ओलंपिक का इतिहास

  • 18 जनवरी 2012

1948-2008

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1948 में ओलंपिक के आयोजन की ज़िम्मेदारी मिली लंदन को. युद्ध के ज़ख़्म भरे नहीं थे.

आगे आने वाले कई ओलंपिक खेलों में बहिष्कार और विरोध का अपना ही अंदाज़ देखने को मिला. कई बार किसी ख़ास देशों को न्यौता नहीं मिला तो कई बार देशों ने ओलंपिक का ही बहिष्कार किया.

भले ही विश्व युद्ध ख़त्म हो गया था. लेकिन दुनिया बँटी हुई थी. शीत युद्ध चल रहा था. दुनिया दो ख़ेमे में बँटी हुई थी. ओलंपिक भी कभी-कभी राजनीति की बिसात पर एक मोहरा साबित हुआ.

1972 के म्यूनिख ओलंपिक में तो चरमपंथी हमले और इसराइली खिलाड़ियों की हत्या से सनसनी फ़ैल गई.

तो दूसरी ओर तमाम विवादों के बावजूद ओलंपिक खेलों का आयोजन होता रहा. खिलाड़ी मैदान पर अपनी प्रतिभा का जादू दिखाने को बेताब दिखे और ओलंपिक पदक लेने की होड़ सी लग गई.

दुनिया ने ओलंपिक खेलों में कई महान खिलाड़ियों का प्रदर्शन देखा तो कई महान खिलाड़ियों की विदाई भी दी.

इस बीच प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों के ड्रग्स लेने का मामला भी सामने आया और रातों-रात स्टार बने बेन जॉनसन को अपना पदक गँवाना पड़ा. खेल की दुनिया के लिए यह बड़ा झटका था. लेकिन ओलंपिक आयोजन समिति ने अपनी ओर से इससे निपटने की कोशिश की.

आइए नज़र डाले 1948 से 2008 के ओलंपिक खेलों के सफ़र और उनकी रोचक दास्तान पर.

1948

इमेज कॉपीरइट

लंदन में 1944 में ओलंपिक होने वाले थे लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के कारण लंदन को ये मौक़ा मिला 1948 में. इस ओलंपिक में रिकॉर्ड 59 देशों ने हिस्सा लिया. जर्मनी और जापान को ओलंपिक का निमंत्रण नहीं मिला.

जबकि सोवियत संघ की ओर से कोई एथलीट इसलिए नहीं आया क्योंकि ओलंपिक समिति से उन्हें मान्यता नहीं मिली थी. ख़र्च के कारण लंदन में कोई ओलंपिक विलेज नहीं बन पाया और खिलाड़ियों को सैनिक बैरकों या फिर कॉलेजों में ठहराया गया.

कई टीमों को तो अपना खाना अपने साथ लेकर आना पड़ा. एथलेटिक्स प्रतियोगिता वेंबली स्टेडियम में हुई. एथलेटिक्स प्रतियोगिता के स्टार थीं डट एथलीट फ़ैनी ब्लैंकर्स कोएन. दो बच्चों की माँ कोएन को फ़्लाइंग हाउसवाइफ़ कहा जाता था.

कोएन ने 100 मीटर, 100 मीटर और 800 मीटर बाधा और रिले दौड़ में चार स्वर्ण पदक जीते. नियमों के अनुसार किसी महिला को तीन से ज़्यादा व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भाग लेने की अनुमति नहीं थी इसलिए कोएन ने ऊँची कूद और लंबी कूद प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं लिया जिसमें उनके नाम विश्व रिकॉर्ड था.

एक बार फिर मेडल तालिका में सबसे ऊपर रहा अमरीका. दूसरे नंबर पर स्वीडन और तीसरे स्थान पर फ़्रांस रहा.

1952

इमेज कॉपीरइट

1912 के बाद रूसी एथलीटों की एक बार फिर ओलंपिक खेलों में वापसी हुई. लेकिन अब वे कम्युनिस्ट सोवियत संघ के प्रतिनिधि थे. लेकिन सोवियत संघ और दूसरे इस्टर्न ब्लॉक के देशों ने ओलंपिक विलेज में पूँजीवादी देशों के साथ टिकने से मना कर दिया.

