वुवुज़ेला से बीमारी

  • 24 मई 2011
वुवुज़ेला

विश्व कप फुटबॉल के दौरान चर्चा बटोरने वाला वाद्य यंत्र वुवुजेला से बीमारियां होने का ख़तरा पैदा हो गया है.

वुवुज़ेला ने विश्व कप के दौरान टीवी दर्शकों और खिलाड़ियों को भी काफ़ी परेशान किया था. कुछ तो इसे सरदर्द का सबब बताते रहे और कुछ ने इसकी तारीफ़ करते हुए कहा कि बग़ैर इसके तो मैच का मज़ा ही नहीं है.

बहरहाल ध्वनि प्रदूषण के आरोप के बाद ये कहा जा रहा है कि वुवुज़ेला अब बीमारियां भी फैला सकता है.

एक विज्ञान की पत्रिका के मुताबिक वुवुज़ेला में फूंक मारी जाती है और इस फूंक के दौरान उतनी मात्रा में थूक निकलता है जितने की छींकने से थूक बाहर आता है यानि कि एक सेकेंड में चालीस लाख थूक के कण.

एक भीड़ भरे इलाक़े में एक आदमी अगर वुवुज़ेला बजाता है तो उससे कई लोग टीबी और दूसरी तरह की बीमारियों का शिकार हो सकते हैं.

लंदन ओलंपिक और वुवुज़ेला

अब लंदन ओलंपिक के आयोजक इस खेल समारोह के दौरान वुवुज़ेला के इस्तेमाल पर रोक लगाने की सोच रहे है.

आलोचकों का कहना है कि ये बाजा असुरक्षित भी है क्योंकि इसके बजने से हवाई जहाज़ के उड़ने से भी ज़्यादा आवाज़ आती है.

लंदन स्कूल औफ़ हाईजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसीन में इस विषय पर ताज़ा रिपोर्ट बनाने वाले डाक्टर रूथ मकनेरने का कहना है कि वुवुज़ेला पर प्रतिबंध लगाने के बजाए इसे बजाने के तौर तरीक़ो पर चर्चा होनी चाहिए.

रुथ कहते हैं, ''जैसा कि खांसते और छींकते वक्त हमें इस बात का ख़्याल रखना चाहिए कि कहीं हम संक्रमण तो नहीं फैला रहे उसी तरह संक्रमित लोगों को वुवुज़ेला नहीं बजाने की सलाह दी जानी चाहिए.''

वुवुज़ेला के ख़तरों पर डाक्टर रूथ की टीम ने एक लेज़र यंत्र का उपयोग किया था. उससे ये मापा गया कि अगर आठ लोग वुवुज़ेला बजाएंगे तो कितने थूक की कितनी मात्रा बाहर आएगी.

औसतन इस बाजे को बजाने से थूक के 658,000 कण प्रति लीटर हवा में फैलते हैं.

इसकी तुलना में शोध में हिस्सा लेने वालों से चिल्लाने को कहा गया तो उस समय प्रति लीटर 3,700 थूक के कण सात हज़ार प्रति सेंकेंड की गति से हवा में फैले.

इसीलिए किसी बड़े खेल के आयोजन के समय बीमारियों के फैलने का ख़तरा बना रहता है.

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