बाइचुंग भूटिया का संन्यास

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Image caption भूटिया 16 वर्षों तक भारतीय फुटबॉल टीम का हिस्सा रहे हैं.

भारतीय फुटबॉल के सफलतम खिलाड़ियों में से एक बाइचुंग भूटिया ने अंतरराष्ट्रीय करियर से संन्यास ले लिया है.

बुधवार को इस बाबत जानकारी देते हुए भूटिया ने कहा कि वो चोटों से पूरी तरह उबर नहीं पा रहे हैं और इसी कारण उन्होंने राष्ट्रीय टीम से संन्यास लेने का फ़ैसला किया है.

इस वर्ष दिसंबर में भूटिया 35 वर्ष के हो जाएंगे. उनका कहना था कि वो जनवरी महीने में कतर में हुए एशिया कप के दौरान चोटिल होने के कारण खेल नहीं पाए और तब से ही वो संन्यास के बारे में विचार कर रहे थे.

भूटिया पिछले 16 वर्षों से भारत की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम का हिस्सा थे.

नई दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘‘ इन हालात में मुझे लगता है कि ये सबसे अच्छा फै़सला है. मैंने पिछले कुछ महीनों में बहुत प्रयास किए कि वापसी करुं लेकिन बार बार घायल होता रहा.’’

हालांकि भूटिया ने कहा कि वो नेशनल टीम का हिस्सा नहीं होंगे लेकिन क्लब स्तर पर फुटबॉल खेलते रहेंगे.

पूर्वोत्तर के सिक्किम के रहने वाले भूटिया सिक्किम एफसी टीम के लिए खेलते हैं और इस क्लब के मालिकों में से भी एक हैं.

उनका कहना था, ''भले ही मैंने अंतरराष्ट्रीय स्तर से सन्यास ले लिया है, लेकिन मैं अपने युनाइटेड सिक्किम फुटबाल क्लब और बाइचुंग भूटिया फ़ुटबॉल स्कूल के माध्यम से फुटबॉल से जुड़ा रहूंगा.''

भूटिया भारत के पहले फुटबॉल खिलाड़ी थे जो यूरोप के किसी प्रोफेशनल क्लब में खेले. 1999 में इंग्लिश क्लब ब्यूरी ने उनके साथ तीन वर्षों का करार किया था.

भूटिया को पदमश्री से सम्मानित किया जा चुका है और खेल के क्षेत्र में दिया जाने वाला दूसरा सबसे बड़ा सम्मान अर्जुन अवार्ड भी दिया गया है.

भारत जहां क्रिकेट अत्यधिक लोकप्रिय है, ऐसे देश में भूटिया के कारण लोगों की रुचि फुटबॉल में भी पैदा हुई. भूटिया उन गिने चुने फुटबॉल खिलाड़ियों में हैं जिन्हें नाइकी और एडिडैस के विज्ञापन मिले हैं.

फुटबॉल में भारत की 153 रैंकिंग से भूटिया हमेशा परेशान रहे हैं. उनका कहना था कि वो फुटबॉल प्रशासन से जुड़ना चाहेंगे.

उनका कहना था, ‘‘भारतीय फुटबॉल के प्रति मेरी प्रतिबद्धता कम नहीं हुई है. मैं ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन की मदद करने के लिए तैयार हूं. वो जिस तरीके से चाहेंगे मैं मदद करुंगा. ’’

हालांकि रिटायर ले रहे भूटिया की एक खलिश रह ही गई. उन्होंने कहा, '' मेरा सपना था कि मैं वल्ड कप मुक़ाबला खेलूँ, लेकिन वो नहीं हो पाया, उसकी टीस हमेशा रहेगी. मैं उम्मीद करता हूँ कि भारत मेरे जीवनकाल में विश्व कप मुक़ाबला खेले और मैं अपने बच्चों के साथ मैच देख सकूँ.''

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