इन देशों को छात्रावास में ठहराया गया. यह ओलंपिक पूरी तरह पूँजीवादी और साम्यवादी देशों की टकराव का मैदान बन गया. किसी भी देश का खिलाड़ी अगर जीतता था तो संबंधित देश यही दावा ठोंकते थे कि इससे उनकी सर्वोच्चता साबित हुई है.

चेकोस्लोवाकिया के एमिल ज़ैटोपेक ट्रैक एंड फ़ील्ड के हीरो साबित हुए. उन्होंने लंबी दूरी की दौड़ में कई पदक जीते. चेक एक्सप्रेस के नाम से मशहूर इस सैनिक अधिकारी ने 5000 मीटर, 10000 मीटर और मैराथन में स्वर्ण पदक जीते.

फ़ैनी ब्लैंकर्स कोएन का करियर का भावनात्मक अंत हुआ. वे 80 मीटर की बाधा दौड़ में गिर पड़ीं. उन्होंने भरी आँखों से ट्रैक छोड़ा और फिर कभी ओलंपिक में नहीं खेल पाईं.

जिम्नास्टिक में सोवियत दबदबा क़ायम हुआ. मारिया गोरोखोवस्क्या ने दो स्वर्ण और पाँच रजत पदक जीतकर एक रिकॉर्ड बनाया.

1956

इमेज कॉपीरइट

ऑस्ट्रेलिया में पहले से यह नियम लागू था कि बाहर से आने वाले जानवरों को छह महीने तक अलग-थलग रखा जाता था ताकि उन्हें छूत की बीमारी न लगे.

यह नियम ओलंपिक के लिए भी लागू थी और इस कारण घुड़सवारी प्रतियोगिता के आयोजन पर प्रश्न चिह्न लग गए और यह प्रतियोगिता मेलबोर्न की जगह स्टॉकहोम में आयोजित की गई.

यूरोप और कई अमरीकी देशों को वहाँ के मौसम से भी समस्या हुई. कई देशों के पास इतने पैसे थे नहीं कि वे वहाँ के मौसम के अनुकूल होने के लिए खिलाड़ियों को पहले ही वहाँ भेज देते. आने-जाने के ख़र्चों के कारण कई देशों ने ओलंपिक से अपना नाम वापस ले लिया.

ताईवान ने ओलंपिक ने हिस्सा लिया तो चीन ने अपना नाम वापस ले लिया. स्वेज़ संकट के कारण लेबनॉन और मिस्र बाहर हो गए तो हंगरी पर सोवियत आक्रमण के कारण लिंचेस्टाइन, नीदरलैंड, स्पेन और स्विट्ज़रलैंड ने ओलंपिक में शामिल न होने का फ़ैसला किया.

राजनीतिक घटनाक्रमों का असर कुछ मुक़ाबलों पर भी देखने को मिला. हंगरी और सोवियत संघ के बीच वाटर पोलो मैच खिलाड़ियों के दुर्व्यवहार के कारण रद्द करना पड़ा.

सोवियत संघ की जिम्नास्ट लैरिसा लैटिनीना ने चार स्वर्ण और कुल छह पदक जीते. जबकि ऑस्ट्रेलिया की बेटी कुथबर्ट ने ट्रैक एंड फ़ील्ड मुक़ाबले में तीन स्वर्ण पदक जीते. मैराथन में छठे स्थान पर आने के बाद एमिल ज़ैटोपेक ने संन्यास ले लिया. सोवियत संघ के व्लादीमिर कुत्स ने 5000 मीटर और 10,000 मीटर में जीत हासिल की.

1960

इमेज कॉपीरइट

रोम ओलंपिक पहला ओलंपिक था जिसका दुनियाभर में व्यापक टेलीविज़न प्रसारण हुआ. ओलंपिक स्टेडियम में हुए रंगारंग उदघाटन समारोह को देखने के लिए क़रीब एक लाख लोग जुटे.

सोवियत संघ के खिलाड़ियों को छोड़कर सभी देशों के खिलाड़ियों ने सेंट पीटर्स स्क्वेयर जाकर पोप का आशीर्वाद लिया.

हमेशा की तरह इस बार भी सर्वाच्चता के लिए मुक़ाबला सोवियत संघ और अमरीका के बीच ही हुआ. लेकिन इस ओलंपिक में बाज़ी मारी 42 स्वर्ण पदकों के साथ सोवियत संघ ने. अमरीका की धावक विलमा रूडोल्फ़ ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. उन्होंने 100 मीटर, 200 मीटर और 4 गुणा 100 मीटर रिले में स्वर्ण पदक जीते. उन्हें बचपन से ही पोलियो से ग्रसित थी.

