लंदन ओलंपिक से भारत की उम्मीदें

Image caption अभिनव बिंद्रा ने ओलंपिक में भारत को निशानेबाज़ी में पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक दिलाया

भारत ने वर्ष 2008 के बीजिंग ओलंपिक में एक स्वर्ण और दो कांस्य पदकों के साथ कुल तीन पदक जीते थे.

फिर वर्ष 2010 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने 38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य पदकों के साथ कुल 101 पदक अपने नाम किए.

इसके बाद वर्ष 2010 में ही ग्वांगजो एशियाई खेलों में भारत ने अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए सबसे ज़्यादा 64 पदक जीते जिनमें 14 स्वर्ण पदक शामिल थे.

इन तमाम आंकड़ों ने लंदन ओलंपिक के लिए भारतीय खिलाड़ियों से उम्मीद बढ़ा दी है.

धुरंधरों पर नज़र

Image caption बॉक्सर विजेंदर कुमार के भी हौंसले बुलंद हैं

इन उम्मीदों में पहला नाम अभिनव बिंद्रा का है.

अभिनव ने बीजिंग में भारत को निशानेबाज़ी के लिए ओलंपिक में पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक दिलाया था.

बीजिंग ओलंपिक में ही काँस्य पदक जीतने वाले मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह और पहलवान सुशील कुमार एक बार फिर सबकी नज़रों में होंगे.

इस बार उनसे पहले से ज़्यादा उम्मीद की जा रही है.

राम यादव

ग्वांगजो एशियाई खेलों में भारत को सबसे ज़्यादा सोना एथलेटिक्स में मिला था.

मुंबई मैराथन के ज़रिए लंदन ओलंपिक का टिकट पाने वाले राम यादव से भारतीय एथलेटिक्स टीम को मज़बूती मिलना तय है.

लेकिन एशियाई खेलों की दोहरी स्वर्ण पदक विजेता अश्विनी अकुंजी समेत भारत की शीर्ष छह महिला एथलीटों पर एक साल का प्रतिबंध लग गया है.

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Image caption धावक राम यादव से भी पदक की उम्मीद है

इससे लंदन ओलंपिक में उनके खेलने की उनकी उम्मीदे लगभग ख़त्म हो गई हैं.

दक्षिण अफ़्रीका में आयोजित चैंपियंस चैलेंज टूर्नामेंट के फ़ाइनल में बेल्जियम ने भारत को हरा दिया था.

इसके बावज़ूद भारतीय टीम ओलंपिक के लिए क्वालिफ़ाई करने की भरसक कोशिश करेगी.

व्यक्तिगत स्पर्धाओं में टेबिल टेनिस में साइना नेहवाल और टेनिस में सानिया मिर्ज़ा के अलावा लिएंडर पेस के साथ ही महेश भूपति से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है.

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