'मैनचेस्टर यूनाइटेड के लिए खेलना चाहता हूं'

  • 14 फरवरी 2012
मैनचेस्टर युनाटेड का मुंबई में स्कूल
Image caption इंग्लिश फ़ुटबॉल क्लब मैनचेस्टर युनाटेड ने मुंबई में अपना पहला स्कूल खोला है.

युवा लड़के और लड़कियों की एक बड़ी भीड़ हरे-भरे मैदान के अलग-अलग भागों में कई टुकड़ों में बँट कर अभ्यास कर रही है. उनका कोच बार-बार खिलाड़ियों से कहता है 'ड्रिबल एलेस्टर, ड्रिबल वाज़.'

एलेस्टर फ़र्नाडिज़ कई साथी खिलाड़ियों से गेंद ड्रिबल करने की कोशिश कर रहा है. कोच उन्हें याद दिलाता है "आज ड्रिबल अभ्यास करने का दिन है".

मुंबई में फ़ुटबाल का गढ़ है कूपरेज. यहाँ हरी घास वाले मैदान के चारों तरफ़ स्टेडियम को फिर से बनाने का काम जारी है. मैदान के बीच में ड्रिब्लिंग की कला सिखाई जा रही है.

कूपरेज, इंग्लिश प्रीमियर लीग क्लब, मैनचेस्टर यूनाइटेड, का भारत में पहले फ़ुटबॉल स्कूल का घर भी है.

दोपहर का समय है और सूरज सर पर है, लेकिन लड़के और लड़कियों का उत्साह बना हुआ है. शायद यह पीढ़ी भारतीय फ़ुटबॉल का उज्जवल भविष्य हो सकती है.

एलेस्टर फर्नांडीस मुंबई में मैनचेस्टर यूनाइटेड फुटबॉल स्कूल में करीब 300 प्रशिक्षुओं में से एक है. इस स्कूल का उदघाटन पिछले महीने किया गया.

प्रशिक्षण के एक मॉड्यूल के लिए में 10 सत्र होते हैं और एक प्रशिक्षु को एक मॉड्यूल के लिए 12,600 रुपए देने पड़ते हैं.

ज़ाहिर है फीस इतनी महंगी है कि पिछड़े वर्ग के बच्चे इस स्कूल में फ़ुटबॉल नहीं सीख सकते. अधिकांश छात्र मध्यम या उच्च मध्यम वर्ग के परिवार से सम्बन्ध रखते हैं .

एलेस्टर सबसे कम उम्र के बच्चों में से एक हैं लेकिन वह सबसे महत्वाकांक्षी प्रशिक्षुओं में से भी एक है.

उसका सपना है कि वह भी मैनचेस्टर युनाइटेड के खिलाड़ी, नानी और वालेंसिया की तरह खेले. वो कहता है, "बड़ा हो कर मैं मैनचेस्टर युनाइटेड के लिए खेलना चाहता हूँ"

ये हैरानी की बात नही है कि यहाँ अधिकतर बच्चे विश्व के बड़े क्लबों के लिए खेलने का सपना देखते हैं न कि भारत के लिए. शायद इसीलिए भारत में फ़ुटबॉल का स्तर बहुत नीचे है.

भारत एक अरब से अधिक लोगों का देश ज़रूर है लेकिन फुटबॉल में यह दुनिया में 157 वें स्थान पर है.

लेकिन इस के बावजूद मैनचेस्टर यूनाइटेड ने फ़ुटबॉल स्कूल खोलने के लिए भारत को चुना.

भारत ही क्यों

जवाब क्रिस ओ ब्रायन देते हैं जो स्कूल के प्रमुख कोच हैं, "दुनिया भर में हमारे प्रशंसक हैं. हम एक वैश्विक फुटबॉल क्लब हैं. हमें अपने फ़ैन बेस तक पहुँचने की जरूरत है. भारत एक आदर्श उदाहरण है, यहाँ हमारे प्रशंसक लाखों में हैं. यह स्कूल खोल कर हम उन तक पहुंचना चाहते हैं. हम मैनचेस्टर यूनाइटेड फ़ुटबॉल की ओर से फ़ुटबॉल का स्तर बढ़ा कर उन्हें धन्यवाद देना चाहते हैं."

यह जताने के लिए मैनचेस्टर यूनाइटेड ने क्रिस को मैनचेस्टर से ख़ास तौर पर बच्चों को ट्रेन करने भेजा.

मैनचेस्टर यूनाइटेड के अलावा लिवरपूल, चेल्सी और आर्सेनल जैसे इंग्लिश फ़ुटबॉल क्लबों ने भी स्थानीय भागीदारों के साथ साझेदारी के अवसरों का पता लगाया है.

साथ ही जर्मन क्लब बेयर्न मुनिख और और स्पेनिश क्लब रियाल मैड्रिड जैसे कुछ दूसरे यूरोपीय फुटबॉल क्लब ने भी भारतीय बाजार में गहरी रुचि दिखाई है.

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत आने का असल मक़सद व्यापार है. यह क्लब भारत में व्यापार के भरपूर अवसर देखते हैं लेकिन आज नहीं बल्कि अगले तीन चार सालों में.

कुछ साल पहले ब्रिटेन - भारत व्यापार परिषद ने भारत में यूरोपीय खेलों को लाने पर एक सेमीनार किया था.

Image caption फ़ुटबॉल भारत में तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है.

इसमें खेल का सामान बनाने वाली कंपनी आदिदास के जोसलिन रॉबियोत का कहना था भारत में खेल के सामान का बाज़ार लगभग पांच सौ मिलियन डॉलर है जब कि विकास के लिए संभावित अवसर कई गुना मौजूद है

बढ़ती लोकप्रियता

फुटबॉल भारत में तेज़ी से लोकप्रिय होता जा रहा है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तव में क्रिकेट के बाद फुटबॉल दूसरा सबसे लोकप्रिय खेल बन सकता है.

पिछले कुछ वर्षों में लगभग सभी यूरोपीय क्लब इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि क्रिकेट की जगह नहीं ली जा सकती, लेकिन क्रिकेट के साथ जिया और फला-फूला भी जा सकता है.

मैनचेस्टर यूनाइटेड फुटबॉल 'स्कूलों' के निदेशक मुकुल चौधरी का कहना है कि क्रिकेट के साथ कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है.

उनके कहना है, "जिस तरह से भारतीय शहरों में फुटबॉल लोकप्रिय हो रहा है उसे देखते हुए हम उम्मीद करते हैं कि एक दिन क्रिकेट के साथ फुटबॉल भी भारत का ख़ास खेल बन जाएगा"

तो क्या यूरोपीय क्लब फ़िलहाल भारत में एक सांकेतिक उपस्थिति चाहते हैं या वे लंबे समय तक रह कर भारत में खेल का स्तर बढ़ाने का इरादा रखते हैं?

कोच क्रिस ओ'ब्रायन कहते हैं, "हम यहाँ कुछ हफ़्ते के लिए नहीं आए हैं. हम यहाँ ज़मीनी स्तर पर इस खेल का विकास करने आए हैं."

मैनचेस्टर यूनाइटेड ने भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी में कुछ शहरों में कैफ़े और खेल का सामान बेचने के लिए स्टोर खोले हैं.

लेकिन मुंबई फुटबॉल स्कूल एक लंबे सहयोग की शुरुआत है.

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