लेकिन इस ओलंपिक से जिस खिलाड़ी का नाम रोशन हुआ वे थे क्लेसियस क्ले जो बाद में मोहम्मद अली. उन्होंने लाइट हेवीवेट मुक़ाबले में गोल्ड मेडल जीता.

लंबी दूरी की दौड़ प्रतियोगिताओं में इथियोपिया का दबदबा इसी ओलंपिक से बढ़ा. एबीबी बिकिला ने नंगे पाँव मैराथन जीतकर खूब वाहवाही लूटी.

तैराकी मुक़ाबलों में प्रदर्शन का स्तर इतना ऊँचा था कि कई रिकॉर्ड बने. हालाँकि ब्रिटेन की अनीता लाँसब्रो ने ऑस्ट्रेलिया और अमरीका को सभी 15 स्पर्धाओं में जीत हासिल करने से रोका.

1964

इमेज कॉपीरइट

1964 में पहली बार ओलंपिक खेल एशिया में आयोजित हुए. भारी संख्या में लोग ओलंपिक प्रतियोगिता देखने के लिए जुटे. चीन ने स्टेडियम और परिवहन व्यवस्था पर तीन अरब रुपए ख़र्च किए.

दक्षिण अफ़्रीका को ओलंपिक में शामिल होने का निमंत्रण नहीं दिया गया जबकि इंडोनेशिया और उत्तरी कोरिया पर प्रतिबंध लगा दिया गया.

फिर भी 14 देश पहली बार ओलंपिक में शामिल हुए और इस तरह कुल 93 देशों ने ओलंपिक में हिस्सा लिया जो एक रिकॉर्ड था. वॉलीवॉल और जूडो पहली बार ओलंपिक में शामिल हुए. हॉलैंड के एंटोनियस जीसिंक ने जूडो का पहला ख़िताब जीता.

इथियोपिया के एबीबी बिकिला ने सफलतापूर्वक अपने मैराथन ख़िताब की रक्षा की. इस बार उन्होंने जूते पहने थे लेकिन छह सप्ताह पहले ही उनके एपेंडिक्स का ऑपरेशन हुआ था. महिलाओं की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में ब्रिटेन की ओर से पहला गोल्ड जीता मैरी रैंड ने.

इस ओलंपिक में सबसे बढ़िया प्रदर्शन किया अमरीकी तैराक डॉन स्कोलेंडर. उन्होंने चार स्वर्ण पदक जीते. जबकि सोवियत संघ की जिम्नास्ट लैरिसा लैटीनिना ने ओलंपिक में अपनी प्रभुता और बढ़ाई. उन्होंने इस ओलंपिक में दो स्वर्ण और कुल छह पदक जीते.

1968

इमेज कॉपीरइट

काफ़ी ऊँचाई पर स्थित होने के कारण मैक्सिको सिटी में धावकों को तो ज़रूर मुश्किल हुई लेकिन और प्रतियोगिताओं में कई विश्व रिकॉर्ड टूटे.

इस ओलंपिक पर भी राजनीति की छाया रही. दक्षिण अफ़्रीका इस ओलंपिक से भी ग़ैर हाज़िर रहा क्योंकि अफ़्रीका के कई अश्वेत देशों ने चेतावनी दी थी कि अगर दक्षिण अफ़्रीका को बुलाया गया तो वे ओलंपिक में शामिल नहीं होंगे.

इस ओलंपिक में पदक वितरण समारोह के दौरान अमरीका के दो अश्वेत खिलाड़ियों ने टॉमी स्मिथ और जॉन कार्लोस ने अपने काले दस्ताने उठाकर अपनी प्रभुता की जयजयकार की.

लेकिन टीम प्रबंधन ने उनके सांकेतिक प्रदर्शन को गंभीरता से लिया और उन पर पाबंदी लगा दी. इन दोनों खिलाड़ियों को वापस स्वदेश भेज दिया गया. इस ओलंपिक के दौरान 34 विश्व और 38 ओलंपिक रिकॉर्ड बने.

