जब आशाएँ मायूसी में बदल गईं...

  • 25 नवंबर 2011
क्रिकेट प्रेमी
Image caption देश भर के खेल प्रेमी मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में पहुँचे थे 'क्रिकेट के भगवान' के महाशतक को देखने के लिए

शुक्रवार सुबह से वानखेड़े स्टेडियम के बाहर दर्शकों की लाइनें लगी थीं. स्टेडियम के निकट चर्च गेट स्टेशन तक आने वाली सारी स्थानीय ट्रेनें आधा घंटे देर से चल रही थीं.

सड़कों पर ट्रैफिक बहुत ज़्यादा था. मैं बांद्रा से सात बजे चला और 18 किलोमीटर का फासला दो घंटे में तय कर पाया.

लेकिन कतारों में लगे लोगों के चेहरों पर एक ऐसा उत्साह था जो मुंबई में कम ही देखने को मिलता है.

फिज़ा में उम्मीद की किरण छाई हुई थी.

यह सभी लोग अपने हीरो सचिन तेंदुलकर के सौवें शतक के पूरे होने की आशा लेकर स्टेडियम में आए थे.

सौवें शतक से चूके सचिन

सचिन रमेश तेंदुलकर अपने होम टर्फ़ पर खेल रहे थे और सुबह खेल शुरू होते ही ज़बरदस्त बल्लेबाज़ी का प्रदर्शन कर रहे थे.

एक छक्का और कुछ चौकों की मदद से उन्होने 20 गेंदों में तेज़ी से 27 रन बना डाले. लेकिन जब 94 के स्कोर पर वो आउट हुए तो स्टेडियम में ऐसी ख़ामोशी छाई जैसे कब्रिस्तान में होती है.

'अनाथ बच्चों को ऐतिहासिक पारी न दिखा पाए'

स्टेडियम से बाहर लोगों की आशाएं मायूसी में बदल गई. एक पल में सबकी उम्मीदों पर पानी फिर गया.

स्टेडियम के अंदर से लोग बाहर निकल आए और कुछ ने सचिन के आउट होने का ग़म ग़लत करने के लिए कैफ़े जाने का इरादा बनाया.

अस्सी साल की आयु के एक सज्जन ने मुझे बताया कि वो विरार से सुबह-सुबह आए थे सचिन के गेम को देखने के लिए.

उन्होंने कहा, ''मैं स्टेडियम के अंदर प्रवेश भी नहीं कर पाया और वो जब आउट हुए तो मुझे बहुत दुख हुआ.''

कुछ नौजवान बच्चे स्टेडियम के बाहर गुमसुम खड़े थे.

उनमे से एक ने कहा, ''वो हमारे भगवान हैं, आज हमें उम्मीद थी की वो शतकों का शतक बना डालेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. कोई बात नहीं, हम एक साथ अंदर जा रहे हैं दूसरे बल्लेबाजों को देखने के लिए.''

इन नौजवानों में से एक लड़की ने कहा, ''अगर सचिन शतकों का शतक नहीं भी बना सके तब भी वो हमारे भगवान रहेंगे.''

युवाओं की एक टोली स्टेडियम के अंदर जाने की तैयारी कर रही थी.

इन युवाओं ने कहा कि उन्हें सचिन के आउट होने का दुख है, लेकिन उन्हें दुख इस बात का ज़्यादा है कि वो उन 15 अनाथ बच्चों को सचिन की पारी नहीं दिखा पाए जिनके टिकटों का उन्होने इंतज़ाम किया था.

'लेट हो गए'

यह सभी अनाथ बच्चे ट्रेन लेट होने के कारण स्टेडियम में समय से नही पहुँच पाए थे.

Image caption क्रिकेट के दीवाने सचिन तेंदुलकर के शतक लगाने से चूंकने पर मायूस तो हुए पर निराश नही.

मुंबई में सचिन की बैटिंग को देखने के लिए लोग बाहर से भी आए थे.

उत्तर प्रदेश से आए एक व्यक्ति ने स्टेडियम से बाहर निकलते समय कहा, ''मैने टिकट काफ़ी पहले ख़रीदा था, इस आशा में कि सचिन के शतकों का शतक उनके होम ग्राउंड पर पूरा हो सकता है. कल मुंबई आया और आज सुबह अंदर जाने में कामयाब हो गया. लेकिन सचिन के आउट होने के बाद मै एक पल के लिए भी वहाँ नहीं रह पाया और बाहर आ गया.''

इस व्यक्ति का कहना था कि सचिन बहुत अच्छा खेल रहे थे लेकिन उनके जैसा अनुभवी खिलाड़ी भी ग़लतियाँ करता है.

उनके मुताबिक़ आउट होने वाली गेंद पर सचिन ने शॉट का सही चयन नही किया था लेकिन गेंद भी अच्छी फेंकी गई थी.

'मनोबल बढ़ाना है'

ऐसे और भी कई लोग थे जो सचिन के आउट होने के बाद स्टेडियम छोड़ कर अपने घरों को लौट रहे थे.

एक ने भागते भागते कहा, ''मैं ट्रेन में था जब सचिन के आउट होने की खबर मिली. मैं फिर भी आया क्योंकि भारतीय टीम का मनोबल बढ़ाना है.''

मायूसी का माहौल मुंबई भर में छाया हुआ था.

यह लेख मैने दक्षिण मुंबई के एक कैफ़ें में बैठकर लिखा है. यहाँ बैठे लोगों के बीच भी चर्चा का विषय है सचिन का शतकों का शतक पूरा नही होना.

मुंबई ही नहीं, अन्य जगहों से मिल रही जानकारी के मुताबिक भी सचिन के आउट होने के बाद पूरे भारत में मायूसी की लहर छा रही है.

क्रिकेट के दीवानों को अब इंतज़ार है अगले महीने का जब भारत भिड़ेगा ऑस्ट्रेलिया से उनके देश में और एक बार फ़िर वह उम्मीदें लगा पाएंगे 'क्रिकेट के भगवान' से महाशतक लगाने के लिए.

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