क्या भारतीय टीम सबक सीखेगी?

  • 22 अगस्त 2011
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क़रीब एक महीने पहले भारत और इंग्लैंड के बीच चार टेस्ट मैचों की सिरीज़ शुरू हुई थी. भारत के पास न सिर्फ़ स्टार खिलाड़ी थे, बल्कि नंबर वन का ताज भी था.

वेस्टइंडीज़ में स्टार खिलाड़ियों की ग़ैर मौजूदगी में मिली जीत थी, तो कुछ महीने पहले मिला विश्व कप का ख़िताब भी था. लेकिन एक महीने बाद भारतीय टीम कहाँ है, ये सवाल चक्करघिन्नी की तरह हर क्रिकेट प्रेमियों को परेशान कर रहा है.

क्रिकेट समीक्षक हैरान हैं, देश का क्रिकेट प्रेमी हैरान है, मेज़बान इंग्लैंड भी हैरान है और हैरान है क्रिकेट जगत. टेस्ट क्रिकेट में भारत की साख पर बट्टा लगा है.

अच्छा खेल कर हारें, संघर्ष करके हारे, पसीना बहा कर हारें, तो लगता है चलो ऐसा होता है. लेकिन एक के बाद एक करारी और बुरी हार.

बल्लेबाज़ी

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Image caption सचिन पूरी सिरीज़ में काफ़ी दबाव में खेले

चलिए पहले बल्लेबाज़ी की बात करते हैं. जिस टीम में गौतम गंभीर, सचिन तेंदुलकर, वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ जैसा खिलाड़ी हो, उस टीम से प्रतिद्वंद्वी टीम के गेंदबाज़ खार खाते हैं. और तो और दो टेस्ट के बाद इस सूची में दुनिया के धमाकेदार बल्लेबाज़ों में से एक सहवाग भी शुमार हो गए.

लेकिन राहुल द्रविड़ को छोड़कर किसी भी बल्लेबाज़ ने दम नहीं दिखाया. आख़िरी टेस्ट में सचिन ने ज़रूर 91 रन बनाए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

इन स्टार बल्लेबाज़ों के रहते आठ पारियों में भारत की टीम सिर्फ़ एक बार 300 रन बना पाई.

गेंदबाज़ी की बात करें, तो ज़हीर पहले टेस्ट के पहले दिन से घायल रहे और आख़िरकार स्वदेश लौट गए. लेकिन उनके अलावा ईशांत शर्मा, श्रीसंत और प्रवीण कुमार ने निराश ही किया.

इन खिलाड़ियों से उम्मीद करना भी बेमानी ही था. आख़िरी टेस्ट में आरपी सिंह ने ऐसी गेंदबाज़ी की कि लगा जैसे कहाँ का नौसीखिया गेंदबाज़ आ गया हो.

फ़ील्डिंग की बात करें, तो एक नहीं दो नही, पता नहीं कितनी बार मैच के अहम मोड़ पर खिलाड़ियों ने कैच छोड़े. मैदान पर खिलाड़ियों का प्रदर्शन ऐसा रहा, जैसे चलो अब तो हार ही गए हैं.

कप्तानी

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Image caption धोनी की कप्तानी पर भी सवाल उठे हैं

कप्तानी की भी थोड़ी बात कर ही लेते हैं. लॉर्ड्स में हुए पहले टेस्ट से लेकर ओवल में हुए आख़िरी टेस्ट तक भारत की कमान एक थके हुए खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी के पास थी.

सवाल ये उठाया जा सकता है कि धोनी के पास खिलाड़ी ही ऐसे थे, लेकिन ये बात स्पष्ट करनी ज़रूरी है कि कप्तान टीम के चयन में एक अहम भूमिका निभाता है.

खिलाड़ियों के अलावा मैदान में फ़ील्डिंग सजाने से लेकर सही समय पर सही गेंदबाज़ों को मोर्चे पर न लगाने में भी वो कप्तान चूक गया, जिसके नाम से दुनिया की बाक़ी टीमें डरती हैं.

आख़िरकार इन सब चीज़ों की वजह क्या थी. वजह एक नहीं कई हैं. खिलाड़ियों के चयन से लेकर क्रिकेट कैलेंडर और वरिष्ठ खिलाड़ियों का ख़ुद से ये तय करना कि उन्हें किस सिरीज़ में खेलना है, किसमें नहीं.

