ग्रेग चैपल: भारतीय टीम में नेतृत्व की कमी

  • 8 मार्च 2012
Image caption ग्रेग चैपल वर्ष 2005 से वर्ष 2007 के दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के कोच थे.

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच ग्रेग चैपल का कहना है कि टीम के खिलाड़ियों में नेतृत्व की कमी है और इसकी वजह ये है कि माता-पिता, स्कूल टीचर और कोच सभी भारतीय परिवेश में निर्णय लेते हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, चैपल ने कहा, ''भारतीय संस्कृति बहुत अलग है, ये कोई टीम संस्कृति नहीं है. टीम में नेतृत्व की कमी है क्योंकि उन्हें इसका प्रशिक्षण नहीं दिया जाता है.''

चैपल का कहना है, ''कम उम्र से ही उनके माता-पिता तमाम निर्णय लेते हैं, उनके स्कूल के शिक्षक उनके फैसले लेते हैं, उनके क्रिकेट कोच उनके फैसले लेते हैं. भारत की संस्कृति ऐसी है कि यदि आप मुंडेर से ऊपर अपना सिर करते हैं तो कोई गोली मार देगा. अपना सिर नीचे रखिए. ताकि वे अपना सिर नीचे रखना रखना सीखें और जिम्मेदारी न लें.''

'फीयर्स फोकस' नामक अपनी किताब के एक प्रमोशनल इवेंट में चैपल ने कहा, ''ब्रितानी लोगों ने उन्हें अपना सिर नीचा रखना वाकई अच्छे से सिखाया है.''

धोनी और सहवाग

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Image caption ग्रेग चैपल ने धोनी की तारीफ की है

चैपल का कहना है कि भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी इस नियम के एक अपवाद हैं लेकिन ऐसा लगता है कि वो भी इस तंत्र में खो हो गए हैं.

चैपल ने कहा, ''मैंने जिन लोगों के साथ अब तक काम किया है, उनमें धोनी सबसे प्रभावी युवाओं में से एक हैं. वो वाकई फैसले ले सकते हैं और वे अपना सिर मुंडेर से ऊपर करने की भी परवाह नहीं करते हैं. मुझे लगता है कि भारतीय क्रिकेट टीम में हाल के समय में वो सबसे बेहतर हैं.''

वे कहते हैं, ''लेकिन अब मैदान पर धोनी को देखकर नहीं लगता है कि ये वही धोनी हैं जिन्हें मैं जानता था. उन्होंने कहा कि ज्यादा क्रिकेट की वजह से धोनी के खेल पर असर पड़ रहा है.''

चैपल ने वीरेंदर सहवाग को भी निशाने पर लिया है. उनका कहना है कि सहवाग की कप्तानी की महत्वाकांक्षा ने भारतीय क्रिकेट टीम को नुकसान पहुंचाया है.

चैपल का कहना है, ''सहवाग ने सोचा था कि अनिल कुम्बले के बाद वो कप्तान बनेंगे, इस वजह से टीम में थोड़ा टकराव है.''

ग्रेग चैपल वर्ष 2005 से वर्ष 2007 के दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के कोच थे.

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