लेकिन अपने प्रदर्शन से सबसे ज़्यादा वाहवाही लूटी लंबी कूद में अमरीका के बॉब बीमन ने. उन्होंने 8.90 मीटर छलांग लगाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया.

ऊँची कूद में अमरीकी खिलाड़ी डिक फ़ॉसबरी ने नयी तकनीक से छलांग लगाकर उस प्रतियोगिता में नई शुरुआत की.

1972

इमेज कॉपीरइट

म्यूनिख ओलंपिक खेल के कारण नहीं बल्कि चरमपंथी हमलों के कारण चर्चित रहे. म्यूनिख में इसराइली एथलीटों पर हुए चरमपंथी हमले में 11 एथलीट, पाँच चरमपंथी और एक पुलिसवाले की मौत हो गई. हादसे के दूसरे दिन मारे गए खिलाड़ियों को श्रद्धांजलि देने के बाद ओलंपिक खेल निलंबित कर दिए गए.

लेकिन बाद में इसराइली अधिकारियों से समझौते के बाद ओलंपिक खेल दोबारा शुरू हुए. इस चरमपंथी हमले के बाद इसराइली टीम स्वदेश लौट गई. साथ में नीदरलैंड, नॉर्वे और फ़िलीपिंस के कई खिलाड़ी भी वापस लौट गए. हालाँकि आम तौर पर लोगों का यही मत था कि ओलंपिक होने चाहिए. क्योंकि चरमपंथी भी खेल नहीं होने देना चाहते थे.

ओलंपिक पर अफ़्रीकी राजनीति एक बार फिर हावी रही. रोडेशिया (बाद में ज़िम्बाब्वे) की टीम को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने कई देशों की आपत्ति के बाद वापस भेज गिया. रोडेशिया की रंगभेद नीति की भी पूरी दुनिया में आलोचना हो रही थी. लेकिन इसके बावजूद उसने अपनी 30 सदस्यीय टीम वहाँ भेजी थी. आईओसी के फ़ैसले के बाद रोडेशिया के खिलाड़ियों को लौटना पड़ा.

म्यूनिख ओलंपिक से एक बार फिर तीरंदाज़ी की वापसी हुई और जूडो को ओलंपिक में अब स्थायी तौर पर शामिल कर लिया गया. इस ओलंपिक में इनडोर हैंडबॉल पहली बार खेला गया. मैक्सिको में दो गोल्ड मेडल जीतने वाले तैराक मार्क स्पिट्ज़ इस ओलंपिक के स्टार रहे.

उन्होंने व्यक्तिगत मुक़ाबले में चार स्वर्ण जीते और वह भी विश्व रिकॉर्ड के साथ. तीन रिले गोल्ड जीतकर उन्होंने अपनी उपलब्धि में चार चाँद लगा दिए.सोवियत जिम्नास्ट ओल्गा कॉरबुत तीन स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर रातों-रात एक स्टार बन गईं.

1976

इमेज कॉपीरइट

ओलंपिक की तैयारी को लेकर हुई ग़लतियाँ और ख़र्च का आकलन करने में हुई देरी के कारण मॉन्ट्रियल ओलंपिक को ख़ामियाज़ा भी भुगतना पड़ा. कई इमारतें तो ओलंपिक शुरू होने के बाद भी नहीं बन पाईं थी. क्रेन और दूसरे उपकरणों की मौजूदगी में कई मुक़ाबले कराने पड़े.

म्यूनिख ओलंपिक में हुए चरमपंथी हमले के बाद इस ओलंपिक में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी. एक बार फिर कई देश इस ओलंपिक में भी शामिल नहीं हुई. 116 पंजीकृत टीमों में से 24 टीमें इस ओलंपिक में शामिल नहीं हुईं.

भाग न लेने वाले देशों में 22 अश्वेत अफ़्रीकी देश भी शामिल थे जिन्होंने न्यूज़ीलैंड के ओलंपिक में भाग लेने के कारण ओलंपिक का बहिष्कार किया.दरअसल न्यूज़ीलैंड ने दक्षिण अफ़्रीका में जाकर रग्बी मैच खेला था और दक्षिण अफ़्रीका अपनी रंगभेद नीति के कारण दुनियाभर में विरोध झेल रहा था.

