डीआरएस नियमों पर सहमत बीसीसीआई

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Image caption बीसीसीआई डीआरएस के कुछ नियमों को अभी भी नहीं मान रहे हैं.

भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड आईसीसी के सभी अंतरराष्ट्रीय मैचों में अंपायरों के फैसले की समीक्षा करने वाली प्रणाली के एक संशोधित मसौदे को अनिवार्य रुप से अपनाने पर सहमत हो गया है.

बीसीसीआई ने एक बयान में कहा है, ‘‘ बीसीसीआई अंपायरिंग फ़ैसलों में तकनीक का इस्तेमाल करने पर राज़ी हुआ है लेकिन इसमें इंफ्रा रेड कैमरा और ऑडियो ट्रैकिंग डिवाइस के इस्तेमाल को ही शामिल किया गया है.’’

बीसीसीआई कहता है, ‘‘ बीसीसीआई हमेशा से ही तकनीक को अपनाने के पक्ष में रहा है लेकिन बोर्ड, फैसलों की समीक्षा के लिए विकसित प्रणाली में शामिल बॉल ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी का समर्थन नहीं करता है और यह बोर्ड को स्वीकार्य नहीं है.’’

बीसीसीआई की तरफ से यह बयान बीसीसीआई के वेबसाइट पर एन श्रीनिवासन ने जारी किया है.

आईसीसी के वार्षिक कांफ्रेस में फैसले की समीक्षा करने वाली प्रणाली यानी डीआरएस का संशोधित मसौदा पेश किया गया जिस पर बीसीसीआई सहमत हो गई.

नए मसौदे के तहत मैचों में हॉट स्पॉट तकनीक का इस्तेमाल अनिवार्य होगा लेकिन हॉक आई बॉल ट्रैकर का उपयोग नहीं किया जाएगा.

आई बॉल ट्रैकर का उपयोग नहीं करने का अर्थ ये हुआ कि पगबाधा के फ़ैसलों पर डीआरएस प्रणाली अनिवार्य नहीं होगी.

बीसीसीआई की रज़ामंदी के बाद अब आईसीसी की मुख्य कार्यकारी समिति इस मसौदे को कार्यकारी बोर्ड के समक्ष रखेगी ताकि इसे मंज़ूरी मिल सके. नए मसौदे के तहत थर्मल इमेजिंग और हॉट स्पॉट तकनीक का इस्तेमाल अनिवार्य हो जाएगा.

वर्ष 2008 से ही डीआरएस के तहत कई तकनीकों को शामिल किया गया था लेकिन भारत इस पर राज़ी नहीं हो रहा था.

अगले साल जब भारत इंग्लैंड का दौरा करेगा तो इसमें डीआरएस का इस्तेमाल किया जाएगा. इसमें हालांकि हॉट बॉल ट्रैकर तकनीक शामिल नहीं है लेकिन बीसीसीआई ने कहा है कि आईसीसी की मुख्य कार्यकारी समिति इस बात पर सहमत हुई है कि हॉट बॉल तकनीक के इस्तेमाल का फ़ैसला दोनों बोर्डों की रज़ामंदी पर छोड़ दिया जाए.

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