क्या सचिन वनडे को अलविदा कह सकते हैं?

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Image caption कई पूर्व खिलाड़ी मानते हैं कि सचिन को विश्वकप के बाद सन्यास ले लेना चाहिए था.

क्या सचिन तेंदुलकर क्रिकेट से कभी रिटायर भी हो सकते हैं?

ये एक ऐसा सवाल है जिसके बारे में सोचना भी शायद किसी पाप से कम नहीं है. भारतीय टीम में इस सवाल को कोई नहीं छेड़ता, चयनकर्ताओं की मंडली भी इस सवाल से घबराती है और फैंस की बात तो छोड़ ही दीजिए. सचिन के बिना क्रिकेट उनके लिए अधूरा ही है.

तो सवाल ये है कि आखिर क्रिकेट का भगवान समझे जाने वाले सचिन का विजयी रथ भला कैसे रुक सकता है.

लेकिन पिछले साल विश्व कप जीतने के बाद जिस अंदाज में भारतीय टीम लगातार मैच हार रही है उसका खमियाजा सचिन तेंदुलकर को भी भुगतना पड़ रहा है.

वनडे सिरीज में उनके खराब प्रदर्शन ने ये सवाल खड़ा कर दिया है कि सचिन तेंदुलकर को अब युवा खिलाड़ियों के लिए रास्ता छोड़ना चाहिए.

सौवें शतक का इंतजार

ये कहना कि क्रिकेट की हार्ड डिस्क में सबसे बड़ी जगह सचिन तेंदुलकर ने ली है गलत नहीं होगा.

पिछले 21 साल से वो लगातार खेल रहे हैं और इस बीच अनगिनत रिकॉर्ड उन्होंने अपने नाम किए हैं.

इनमें से एक 100वां शतक ऐसा है जिसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार है.

सचिन कितने समय से खेल रहे हैं इसका अंदाजा पिछले महीने पर्थ में भी खेले गए टेस्ट मैच से चलता है.

इसी मैदान पर सचिन ने 1992 में कमाल की पारी खेली थी और 114 रन बनाए थे.

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Image caption मौजूदा वनडे सिरीज में सचिन को रनों की तलाश है

उस वक्त ऑस्ट्रेलिया के आक्रमण की कमान क्रेग मैकडरमॉट और मर्व ह्यूज़ के हाथो में थी. इनके अलावा टॉम मूडी, माइक व्हिट्नी और अपना पहला टेस्ट खेल रहे पॉल राइफ़ल गेंदबाज़ी मे शामिल थे.

बीस साल बाद सचिन तेंदुलकर अभी भी क्रिकेट खेल रहे हैं लेकिन ऑस्ट्रेलिया के वो गेंदबाज कभी के रिटायर हो चुके हैं. उन पांच गेंदबाज़ों में से तीन पर्थ में ही किसी न किसी भूमिका में मौजूद थे. मैकडरमॉट ऑस्ट्रेलिया के बोलिगं कोच थे, राइफ़ल तीसरे अंपायर की भूमिका में थे और मूडी चैनल नाइन के लिए कमेंटेटर थे.

सचिन के साथ खेलने वाले कई खिलाड़ी रिटायर हो चुके हैं. अब तो कुछ टीमों में सबसे युवा खिलाड़ी ऐसे भी हैं जिनका जन्म भी सचिन के पहले मैच के बाद हुआ था.

फॉर्म पर नहीं है सवाल

मौजूदा त्रिकोणीय सिरीज में सचिन ने पांच पारियों में सिर्फ 18 की औसत से 90 रन बनाए है. हालांकि टेस्ट मेचौं में भारत के सबसे अच्छे बल्लेबाज नजर आए. उन्होंने कोई शतक नहीं लगाया लेकिन जिस तरह से उन्होंने शॉट्स खेले और जिस तरह उनका फुटवर्क चल रहा था, ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों ने भी माना कि अभी भी सचिन को आउट करना सबसे मुश्किल है.

दरअसल सचिन को कम से कम एक दिवसीय क्रिकेट से संन्यास लेने की बात जोर पकड़ने लगी है. इमरान खान, कपिल देव, सौरव गांगुली चंद ऐसे खिलाड़ी है जिन्होंने कभी सचिन के साथ क्रिकेट खेला था और अब मान रहे हैं कि वनडे मैचों में उनका वक्त आ गया है.

इन पूर्व खिलाड़ियों का पक्ष ये है कि सचिन 2015 के विश्व कप में नहीं खेल सकते. वो अभी भी सारे एक दिवसीय मैच नहीं खेल रहे हैं. इससे युवा खिलाड़ियों को टीम में जगह नहीं मिल रही है.

भविष्य की टीम

चयनकर्ताओं को अभी से सोचना होगा की टीम 2015 में कैसी होगी और उसकी तैयारी अभी से करनी होगी. जाहिर इस लंबी योजना में सचिन नहीं होंगे तो क्यों न वो सिर्फ टेस्ट पर ही पूरा ध्यान दे.

मंगलवार को जब ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने एक दिवसीय मैचों से संन्यास की घोषणा की तो उसका एक असर भारतीय खेमे में भी दिखा.

ऑस्ट्रेलिया की मीडिया में और भारतीय मीडिया में भी अटकले लगाई जाने लगी की जब पोंटिग टेस्ट सिरीज में शानदार फॉर्म के बाद वनडे की असफलताओं को देखते हुए संन्यास ले सकते हैं तो सचिन तेंदुलकर क्यों नहीं.

एक हफ्ते बाद भारतीय चयनकर्ता बांग्लादेश में खेली जाने वाली एशिया कप के लिए टीम का चयन करेंगे. क्या चयनकर्ता सचिन को टीम में शामिल करेंगे या खुद सचिन उस टूर्नामेंट में नहीं खेलने का फैसला लेंगे जैसा उन्होंने वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ वनडे न खेलने का लिया था.

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