जिम्नास्टिक में रोमानिया की 14 वर्षीय नादिया कोनानेची ने ओल्गा कोरबुत का वर्चस्व तोड़ा. कोमानेची ने तीन स्वर्ण, एक रजत और एक काँस्य पदक जीतने में सफलता पाई.

फ़िनलैंड के लासे वीरेन ने 5000 और 10,000 मीटर में एक बार फिर स्वर्ण जीता. जबकि क्यूबा के अल्बर्टो हुआनटोरेना ने 400 और 800 मीटर का स्वर्ण जीता.

तैराकी मुक़ाबलों में अमरीका और पूर्वी जर्मनी का दबदबा रहा. लेकिन ब्रिटेन के डेविड विल्की ने भी क़ामयाबी हासिल की. विल्की ने 200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में विश्व रिकॉर्ड क़ायम किया.

1980

इमेज कॉपीरइट AFP

पहली बार ऐसे देश में ओलंपिक खेल आयोजित हो रहे थे जो कम्युनिस्ट शासन के अधीन था. 1979 में अफ़ग़ानिस्तान पर सोवियत हमले के विरोध में कई देशों ने इस ओलंपिक का बहिष्कार भी किया.

जापान, पश्चिम जर्मनी और अमरीका जैसे देशों की ग़ैर मौजूदगी से तो भविष्य में ओलंपिक खेलों पर प्रश्नचिन्ह लग गया था.

हालाँकि इन देशों के ओलंपिक में न शामिल होने से कई मुक़ाबलों के विजेता दूसरे देशों के बने फिर भी ओलंपिक का स्तर बढ़िया था.

मॉस्को में 36 विश्व रिकॉर्ड, 39 यूरोपीय रिकॉर्ड और 73 ओलंपिक रिकॉर्ड बने. पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में रोमांचक मुक़ाबला हुआ.

ब्रिटेन के एलेन वेल्स और क्यूबा के सिल्वियो लियोनार्ड के बीच ज़बरदस्त होड़ रही लेकिन बाज़ी मारी वेल्स ने.

पुरुषों की दौड़ प्रतियोगिता में ब्रिटेन को दो और स्वर्ण मिले. स्टीव ओवेट ने 800 मीटर और को ने 1500 मीटर में जीत हासिल की. तैराकी में ब्रिटेन के डंकन गुडहेव ने 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में स्वर्ण हासिल किया.

1984

इमेज कॉपीरइट

अमरीका ने 1980 के मॉस्को ओलंपिक का बहिष्कार किया था इसलिए 1984 के लॉस एंजेलेस 1984 ओलंपिक में सोवियत संघ ने हिस्सा नहीं लिया.

हालाँकि सोवियत संघ ने अपने हिस्सा न लेने का कारण सुरक्षा व्यवस्था कहा लेकिन आम तौर पर यही कहा जा रहा था कि उसने बदले की भावना से यह फ़ैसला किया. ओलंपिक दिखाने के लिए टेलीविज़न अधिकार को लेकर मारामारी होने लगी थी और इसमें पैसा भी अच्छा-ख़ासा लग रहा था.

आलोचक अब ये कहने लगे थे कि एक समय ग़ैर पेशेवर खिलाड़ियों की यह प्रतियोगिता पैसों का खेल बनने लगी है. लॉस एंजिल्स की ट्रैक पर जादू चला कार्ल लुईस का जिन्होंने जैसे 48 साल पहले जेसी ओवंस का कारनामा दोहरा दिया.

लुईस ने 100 मीटर, 200 मीटर, लंबी कूद और 4 गुणा 100 मीटर रिले दौड़ में स्वर्ण हासिल किया. लेकिन लुईस के ओलंपिक रिकॉर्ड पर उस समय विवाद छाने लगा जब 1988 में उन्हें प्रतिबंधित दवाएँ लेने का दोषी पाया गया. ब्रिटेन के सेबेस्टिन को और डेली थॉमसन ने 1500 मीटर और डेकेथलॉन ने अपने ख़िताब की रक्षा की.

जिम्नास्टिक में रोमानिया की इकाटेरिना ज़ाबो ने चार स्वर्ण और एक रजत पदक जीते. इस ओलंपिक को देखने क़रीब 57 लाख लोग जुटे.

