क्या है फ़ॉर्मूला वन-गाइड

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क्रिकेट, हॉकी, कुश्ती, मुक्केबाज़ी, तैराकी, तीरदाज़ी….तरह-तरह के खेलों से आप अच्छी तरह परिचित होंगे. लेकिन भारत में इन दिनों जिस खेल का नाम सबसे ज़्यादा कानों में गूँज रहा है वो है फ़ॉर्मूला वन.

दरअसल 30 अक्तूबर को भारत में पहली बार फ़ॉर्मूला वन रेस आयोजित हो रही है. इसके लिए विशेष ट्रैक बनाया गया है जिसका नाम है बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट.

सुनिए फ़ॉर्मूला वन गाइड

हमने मोटररेसिंग विशेषज्ञ संजय कुमार से बात की और समझने की कोशिश कि आख़िर फ़ार्मूला वन है क्या.

ये खेल मोटर स्पोर्ट्स का हिस्सा है. किसी भी सामान्य रेस की तरह इसमें भी रेसर अपनी-अपनी गाड़ियों में ट्रैक पर रेस लगाते हैं और जो सबसे जल्दी रेस पूरी करता है वो जीतता है. फ़ार्मूला वन मोटर स्पोर्ट में सबसे ऊपर का पायदान है. मोटर रेसिंग एक ऐसा खेल है जिसे एक आदमी और एक मशीन मिलकर खेलते हैं. यानी ऐसा खेल है जिसमें खिलाड़ी और मशीन के तालमेल से ही जीत मिलती है. इस वजह से मोटर रेसिंग ऑटोमाइबल उद्योग की मदद से की जाती है. इसमें तकनीक, स्पीड और हुनर मिला हुआ है.

फ़ार्मूला वन की गाड़ियाँ

ये गाड़ियाँ आम गाड़ियों से अलग होती हैं, रेसर करीब 200 से 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से गाड़ी चलाते हैं. एक विमान 270 किलोमीटर प्रतिं घटा की गति पर उड़ान भर लेता है. सवाल ये है कि ऐसे में फ़ॉर्मूला वन की कारें उड़ने क्यों नहीं लगती. दरअसल इन पर एक विशेष एरोडाइनेमिक प्रणाली लगी रहती हैह जो नीचे की ओर डाउनफ़ोर्स पैदा करता है ताकि गाड़ी ज़मीन पर ही रहे और उड़ न जाए.

टीमों का गठन

हर फ़ॉर्मूला वन टीम के साथ कोई न कोई बड़ी ऑटो कंपनी जुड़ी होती है. एक टीम में दो खिलाड़ी होते हैं. 12 टीमें होती हैं यानी एक ट्रेक पर 24 गाड़ियाँ होती हैं. एक टीम प्रिंसपल होता है जो तकनीकी प्रमुख होता है. ड्राइवर को जितना पैसा मिलता है उतना ही पैसा इंजीनियर को मिलता है. एक टीम में करीब 150 लोग होते हैं.

ड्राइवरों के सामने चुनौतियाँ

रेस के दौरान पैदी हुई स्तिथियों से ड्राइवरों के शरीर से इतना पानी कम हो जाता है कि हर रेस के बाद ड्राइवर का वज़न करीब 3-4 किलोग्राम कम हो जाता है. गाड़ी खुली रहती है, 300 की गति से हवा चलती है तो उसे झेलने के लिए आपकी गर्दन और कंधे के कितने मज़बूत होने चाहिए कि इसे बर्दाशत कर सके. इन खिलाड़ियों का फ़िटनेस स्तर सबसे बढ़िया होता है.

खिलाड़ियों की सुरक्षा

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मोटर स्पोर्ट में खिलाड़ियों की सुरक्षा बहुत अहम होती है. इसलिए रेसर का हर उपकरण ख़ास किस्म का होता है. हेलमेट बहुत ख़ास सामग्री का होता है ताकि खिलाड़ी का सिर सुरक्षित रहे. इस हेलमेट के नीचे एक और कपड़ा पहना जाता है जिसे बालाक्लोव कहते हैं जो फ़ाइरप्रूफ़ होता है. अगर कभी कार में आग लग जाए और खिलाड़ी फँस जाए तो ये बालाक्लोव उसके चेहरे को आग से बचाता है. गर्दन के पास भी एक विशेष परत पहनी जाती है ताकि किसी भी दुर्घटना में गर्दन को चोट न पहुँचे.

रेसर जो रेस सूट पहनते हैं उस पर भी आग का असर नहीं होता. इस सूट में भी तीन परतें और सुरक्षा कवच होते हैं जो दुर्घटना की सूरत में खिलाड़ी का बचाव करता है. इनके दस्ताने और जूते भी बहुत ख़ास किस्म की सामग्री के होते हैं.

किसी भी रेस में दुर्घटना होने के सूरत में रेस्क्यू टीम ट्रैक पर तैनात रहती है. इन सदस्यों को मार्शल कहा जाता है. इसमें रिक्वरी के मार्शल अलग होते हैं, आग बुझाने के लिए अलग मार्शल होते हैं, झंडा दिखाने वाले मार्शल अलग होते हैं. ये इतनी सटीक, सूक्ष्म और विधिपूर्वक प्रक्रिया होती है कि किसी भी दुर्घटना से निपटने में 30 सैकेंड से ज़्यादा का समय नहीं लगना चाहिए.

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Image caption ये फ़ॉर्मूला वन ट्रैक का चित्र है. साभार फ़ॉर्मला वन बेवसाइट

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