जब सचिन रोए थे...

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Image caption सचिन पर उम्मीदों का दबाव असहनीय हो सकता है

सचिन तेंदुलकर अगर स्टील के भी बने होते तो भी सौ करोड़ लोगों की उम्मीदों के तले अब तक बुरी तरह पिस गए होते.

आजकल उनके बल्ले से निकला हर रन एक नया विश्व रिकॉर्ड होता है और लोगों की उनसे कभी न बुझने वाली रनों की प्यास को और बढ़ाता ही है.

कुछ साल पहले जब वो अपना 35वां शतक लगाकर उस शिखर पर पहुँचे थे जहां उनसे पहले कोई भी बल्लेबाज़ नहीं पहुँचा था, तो उनके आंखों में आंसू आ गए थे.

ये आंसू खुशी के आंसू थे, और राहत के भी - एक नए कीर्तिमान बनाने की ख़ुशी और उससे भी बढ़कर लोगों की उम्मीदों को पूरा करने की राहत.

उन्होंने बाद में कहा था कि ये दबाव लगभग असहनीय हो गया था क्योंकि वो जहां भी जाते थे, जिससे भी मिलते थे, सबके ज़बान पर सिर्फ़ एक बात होती थी कि वो कब ये विश्व रिकॉर्ड बनाएंगे.

ख़ुमारी

आज जब भी वो बल्लेबाज़ी करने जाते हैं, पूरे देश पर ख़ुमारी चढ़ जाती है. लोग चाहते हैं कि वो एक और शतक लगाएं. हालांकि सचिन ये लगातार करते आए हैं और उन्होंने अब तक टेस्ट मैच में 51 और एक दिवसीय मैचों में 48 शतक बनाए है और उनके शतकों का जोड़ 99 हो गया है.

सचिन और उनके नए कीर्तिमानों से मनोग्रहित लोगों को सचिन की इन उपलब्धियों से कोई फ़र्क नहीं पड़ता. अगर सचिन एक और शतक बनाने से चूक जाते हैं तो देश उन्हें खुद को एक अपराधी की तरह देखने पर मजबूर कर देगा.

कुछ ही दिनों पहले उन्होंने दिल्ली के कोटला मैदान पर बेहतरीन पारी खेलकर भारत को जीत दिलाई थी. लेकिन लोग किसी भी दिन उनकी विजयी पारी के बदले उनका सौवां शतक खु़शी ख़ुशी ले लेते, भले ही उस शतक के बावजूद भारत हार जाता.

उनके आउट होने के बाद पूरा देश मातम में डूब गया मानों उस मैच का मकसद सिर्फ़ सचिन को रिकॉर्ड बनाने के लिए एक अवसर देना रहा हो.

मुंबई में भी उन्होंने एक आकर्षक पारी खेली लेकिन जब वो आउट हुए तो लोगों का दिल टूट गया और उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि सचिन आउट हो सकते हैं.

उनका विकेट लेने वाले गेंदबाज़ रवि रामपॉल ने जब अपनी सफलता का जश्न मनाया तो उनके साथ एक खलनायक के जैसा बर्ताव किया गया.

मीडिया का उन्माद

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Image caption सचिन के आउट होने पर दर्शकों में मातम छा जाता है

इस उन्माद को हवा देने में मीडिया का भी बहुत बड़ा हाथ है.

इस मुद्दे पर टेलीविज़न पर बहसों की हद हो गई है और अख़बार भी आंकड़ों से पटे पड़े हैं.

हालांकि खेलजगत में इस नंबर का कोई ज़्यादा महत्व नहीं है. जैसे दो महान गेंदबाज़ शेन वार्न और मुथैया मुरलीधरन ने जब 1000 विकेट लिए तो उनके लिए हमारा विचार कुछ ज़्यादा नहीं बदला.

हालांकि 1000 विकेट को 100 शतक के बराबर का रिकॉर्ड समझा जा सकता है लेकिन क्या उनके देश की मीडिया ने इस रिकॉर्ड पर इस तरह का उन्माद खड़ा किया जो यहां हो रहा है?

इसका जवाब नहीं ही है.

यहां तक की भारतीय मीडिया में भी उस खबर को छोटी जगह मिली थी हालांकि भारत के क्रिकेट सुपर स्टारों के आंकड़ों से खेल का पन्ना भरा रहता है मानो क्रिकेट का खेल आंकड़ों के अलावा कुछ भी नहीं है.

ये सवाल कि 'क्या वो सौवीं सेंचुरी पूरा कर पाएंगे या नहीं' ने सचिन की रातों की नींद उड़ा रखी होगी.

जब सचिन अपना सौवां शतक लगाएंगे तो हम सब मिलकर ज़रूर जश्न मनाएंगे लेकिन अगर वो ऐसा न भी कर पाएं तो भी दुनिया के सबसे महान बल्लेबाज़ के रूतबे पर कोई आंच नहीं आएगी.

कृपया उनपर दबाव न डालें, आखिर वो भी एक इंसान है.

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