डोपिंग में फ़ेल रूसी साइकिलिस्ट

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Image caption कोलोब्नेव के डोपिंग टेस्ट में फ़ेल होने के बाद उनकी टीम ने उनसे हर्जाने की मांग की है.

भारत के बाद रूस में भी डोपिंग का एक मामला सामने आया है.

इस साल के ‘टुअर डी फ्रांस’ साइकल रेस मुकाबले में हिस्सा ले रहे रुस के धावक एलेक्ज़ेंडर कोलोबनेव डोपिंग टेस्ट में फ़ेल हो गए हैं.

कोलोबनेव के डोपिंग टेस्ट में फ़ेल होने के बाद उनकी टीम ने उनसे हर्जाने की मांग की है. टीम का कहना है कि उनके डोपिंग में पकड़े जाने से टीम की छवि को नुक़सान हुआ है.

इस मामले को लेकर खेल प्राधिकरण ने बताया कि 30 वर्षीय इस खिलाड़ी के मूत्र के नमूनों में 'हाइड्रोक्लोरोथियाज़ाइड' पाया गया जो एक मूत्रवर्धक है. इस दवा को साइकिल धावकों के लिए प्रतिबंधित किया गया है.

कोलोबनेव के मूत्र के नमूने पिछले बुधवार को लिए गए थे लेकिन माना जा रहा है कि अब वो ‘बी सैंपल’ के नमूनों के परिणाम का इंतज़ार करेंगे.

डोपिंग टेस्ट में फ़ेल होने के बाद कोलोबनेव को टीम से बाहर कर दिया गया है और उन पर प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना है.

कोलोबनेव ने दो बार वर्ल्ड रोड रेस में रजत पदक जीता था. वर्ष 2008 के ओलंपिक में उन्होंने तीसरा स्थान हासिल किया था.

छवि को नुकसान

'डोपिंग, भ्रष्टाचार और सत्ता संघर्ष'

पिछले दिनों एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले आठ भारतीय खिलाड़ी भी डोप टेस्ट में पॉज़िटिव पाए गए हैं.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने वाले इन खिलाड़ियों के डोपिंग में पकड़े जाने से भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का माहौल पैदा हुआ.

यही वजह है कि इन मामलों में दोषी व्यक्तियों तक पहुंचने के लिए ‘नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी’ (एनएडीए) हरकत में आ गई है.

माना जा रहा है एनएडीए की इस अहम भूमिका के बाद खिलाड़ियों के अलावा दोषी कोच और अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी.

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