तेज़ विकेट पर भारतीय टीम की अग्निपरीक्षा

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पर्थ के तेज़ माने जाने वाले विकेट पर शुक्रवार को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाले तीसरे टेस्ट से पहले ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी जमकर पसीना बहा रहे है.

ऑस्ट्रेलिया के तेज़ गेंदबाज़ अपनी गेंदबाज़ी में और तेज़ी और उछाल लाने के लिए विशेष तौर पर अभ्यास कर रहे है.

नेट पर आते ही गेंदबाज़ी कोच क्रेग मैकडरमट ने अपनी पेस बैट्री को नई गेंद से गेंदबाज़ी करने को कहा. अभ्यास के लिए कोच ने विकेट से दो फुट ऊपर एक तख्ती लगाई और गेंदबाज़ों से कहा कि वो उसको निशाना बनाकर गेंदबाज़ी करें.

इस अभ्यास के बाद पीटर सिडल, रायन हैरिस, मिचेल स्टार्क औऱ हिलफ़ेनहॉस ने पूरा रन-अप लेकर ऐसी गेंदबाज़ी की जिससे ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों को भी मुश्किल होने लगी.

सिडल की पहली ही गेंद को तेज़ उछाल मिली जो ओपनर एट कॉवन के बिल्कुल हेलमेट के पास से गुज़री और वो किसी तरह से गेंद की लाईन से हट पाए.

चुनौती

कोच मैकडरमट अपने गेंदबाज़ों के प्रदर्शन से आश्वस्त नज़र आ रहे हैं, वहीं पर्थ की अग्नि परीक्षा भारतीय टीम के लिए मुंह बाएं खड़ी है.

हालांकि भारतीय टीम के लिए मनोबल बढ़ाने वाली बात ये है कि वर्ष 2008 में पर्थ के ही मैदान पर भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराया था.

भारतीय टीम के वरिष्ठ बल्लेबाज़ राहुल द्रविड़ का मानना है कि पिच पर घास ज़रूर है लेकिन इससे परेशानी दोनों ही टीमों को होगी.

संवाददाता सम्मेलन में द्रविड़ ने कहा, “दोनों ही टीमों के लिए एक ही विकेट है और ये उनके बल्लेबाज़ों के लिए भी कड़ी परीक्षा है. पिछली बार हम ने उन्हें पर्थ में हराया था, उससे हमें बहुत संतुष्टि मिलती है. हम घर के बाहर भी जीतना चाहते हैं सभी तरह की कंडीशन में जीतना चाहते हैं और पर्थ हमें वो मौका देता है.”

इस सिरीज़ में राहुल द्रविड़ तीन बार बोल्ड आउट हुए हैं. द्रविड़ ने कहा कि वो अपनी तकनीक पर ध्यान दे रहे हैं लेकिन फॉर्म को लेकर चिंतित नहीं है.

'खेलने का अंदाज़ जुदा'

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Image caption रिकी पोंटिंग का कहना है कि पर्थ के तेज़ पिच का ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ जमकर फ़ायदा उठाएंगे. (फ़ाईल)

पर्थ की पिच को ध्यान में रखते हुए ऑस्ट्रेलिया चार तेज़ गेंदबाज़ों को खिला सकता है. ऐसे में भारतीय बल्लबाज़ों की क्या रणनीति होगी इस पर द्रविड़ ने कहा कि सभी बल्लेबाज़ तैयार हैं और वो अपने स्वाभाविक खेल में कोई बदलाव नहीं करना चाहेंगे.

द्रविड़ ने कहा, “तेज़ गेंदबाज़ों को खेलने का सभी बल्लेबाज़ों का अपना अंदाज़ होता है. मैं सहवाग की तरह नहीं खेल सकता और सहवाग मेरी तरह नहीं. ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों को हम जितना थका सकें हमारे लिए उतना बेहतर होगा.”

वहीं ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने कहा कि पिछले दौरे पर भारतीय टीम 2-0 से पीछे थी लेकिन पर्थ में उन्हें सिरीज़ की पहली जीत मिली थी, लेकिन इस बार वो भारतीय टीम को वापसी का कोई मौका नही देना चाहते. उस मैच के बाद पोंटिंग ने कहा था कि पर्थ का विकेट धीमा हो गया है और अपना चरित्र खोता जा रहा है.

हालांकि बुधवार को अभ्यास के बाद पोंटिंग ने कहा कि पर्थ का विकेट एक बार फिर तेज़ दिख रहा है और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ और बल्लेबाज़ इसका पूरा फायदा उठाएंगे.

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