अंपायर के 'ग़लत' फ़ैसलों पर छिड़ी बहस

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Image caption इस मैच में एड क़वन और माईक हसी के आउट पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

मेलबर्न टेस्ट के पहले दिन अंपायर के कुछ फै़सलों से ऑस्ट्रेलियाई ख़ेमे में बहस छिड़ गई है.

साथ ही ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने इस सिरीज़ में अंपायर के ग़लत फैसलों को टीवी की मदद से बदलने की प्रक्रिया (यूडीआरएस) नहीं इस्तेमाल करने की आलोचना की है.

यूडीआरएस नियम के तहत जब खिलाड़ी को अंपायर के किसी फ़ैसले पर एतराज़ होता है तो वो इसकी अपील कर सकता है और तीसरा अंपायर टीवी पर रिकॉर्डिंग को देखकर उस फ़ैसले को सही या ग़लत बताता है.

लेकिन यूडीआरएस के लिए सिरीज़ से पहले दोनों क्रिकेट बोर्ड की सहमति होनी ज़रूरी है. सिरीज़ से पहले ऑस्ट्रेलिया इसके हक में था, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने मना कर दिया था जिसकी वजह से इस सिरीज़ में यूडीआरएस का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है.

इस मैच में एड क़वन और माईक हसी के आउट पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

दोनों ही विकेट के पीछे लपके गए थे लेकिन टीवी रिप्ले पर लग रहा था कि शायद गेंद ने बल्ले को छुआ ही नहीं है.

एड कॉवन ने कहा "आप सब रिप्ले में देख सकते हैं कि क्या हुआ. मैं टेस्ट क्रिकेट में अभी नया हूं लेकिन कह सकता हूं कि यूडीआरएस का इस्तेमाल सभी जगह होना चाहिए."

वहीं पूर्व ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी और भारतीय कोच ग्रेग चैपल ने हैरानी जताई है कि इस बारे में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल कुछ क्यों नहीं कर रही है.

यूडीआरएस पर मीडिया में बहस

ऑस्ट्रेलियाई के टीवी चैनल फ़ॉक्स स्पोर्ट्स पर एक बातचीत में उन्होंने कहा, "आईसीसी को सभी देशों में यूडीआरएस को लागू करना चाहिए. इससे खेल के स्तर में सुधार होगा लेकिन बीसीसीआई इसका विरोध करती है क्योंकि कुछ भारतीय खिलाड़ियों को लगता है कि इसके न होने से नज़दीकी मामलों में उनके आउट न होने की संभावना ज़्यादा होती है."

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के जनसंपर्क मैनेजर पीटर यंग ने कहा कि यूडीआरएस के लिए ज़रूरी तकनीक सभी देशों के पास नहीं है.

उन्होंने कहा, " जांच से पता चला है कि यूडीआरएस के इस्तेमाल से खेल में 97 प्रतिशत फ़ैसले सही होते हैं और उसके बिना सिर्फ़ 92 प्रतिशत. हम चाहते हैं कि ये सभी जगह लागू हो लेकिन हम ये भी जानते हैं कि इसके लिए ज़रूरी टीवी की उच्च तकनीक सभी देशों के पास शायद नहीं होगी."

बीसीसीआई का मानना है कि ये तकनीक शत प्रतिशत सही फैसला नहीं दे सकती इसलिए इसे लागू करने की ज़रूरत नहीं है.

भारतीय टीम के गेंदबाज़ उमेश यादव से संवाददाता सम्मेलन में इसके इस्तेमाल के बारे में सवाल पूछा गया लेकिन उन्होंने इस मामले में कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया.

बहरहाल ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में लगभग सभी अख़बारों ने इस ख़बर को तरज़ीह दी है और बड़ी जगह देकर छापा है.

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