आईपीएल

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Image caption आईपीएल के दौरान ही सहवाग घायल हुए थे

आईपीएल का व्यस्त कार्यक्रम भी वजह है और खिलाड़ियों का कथित रूप से चोट छिपाना भी. चयनकर्ता और क्रिकेट प्रशासक भी बराबर के दोषी इसलिए हैं, क्योंकि भारत के पास ऐसे बैकअप खिलाड़ी तैयार नहीं, जिनसे ऐसे सिरीज़ में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है.

आईपीएल में लगातार खेल कर घायल होने वाली खिलाड़ियों की संख्या बढ़ी है. उनका प्रदर्शन ख़राब हुआ है और खिलाड़ियों के लगातार खेलने से उनके शरीर पर भी असर पड़ा है. लेकिन इसका जवाब तो बीसीसीआई ही दे सकती है.

विश्व कप के बाद आईपीएल में लगातार खेलने वाले कई खिलाड़ियों ने एकाएक तय किया कि वे वेस्टइंडीज़ दौरे पर नहीं जाएँगे. वनडे में नई टीम गई, तो टेस्ट में एकाध स्टार खिलाड़ी भी गए.

अब इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अहम सिरीज़ की प्रैक्टिस किसके पास थी. सहवाग घायल, गंभीर घायल, युवराज घायल, भज्जी घायल, प्रवीण कुमार घायल और ईशांत घायल- इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ की ये भी उपलब्धि रही.

गेंदबाज़ी

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Image caption ज़हीर ख़ान फ़िट नहीं थे, तो टीम में क्यों लिया गया

ज़हीर ख़ान अगर पूरी तरह फ़िट नहीं थे, तो उन्हें टीम में क्यों लिया गया. अगर सहवाग कंधे की चोट से उबर नहीं पाए हैं, तो उन्हें क्यों ढोया गया.

इन सवालों के जवाब ढूँढने की बजाए क्रिकेट बोर्ड किसी को बली का बकरा बना देगा और कहानी यहीं ख़त्म हो जाएगी.

भारत की गेंदबाज़ी इतनी ख़राब रही कि इंग्लैंड की टीम ने रनों का अंबार खड़ा कर दिया, कई दोहरे शतक लगे और एक बार तो स्कोर 700 के पार चला गया.

ज़हीर ख़ान के अलावा कोई और गेंदबाज़ आक्रमण का नेतृत्व करने लायक़ क्यों नहीं बना- ये सवाल कौन उठाएगा या फिर इसका जवाब कौन देगा.

चयनकर्ता तो किसी सिरीज़ में श्रीसंत को लेकर आएँगे, फिर उन्हें आराम देकर एकाएक ईशांत को ले आएँगे, फिर मुनाफ़ आ जाएँगे और आशीष नेहरा ग़ायब हो जाएँगे. आरपी सिंह को तीन साल बाद एकाएक बुला लिया जाएगा.

ऐसे परिवर्तनों से टीम का बंटाधार होता है, जो इंग्लैंड के ख़िलाफ़ प्रदर्शन से पता चलता है.

स्टार खिलाड़ी

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Image caption राहुल द्रविड़ ने तीन शतक लगाए

स्टार खिलाड़ियों से सजी टीम क्या कर रही थी. सचिन तेंदुलकर हर मैच में नहीं चलेंगे, लेकिन चार मैचों में कभी तो टीम की लाज बचाएँगे. ऐसा हुआ नहीं. वीवीएस लक्ष्मण ने भी इस सिरीज़ में निराश किया.

लेकिन सबसे ज़्यादा निराश किया भारत की सलामी जोड़ी ने. पहले अभिनव मुकुंद और गंभीर ने फिर गंभीर और सहवाग ने इतनी ख़राब शुरुआत दी कि दबाव बढ़ गया.

इन सबके बीच राहुल द्रविड़ ने सबको अपने प्रदर्शन से बता दिया है कि उन्हें भारतीय क्रिकेट से ख़ारिज करना जल्दबाज़ी है. राहुल ने तीन शतक लगाए और सभी ज़रूरत के वक़्त.

सच पूछिए तो इस सिरीज़ में भारत के लिहाज से राहुल द्रविड़ के अलावा कोई भी खिलाड़ी चर्चा के लायक़ नहीं. इंग्लैंड के ख़िलाफ़ मिली हार से खिलाड़ी, कप्तान और चयनकर्ता कोई सबक सीखते हैं या नहीं- ये तो समय ही बताएगा.

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