सचिन के सहारे मोटर स्पोर्ट्स?

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Image caption एफ़-1 के बाद अब सचिन तेंदुलकर मोटर स्पोर्ट्स के लीग को बढ़ावा देने जा रहे हैं

एफ़-1 की सफलता के बाद एक निजी कंपनी सचिन तेंदुलकर के सहारे मोटर रेस लीग को लेकर बाज़ार में उतरने की पूरी तैयारी में हैं.

बंगलौर की एक कंपनी 'मचदार स्पोर्ट्स' इन मोटर कारों की दौड़ को आयोजित कराएगी. योजना है कि इस लीग में नौ टीमें भारत के अलग अलग शहरों के नाम पर होंगीं.

मचदार स्पोर्ट्स के मालिकों में से एक दर्शन मचदार बताते हैं कि हर टीम में दो कारें होंगी और इन टीमों में एक ही तरह की कारों के बीच रेस करवाई जाएगी.

जो कारें रेस में होंगीं वो ताकतवर होंगी लेकिन एफ़-1 जितनी नहीं. एफ़-1 में अलग अलग कंपनियों की कारें होती हैं इस में सभी कारें एक ही तरह की होंगी.

पहली दौड़ अगले साल आठ जनवरी को आयोजित की जाएगी.

दर्शन बताते हैं कि आईपीएल की तर्ज़ पर निजी निवेशकों को टीमें बेची जाएंगीं. ये रेस भारत, संयुक्त अरब अमीरात और मलेशिया के अलग अलग रेस ट्रैक्स पर आयोजित की जाएंगीं. जीतने वाले के लिए क़रीब पौने दस करोड़ रुपयों के इनाम की घोषणा की गई है.

प्रश्न चिह्न

सालों से मोटर स्पोर्ट्स कवर रहे खेल पत्रकार विवेक मुखर्जी को तमाम शोर गुल के बावजूद इस नई दौड़ से कुछ ख़ास उम्मीदें नहीं हैं.

मुख़र्जी कहते हैं कि मोटर स्पोर्ट्स और एफ़-1 की तुलना करना ठीक नहीं. उनके अनुसार एफ़-1 इसलिए सफल हुआ क्यों कि उसके साथ एक ग्लैमर जुड़ा था. वो कहते हैं कि एफ़-1 मोटर स्पोर्ट्स की का शिखर है.

मुखर्जी कहते हैं,"भारतीय रेसिंग लीग की जो बात चल रही है इसमें किसी को पता नहीं है कि कैसे पैसे आएंगें. भारतीय बाजारों में इतना पैसा नहीं है कि आईपीएल की तरह मोटर स्पोर्ट्स को भी वो भरपूर समर्थन दे सकें."

दर्शन मचदार के अनुसार शुरुवात में हर टीम को सब मिला जुला कर क़रीब 22 .5 करोड़ रुपए निवेश करने होंगे इसके बाद कंपनियों को हर साल 4.5 करोड़ रुपए ख़र्च करने होंगे. कंपनी के अनुसार सब ठीक रहा तो चौथे साल से सभी टीमें अपना निवेश वापस कमा लेंगीं.

चाहे क्रिकेट हो या फुटबॉल असल पैसा मिलता है विज्ञापनों से और विज्ञापन मिलते हैं टीवी प्रसारण के अधिकारों से.

विवेक मुख़र्जी कहते हैं कि इस मोर्चे पर भी प्रश्न चिन्ह है.

पर मचदार इस तरह की तमाम आशंकाओं को ख़ारिज करते हैं. वो दावा करते हैं कि महीने भर में वो कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ करेगें और आठ जनवरी को रेस ज़रुर होगी.

इतिहास

इस तरह के पहले भी कई प्रयास हुए हैं.

वर्ष 2003 में दुबई के शाही घराने से ताल्लुक रखने वाले के शेख़ मख्तूम ने इस तर्ज़ पर ए-1 जीपी शुरू की थी. वर्ष 2006 में उन्होंने अपना मालिकाना हक़ एक दक्षिण अफ्रीकी व्यापारी को बेच दिया. वर्ष 2009 आते आते यह कंपनी बंद हो गई.

मचदार कहते हैं कि ए-1 जीपी का विचार अच्छा था लेकिन उसे ग़लत ढंग से लागू किया गया था.

वो कहते हैं "कौन कह सकता था आईपीएल शुरू होने के पहले कि क्रिकेट इसके शुरू होने के बाद हमेशा-हमेशा के लिए बदल जाएगा. भारत में जवान लोग रफ़्तार चाहते हैं और व्यापारी उन नौजवानों से हार हाल में जुड़ना चाहते हैं."

क्या इस मोटर रेस लीग को भी आईपीएल की तरह सफलता मिल सकेगी, इस जवाब अगले साल जनवरी तक ही मिल सकेगा.

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