क्रिकेट बोर्डों पर भी प्रतिबंध की मांग

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Image caption लॉर्ड कॉन्डन ने आईसीसी से सख़्त रवैया अपनाने की अपील की

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई के प्रमुख रह चुके लॉर्ड कॉन्डन ने कहा है कि जो देश अपने खिलाड़ियों पर नियंत्रण नहीं रख सकते, उन पर पाबंदी लगा देनी चाहिए.

हाल ही में स्पॉट फ़िक्सिंग में शामिल होने के दोषी पाए जाने पर पाकिस्तान के तीन क्रिकेटरों मोहम्मद आसिफ़, सलमान बट और मोहम्मद आमिर को जेल की सज़ा सुनाई गई है.

बीबीसी स्पोर्ट्स के साथ एक विशेष इंटरव्यू में लॉर्ड कॉन्डन ने कहा, "आईसीसी को उतनी कठोरतम सज़ा देनी चाहिए, जो वो देश सकती है. एक कड़ा विकल्प ये है कि क्रिकेट बोर्डों पर पाबंदी लगा दी जाए."

लंदन में मेट्रोपोलिटन पुलिस के आयुक्त रह चुके लॉर्ड कॉन्डन को वर्ष 2000 में गठित आईसीसी भ्रष्टाचार निरोधक इकाई का पहला प्रमुख बनाया गया था.

उस समय दक्षिण अफ़्रीका के हैंसी क्रोनिए को लेकर मैच फ़िक्सिंग स्कैंडल ज़ोर-शोर से छाया हुआ था.

नतीजा

स्पॉट फ़िक्सिंग को लेकर चल रहे विवाद के बीच लॉर्ड कॉन्डन ने कहा, "आईसीसी को और सख़्त होने की आवश्यकता है. आईसीसी को सतर्क रहना चाहिए. क्योंकि क्रिकेट की विश्वसनीयता दाँव पर है. आईसीसी के साथ-साथ क्रिकेट बोर्डों को भी सख़्त होना चाहिए. अगर वे सख़्त नहीं होंगे, तो उन्हें इसके नतीजे भी भुगतने होंगे."

पिछले साल जून में लॉर्ड कॉन्डन का स्थान सर रॉनी फ़्लैनागैन को बनाया गया था. इसके दो महीने पहले ही पाकिस्तान के तीन क्रिकेटरों सलमान बट, मोहम्मद आसिफ़ और मोहम्मद आमिर के ख़िलाफ़ स्पॉट फ़िक्सिंग के आरोप लगे थे.

इसी सप्ताह लंदन की एक अदालत ने इन तीनों क्रिकेटरों को दोषी ठहराते हुए उन्हें सज़ा सुनाई थी. सलमान बट को सबसे ज़्यादा ढाई साल, मोहम्मद आसिफ़ को एक साल और मोहम्मद आमिर को छह महीने जेल की सज़ा सुनाई थी.

उन्नीस वर्षीय मोहम्मद आमिर ने अपना गुनाह स्वीकार किया था, जबकि सलमान बट और मोहम्मद आसिफ़ ने कहा था कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया है.

लॉर्ड कॉन्डन ने न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड अख़बार की सराहना की, जिसके स्टिंग ऑपरेशन के बाद ये पूरा मामला सामने आया था. उन्होंने कहा कि अगर आईसीसी ने ऐसा किया होता, तो मामला कोर्ट में नही जा पाता क्योंकि जालसाज़ी का क़ानून बहुत जटिल है.

कॉन्डन ने कहा कि न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड के पास वो हिम्मत और आज़ादी थी, हालाँकि ये बहुत शर्मनाक था, लेकिन आवश्यक था.

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