1988

इमेज कॉपीरइट AFP

सोल ओलंपिक में आख़िरकार राजनीति का दख़ल कम हुआ. क्यूबा और इथियोपिया को छोड़कर सभी देश इसमें शामिल हुए. लेकिन इस ओलंपिक पर ड्रग स्कैंडल छाया रहा. सबसे बड़ा विवाद उठा प्रतिष्ठित पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में.

कनाडा के बेन जॉनसन ने अमरीका के कार्ल लुईस को पीछे छोड़ते हुए रिकॉर्ड 9.79 सेकेंड में दौड़ जीती.

लेकिन तीन दिन बाद इस खुलासे से तहलका मच गया कि बेन जॉनसन ने शक्तिवर्धक दवाइयाँ ली थीं. बेन जॉनसन का ख़िताब छीन लिया गया और उन पर पाबंदी भी लगा दी गई. लेकिन उन पर पाबंदी सिर्फ़ दो साल के लिए लगाई गई. बेन जॉनसन से ख़िताब छीने जाने के बाद कार्ल लुईस को स्वर्ण पदक मिल गया.

दूसरी ओर एथलेटिक्स में फ़्लोरेंस ग्रिफ़िथ जॉयनर ने अपना जलवा दिखाया. उन्होंने तीन स्वर्ण और एक रजत पदक जीता. उन्होंने 200 मीटर में विश्व रिकॉर्ड भी बनाया.

64 साल के बाद टेनिस की ओलंपिक में वापसी हुई. स्टेफ़ी ग्राफ़ ने गैब्रिएला सबातीनी को फ़ाइनल में हराकर महिलाओं का ख़िताब जीता जबकि पुरुष वर्ग में जीते मिलोस्लाव मेसिर. तैराकी में पूर्वी जर्मनी की क्रिस्टीन ओटो ने छह स्वर्ण जीते जबकि अमरीका के मैट बियोंडी ने पाँच स्वर्ण, एक रजत और एक काँस्य जीते.

1992

इमेज कॉपीरइट AFP

1992 का बार्सिलोना ओलंपिक एक यादगार ओलंपिक साबित हुआ. इसलिए क्योंकि एक भी देश ने इसका बहिष्कार नहीं किया. दक्षिण अफ़्रीका ने ओलंपिक में हिस्सा लिया जबकि एकीकृत देश के रूप में जर्मनी शामिल हुआ.

और तो और उदघाटन समारोह में अफ़ग़ानिस्तान ने भी हिस्सा लिया हालाँकि उनका एक भी खिलाड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले रहा था.

उदघाटन समारोह इतना शानदार था कि बड़ी संख्या में लोग इसे देखने के लिए मौजूद थे. अनुमान ये भी है कि क़रीब दो अरब लोगों ने इसे टीवी पर भी देखा. बार्सिलोना ओलंपिक में रिकॉर्ड 64 देशों ने पदक भी जीते.

बॉस्केटबॉल की अमरीकी टीम में शामिल थे महान 'मैजिक' जॉनसन और माइकल जॉर्डन. अमरीकी टीम को मुश्किल तो होनी नहीं थी. वही हुआ और ख़िताबी जीत उन्हें आसानी से मिली.

ओलंपिक शुरू होने से पहले ड्रग टेस्ट में शामिल न होने के कारण चीन और क्यूबा की काफ़ी आलोचना हुई. बार्सिलोना में सबसे सफल खिलाड़ी साबित हुए बेलारूस के विटाली शेरबो जिन्होंने छह स्वर्ण पदक हासिल किए. ब्रिटेन के लिनफ़ोर्ड क्रिस्टी ने 100 मीटर बाधा दौड़ और सैली गनेल ने 400 मीटर बाधा दौड़ में जीत हासिल की.

1996

इमेज कॉपीरइट PA

एक बार फिर ओलंपिक खेलों में चरमपंथी हमले की छाया रही. हालाँकि वह 1972 के म्युनिख ओलंपिक के जैसी नहीं थी. सेंटेनियल पार्क में हुए बम धमाके में दो लोग मारे गए और क़रीब 100 लोग ज़ख़्मी हुए.

लेकिन इस हादसे के बावजूद अटलांटा ओलंपिक को सफल आयोजन माना गया. हालाँकि वहाँ परिवहन और दूसरी समस्याएँ आयोजकों को परेशान करतीं रहीं.

