'सट्टेबाज़ी को क़ानूनी शक्ल देने का सुझाव'

  • 22 मई 2011
हारुन लोगार्ट(फ़ाइल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption हारुन लोगार्ट ने एक अनोखा सुझाव दिया है.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल के प्रमुख हारुन लोगार्ट ने भारतीय उपमहाद्वीप में क्रिकेट में होने वाली कथित सट्टेबाज़ी को क़ानूनी शक्ल देने का सुझाव दिया है.

भारत के एक अंग्रेज़ी अख़बार टाईम्स ऑफ़ इंडिया को दिए गए एक साक्षात्कार में आईसीसी प्रमुख ने कहा कि सट्टेबाज़ी को क़ानूनी तौर पर वैध क़रार दिए जाने से क्रिकेट में होने वाली गड़बड़ी पर क़ाबू पाने में मदद मिल सकती है.

हारुन लोगार्ट ने कहा, ''इसे क़ानूनी हैसियत हासिल हो जाने के बाद आप सट्टेबाज़ी से जुड़े लोगों के संपर्क में रहते हैं और इस तरह आप उन पर नज़र रख सकते हैं.''

लोगार्ट का ये बयान ऐसे वक़्त में आया है जब शुक्रवार को लंदन की अदालत ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों सलमान बट्ट, मोहम्मद आसिफ़, मोहम्मद आमिर और उनके एजेंट मज़हर मजीद पर लगे स्पॉट फ़ीक्सिंग के आरोप के सिलसिले में होने वाली सुनवाई की अगली तारीख़ चार अक्तूबर तय की है.

हारुन लोगार्ट के इस सुझाव का पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पूर्व प्रमुख तौक़िर ज़या ने सख़्ती से विरोध किया है.

बीबीसी से बातचीत के दौरान तौक़िर ज़या ने कहा कि ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के क़ानून सट्टेबाज़ी की इजाज़त देते हैं लेकिन पाकिस्तान में इसकी कोई गुजाईश नहीं है.

उन्होंने कहा, '' ना तो पाकिस्तान की सरकार इसकी इजाज़त देगी और ना ही मुल्ला हज़रात''

उनका कहना था कि पाकिस्तान के लिए इस तरह की बात करना एक और लड़ाई खड़ी करने के बराबर है.

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Image caption सलमान बट्ट, मोहम्मद आसिफ़ और मोहम्मद आमिर पर स्पॉट फ़िक्सिंग के आरोप लगे हैं.

उनके अनुसार स्पॉट फ़िक्सिंग और मैच फ़िक्सिंग की समाप्ति के लिए आईसीसी को जो करना चाहिए वह नहीं कर रही है.

समर्थन

लेकिन आईसीसी के एक पूर्व अध्यक्ष एहसान मनी ने लोगार्ट के इस सुझाव का समर्थन किया है.

बीबीसी से बातचीत में मनी ने कहा, पाकिस्तान और भारत में सट्टेबाज़ी की कोई क़ानूनी हैसियत ना होने की वजह से यह चोरी छुपे की जा रही है जिसकी वजह से खेल और खिलाड़ी दोनों को नुक़सान पहुंचता है.

इसके ठीक विपरीत जिन देशों में सट्टेबाज़ी क़ानूनी तौर पर वैध हैं जैसे कि न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन वहां सट्टेबाज़ों पर मुकम्मल नज़र रखी जाती है.

निगरानी करने के कारण कहीं भी कोई गड़बड़ी होती है तो आईसीसी का भ्रष्टाचार विरोधी यूनिट फ़ौरन उसकी जांच करता है और समस्या की जड़ तक पहुंचता है. इसी कारण उनकी तुलना में हमारे क्षेत्र में गड़बड़ी की ज़्यादा घटनाएं होती हैं.

सट्टेबाज़

उनके अनुसार भारत के बाद पाकिस्तान में सट्टेबाज़ों का बड़ा जाल बिछा हुआ है और अगर उनको अपना काम जारी रखने के लिए लाइसेंस लेकर ख़ुद को पंजीकृत करना पड़े तो इससे वह क़ानूनी दायरे में दाख़िल हो जाएंगे, जिससे उन पर नज़र रखी जा सकेगी और उनको नियंत्रित करने में भी आसानी होगी.

एहसान मनी का कहना था कि ऐसा करने से सट्टेबाज़ों के ख़िलाड़ियों से संबंधों को भी समाप्त करने में मदद मिलेगी.

उन्होंने आगे कहा, ''हमें पहले ये इस सच को मानना होगा कि एशिया सट्टेबाज़ी का गढ़ बन चुका है और क्रिकेट में गड़बड़ी एक बड़ा मसला बनता जा रहा है और उसके ख़ात्मे के लिए क्रिकेट मैच पर होने वाली सट्टेबाज़ी को क़ानूनी तौर पर वैध क़रार देना आईसीसी का एक अच्छा क़दम साबित हो सकता है.''

इसी सिलसिले में पाकिस्तान के शहर लाहौर के एक सट्टेबाज़ ने नाम ना बताने की शर्त पर बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा कि लोगार्ट का यह सुझाव अच्छा है.

उनका कहना था कि छुप-छुप कर तो हर कोई सट्टेबाज़ी कर रहा है मगर क़ानूनी तौर पर इसकी इजाज़त मिलने से सरकार को भी फ़ायदा होगा, क्योंकि वह सट्टेबाज़ी के ज़रिए पैसे कमा सकती है. उन्होंने आगे कहा कि अधिकारी सट्टेबाज़ों को मैच फ़िक्सिंग और स्पॉट फ़िक्सिंग को रोकने में असफल रहे हैं इसलिए ऐसा करना ही उनके ख़्याल से बेहतर होगा.

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