ऑस्कर पिस्टोरियस

इमेज कॉपीरइट Getty Images

विश्व एथलीट चैंपियनशिप में इस हफ्ते पहली बार एक ऐसा एथलीट हिस्सा लेगा जिसके पैर नहीं हैं और वो कृत्रिम ब्लेड की मदद से दौड़ता है. दक्षिण अफ्रीका का यह 24 वर्षीय एथलीट ऑस्कर पिस्टोरियस अपने कार्बन फाइबर ब्लेड की मदद से दक्षिण कोरिया में 400 मीटर और 4 गुना 400 मीटर रिले में दौड़ेगा.

पिस्टोरियस से जुड़ी पाँच प्रमुख बातें

1.पिस्टोरियस कभी चल नहीं पाएगा

पिस्टोरियस के पैरों में पैदाइशी समस्या थी और डाक्टरों ने साफ कहा था कि वो कभी चल नहीं पाएंगे. उनके पैर मुड़े हुए थे और कुछ हड्डियां भी नहीं थीं. कुछ समय तक पैरों को प्लास्टर में रखा गया ताकि वो सीधी हो जाएं लेकिन 11 महीने के बाद पैरों को काट दिया गया.

पिस्टोरियस के माता पिता ने कोशिश की कि पिस्टोरियस के पैर का अधिक से अधिक हिस्सा बचाया जाए.अगर और पैर काटा जाता तो इस समय पिस्टोरियस फाइबर की मदद से भी दौड़ नहीं पाते. पिस्टोरिसय कृत्रिम पैरों से चलना बहुत जल्दी सीख गए थे.

2. पिस्टोरियस अत्यंत उत्साही थे और स्पीड से लगाव भी था

पिस्टोरियस की चाची डायना बिंज बताती हैं कि पिसटोरियस रोलर स्केट्स, साइकिल चलाता था और पेड़ों पर भी चढ़ जाता. कृत्रिम पैरों की मदद से पिस्टोरियस हवा की तरह भागता रहता. डायना कहती हैं कि पिस्टोरियस को बहुत चोटें लगी हैं बचपन में क्योंकि वो बिल्कुल डरता नहीं था शायद इसलिए वो आज एक सफल एथलीट हैं.

3. पिस्टोरियस के कार्बन ब्लेड फायदेमंद हैं और नुकसानदेह भी

जर्मनी की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के डॉक्टर वोल्फगैंग पोट्टहैस्ट कहना है कि पिस्टोरियस को रेस के आखिरी चरणों में ब्लेड का फायदा मिलता है. वो कहते हैं, ‘‘ कृत्रिम ब्लेड वो भी दोनों पैरों में. इसका काम सामान्य पैरों से अलग होता है. रेस के एक समय जिसके आकड़े निकल सकते हैं उस स्थिति में पिस्टोरियस को फ़ायदा होगा लेकिन शुरुआती दौर में दिक्कत होती है.’’

यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी में प्रोस्थेटिक्स पढ़ाने वाले डॉक्टर बॉब गेली कहते हैं, ‘‘ 400 मीटर की दौड़ हो या कोई भी दौड़. जब शुरुआत होती है तो एथलीट अपनी पिंडलियों और पिछले हिस्से का इस्तेमाल करता जो पिस्टोरियस नहीं कर सकते. इसके अलावा जब सर्कल में मुड़ते हैं तब भी दिक्कत होती है.’’

4. ऑस्कर के ब्लेड अपग्रेड नहीं हो सकते.

बॉब गेली बताते हैं कि पिस्टोरिस ने जिन कार्बन ब्लेड के साथ परीक्षण दिया था उन्हें वही ब्लेड पहन कर दौड़ना होगा. वो ब्लेडों को अपग्रेड नहीं कर सकते. अगर वो ऐसा करेंगे तो ये नियमों का उल्लंघन माना जाएगा.

गेली कहते हैं कि खेलों की दुनिया के ये नियम तय हैं और ओलंपिक में भी ये देखा जाता है कि एथलीट नए किस्म के कपड़े या जूते न पहनें जिससे उन्हें अनुचित फ़ायदा हो

5. पिस्टोरियस एक आफ्टरशेव लोशन के ब्रांड एंबेसडर हैं

क्लैरिंस फ्रैगरेंस गुर्प के अध्यक्ष जोएल पैलिक्स कहते हैं कि वो अपनी कंपनी के लिए ब्रांड एंबेसडर खोज रहे थे लेकिन वो प्रसिद्ध खिलाड़ियों और अभिनेताओं से बोर हो चुके थे.

वो कहते हैं, ‘‘ मैं पिस्टोरियस की पर्सनैलिटी से प्रभावित हुआ. स्पोर्ट्स में उनका करियर अद्भुत है.उनकी कहानी से लोग प्रेरणा ले सकते हैं.’’

हालांकि पैलिक्स कहते हैं कि अगर पिस्टोरियस इतने सुंदर नहीं होते तो शायद वो उन्हें ब्रांड एंबेसडर बनाने की नहीं सोचते.