आधुनिक ओलंपिक की 100वीं सालगिरह पर अटलांटा को एथेंस के मुक़ाबले प्राथमिकता दी गई. ओलंपिक मशाल जलाई महान मोहम्मद अली ने और इस ओलंपिक के दौरान कई यादगार प्रदर्शन भी हुए.

अमरीका के माइकल जॉनसन ने 200 मीटर और 400 मीटर में गोल्ड मेडल जीता. 200 मीटर में तो उन्होंने 19.32 सेकेंड का समय लगाकर विश्व रिकॉर्ड क़ायम किया.

लंबी कूद में स्वर्ण हासिल करते हुए कार्ल लुईस ने ओलंपिक में अपना नौंवा स्वर्ण जीता.100 मीटर में लिनफ़ोर्ड क्रिस्टी को अयोग्य ठहरा दिया गया क्योंकि उन्होंने दो बार ग़लत शुरुआत की. और दौड़ जीती कनाडा के डोनोवैन बेली ने. उन्होंने 9.84 सेकेंड लगाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया.

2000

इमेज कॉपीरइट

सिडनी ओलंपिक को अब तक के सभी ओलंपिक खेलों में सबसे सफल माना जाता है.

उदघाटन समारोह में ऑस्ट्रेलिया की कैथी फ़्रीमैन छायी रहीं. बाद में कैथी ने 400 मीटर में स्वर्ण, 4 गुणा 400 मीटर रिले में रजत और 200 मीटर में काँस्य पदक हासिल किया.

ब्रिटेन के स्टीव रेडग्रेव ने रोविंग में पाँच ओलंपिक गोल्ड जीतकर हाल ऑफ़ फ़ेम में जगह हासिल कर ली.

अमरीका के मौरिस ग्रीन ने 100 मीटर में जीत हासिल किया जबकि उनके साथी माइकल जॉनसन ने लगातार दूसरी बार 400 मीटर में स्वर्ण जीता.

अमरीका की मेरियन जोंस एक ओलंपिक के एथलेटिक्स मुक़ाबले में पाँच पदक जीतने वाली पहली महिला बनीं.

तैराकी मुक़ाबले में ऑस्ट्रेलिया के 17 वर्षीय तैराक इयन थोर्प छाए रहे. उन्होंने 400 मीटर फ़्री स्टाइल में अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़कर जीत हासिल की.

इसके अलावा थोर्प ने दो और स्वर्ण और दो रजत पदक जीते. लेकिन सबसे ज़्यादा पदक न थोर्प के खाते में आए और न मेरियन जोंस के.

रूस के जिम्नास्ट एलेक्सी निमोव को भले ही मीडिया में उतनी चर्चा न मिली हो लेकिन उन्होंने अपने देश के लिए कुल छह पदक जीते. अमरीका ने एक बार फिर सबसे ज़्यादा पदक जीते. उसके खाते में कुल 97 पदक आए जिनमें 39 स्वर्ण, 25 रजत और 33 काँस्य पदक थे.

2004

इमेज कॉपीरइट AP

वर्ष 2004 में एक बार फिर ग्रीस में ओलंपिक खेल आयोजित किए गए. ओलंपिक खेल एक बार फिर अपनी जन्मभूमि पर लौटे. प्राचीन ओलंपिक और पहला आधुनिक ओलंपिक खेल भी एथेंस में ही आयोजित किए गए थे. पहली बार रिकॉर्ड 201 देशों ने इस ओलंपिक में हिस्सा लिया.

सिडनी ओलंपिक के मुक़ाबले एथेंस ओलंपिक में एक प्रतियोगिता ज़्यादा हुई यानी पूरी 301 प्रतियोगिताएँ. एथेंस ओलंपिक के दौरान इस खेल की लोकप्रिया में ज़बरदस्त बढ़ोत्तरी हुई. एथेंस ओलंपिक के दौरान 3.9 अरब लोगों ने टेलीविज़न पर ओलंपिक खेलों का आनंद लिया.

पहली बार एथेंस ओलंपिक के दौरान ही इंटरनेट पर इन खेलों का भी सीधा प्रसारण हुआ.

पहली बार एथेंस ओलंपिक के दौरान महिलाओं की कुश्ती की प्रतियोगिता का आयोजन हुआ. एथेंस ओलंपिक अमरीकी तैराक माइकल फेल्प्स के नाम रहा. जिन्होंने छह स्वर्ण पदक जीते और एक प्रतियोगिता में कुल आठ पदक जीतने का रिकॉर्ड भी बनाया.

