय होता है.

बोर्ड को पहले से पता था कि पिछले साल से लगातार टीम क्रिकेट खेल रही है. घरेलू सिरीज़ के बाद विश्व कप से ठीक पहले भारत की टीम दक्षिण अफ़्रीका गई.

कई शीर्ष खिलाड़ी न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ घरेलू सिरीज़ में नहीं खेले. उन्हें आराम का मौक़ा मिल गया. तो दक्षिण अफ़्रीका और फिर विश्व कप में वे आराम से खेलें.

लेकिन उन खिलाड़ियों का क्या जो लगातार वनडे या टेस्ट सिरीज़ खेल रहे हैं. गौतम गंभीर इसका उदाहरण हैं, जिन्हें न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ वनडे सिरीज़ में कप्तानी सौंपी गई थी.

नौबत क्यों

कहने का मतलब ये है कि खिलाड़ियों पर पैसे के लिए खेलने और राष्ट्र के लिए न खेलने का आक्षेप तो लग रहा है. लेकिन इससे पहले बोर्ड को ये सोचना चाहिए कि ऐसी नौबत बार-बार क्यों आ रही है.

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Image caption प्रवीण कुमार जैसे खिलाड़ी ज़हीर की अनुपस्थिति में भी कमाल दिखा सकते हैं

वेस्टइंडीज़ के दौरे के बाद भारतीय टीम को इंग्लैंड के दौरे पर जाना है यानी सितंबर तक भारतीय टीम का कार्यक्रम बिना रुके चलता रहेगा.

इस स्थिति में अगर पुराने और अनुभवी खिलाड़ी आराम की मांग कर रहे हैं तो उनकी बात में दम दिखता है. बोर्ड को चाहिए कि कम से कम वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ सिरीज़ में बारी-बारी से कुछ नवोदित और कुछ अनुभवी खिलाड़ियों को मौक़ा दे और जिन्हें आराम चाहिए उन्हें आराम दे.

आईपीएल में अंबाटी रायडू, पॉल वल्थाटी, राहुल शर्मा और इक़बाल अब्दुल्लाह जैसे खिलाड़ी हिट हो रहे हैं. ऐसे खिलाड़ियों को वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ मौक़ा देने में क्या बुराई है.

प्रवीण कुमार विश्व कप नहीं खेल पाए, तो ईशांत शर्मा टीम में ही नहीं थे. श्रीसंत को कम ही मैच खेलने को मिले, तो इन खिलाड़ियों को भी मौक़ा मिल सकता है.

कम से कम बुरे दौर से गुज़र रही वेस्टइंडीज़ की टीम के ख़िलाफ़ तो बोर्ड प्रयोग कर ही सकता है.

कुछ खिलाड़ी अगर प्रतियोगिता से अपना नाम वापस ले लें, तो बोर्ड की किरकिरी ही होगी. इसलिए किरकिरी से बचने के लिए बोर्ड को भविष्य में ऐसे कार्यक्रम बनाने चाहिए जिससे आईपीएल और बाक़ी अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबलों के बीच सामंजस्य स्थापित हो सके.

और खिलाड़ियों के सामने ये धर्मसंकट न हो कि आईपीएल के कारण देश के लिए खेलने की उनकी भावना पर बेकार के सवाल उठाए जाए.

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