नीदरलैंड की लियोन्टिन ज़िलार्ड वैन मॉरसेल ने महिलाओं की साइकिलिंग प्रतियोगिता में चार स्वर्ण पदक और कुल छह अपने नाम किए. हिशाम अल गेरूज ने 1500 और 5000 मीटर की दौड़ में जीत हासिल की.

जबकि महिलाओं के वर्ग में केली होम्स ने 800 मीटर और 1500 मीटर का स्वर्ण पदक अपने नाम किया. ओलंपिक फ़ुटबॉल का ख़िताब अर्जेंटीना ने जीता, जिसने पूरी प्रतियोगिता के दौरान एक भी गोल नहीं खाए.

एथेंस ओलंपिक में भारत की ओर से 75 सदस्यीय दल ने शिरकत की थी. लेकिन भारत को सिर्फ़ एक पदक मिला. निशानेबाज़ी में राज्यवर्धन सिंह राठौर ने रजत पदक जीतकर भारत की लाज रखी.

2008

इमेज कॉपीरइट AFP

बीजिंग ओलंपिक को अब तक का सबसे अच्छा आयोजन माना जा रहा है. पंद्रह दिन तक चले ओलंपिक खेलों के दौरान चीन ने ना सिर्फ़ अपनी शानदार मेज़बानी से लोगों का दिल जीता बल्कि सबसे ज़्यादा स्वर्ण पदक जीत कर भी इतिहास रचा.

पहली बार पदक तालिका में चीन सबसे ऊपर रहा. जबकि अमरीका को दूसरे स्थान से ही संतोष करना पड़ा. भारत ने भी ओलंपिक के इतिहास में व्यक्तिगत स्पर्धाओं में पहली बार कोई स्वर्ण पदक जीता और उसे पहली बार एक साथ तीन पदक भी मिले. लेकिन पदक तालिका में उसका स्थान 50वाँ रहा.

बीजिंग ओलंपिक खेल अमरीका के सुपर स्टार तैराक माइकल फेलप्स के आठ स्वर्ण पदक जीतकर एक नया कीर्तिमान बनाने के लिए जाना जाएगा तो बिजली की सी गति से दौड़ने वाले जमैका के उसैन बोल्ट के भी प्रदर्शन के लिए इस ओलंपिक को याद रखा जाएगा.

कीनिया के सैमी वंजरू ने पुरुषों की मैराथन दौड़ जीती तो ओलंपिक का आख़िरी स्वर्ण पदक फ़्रांस के खाते में गया. फ़्रांस ने हैंडबॉल में जीत हासिल की.

भारत ने इस ओलंपिक में एक स्वर्ण और दो काँस्य पदकों के साथ कुल तीन पदक जीते. भारतीय निशानेबाज़ अभिनव बिन्द्रा ने इस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता जो व्यक्तिगत स्पर्द्धा में भारत का पहला स्वर्ण पदक भी था.

मगर व्यक्तिगत मुक़ाबलों के आधार पर अगर इस ओलंपिक से किसी खिलाड़ी का नाम इतिहास में दर्ज होगा तो वो होंगे अमरीकी तैराक माइकल फ़ेल्प्स.

उन्होंने अकेले ही आठ स्वर्ण पदक जीते यानी अगर फ़ेल्प्स को पदक तालिका में अलग से रखा जाए तो भी वो पहले दस स्थान के अंदर ही होंगे.

एथलेटिक्स में ये ओलंपिक जमैका के उसैन बोल्ट के नाम रहा. उन्होंने सौ और दो सौ मीटर के मुक़ाबलों में न सिर्फ़ विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता बल्कि बड़े अंतर से भी ये पदक जीता.

इतना ही नहीं वो चार गुणा सौ मीटर की दौड़ में जमैका को स्वर्ण पदक दिलाने वाली टीम का हिस्सा भी रहे.

ट्रैक ऐंड फ़ील्ड का अंतिम मुक़ाबला पुरुषों की मैराथन दौड़ अंतिम दिन हुई जिसमें स्वर्ण पदक कीनिया के युवा धावक सैमी वान्जिरु को मिला. उन्होंने दो घंटे छह मिनट 32 सेकेंड में ये दौड़ पूरी की.