'अपने करियर में सचिन से आगे रहे द्रविड़'

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Image caption द्रविड का संन्या क्रिकेट में एक युग का अंत है

राहुल द्रविड़ ने सिर्फ क्रिकेट से संन्यास नहीं लिया, उनके साथ एक खास किस्म का खिलाड़ी भी सदा लिए पवेलियन वापस चला गया.

द्रविड़ मानते थे कि इज्जत, इमानदारी, साहस और सादगी के बर्ताव के बिना किसी भी बहतरीन खिलाड़ी का जीवन अधूरा ही होता है.

उनकी नजरों में ये सभी गुण गर्व, महत्वकांक्षा, दृढ़ निश्चय और ना हारने के जज्बे के साथ मेल खाते थे.

अपने 16 साल के करियर में वो अपने आदर्शों पर खरे रहे. उनके लिए आदर्शों पर चलने का महत्व रन बनाने और कैच लपकने से कहीं भी कम नहीं था.

अपने 16 वर्षों के करियर में उन्होंने सचिन तेंदुलकर से ज्यादा रन बनाए.

सौरव गांगुली की कप्तानी में खेले गए 21 टेस्ट जीतों में उन्होंने भारत के लिए 23 प्रतिशत रन बनाए और इन मैचों में उनका औसत 102.84 रहा.

भारतीय जीतों में राहुल द्रविड़ के योगदान ने ही भारत की विश्व की नंबर एक टीम बनने की राह आसान की थी.

द्रविड़ के शांत मनोबल ने ही अगली पीढ़ी के विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों को गुस्सा और आक्रमकता जताने का लाइसैंस दिया.

टेस्ट के लिए बने

टी20 मैचों में द्रविड़ का स्ट्राइक रेट 147 रहा और उन्होंने वनडे क्रिकेट में भी 10,000 से ज्यादा रन बनाए.

ये आंकड़े राहुल द्रविड़ के चरित्र और पेशेवर खेल को दर्शाते हैं क्योंकि उनके करियर में कई बार उन्हें सिर्फ टेस्ट क्रिकेट के लायक समझा गया था. लेकिन द्रविड़ ने इन सभी भविष्यवाणियों को लागातर गलत साबित किया.

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Image caption द्रविड़ को 'द वॉल' के नाम से भी जाना जाता है.

तीन साल पहले माना जा रहा था कि राहुल द्रविड़ का करियर खत्म हो गया है. वो बढ़िया बल्लेबाजी लेकिन खराब किस्मत और टीम में अपनी जगह बचाने लायक फॉर्म के बीच झूल रहे थे.

जब वो अच्छे फॉर्म में होते थे तो उनके फैंस को चिंता लगी रहती की वो अब आउट हो जांएगे और जब रन बनाते थे तो उसमें वो कलात्मकता और आकर्षण नहीं नजर आ रहा था जिसके लिए वो जाने जाते रहे हैं.

लेकिन अपने दोस्त और 146 मैचों के साथी सचिन तेंदुलकर की तरह उन्होंने अपने अंदर की शक्ति को दोबारा हासिल किया.

चंदीगढ़ में इंग्लैंड के विरुद्ध एक शतक और उसके बाद श्रीलंका के खिलाफ 2 शतकों की मदद से उन्होंने जताया कि अभी उन्होंने कुछ भी नहीं खोया है.

पिछले साल 38 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाए. हालांकि एक फर्क अब आ गया था.

पहले जब वो शतक बनाते थे, भारत को हार नहीं मिलती थी, लेकिन इस बार इंग्लैंड में उन्होंने तीन शतक लगाए लेकिन भारत को 4-0 की पराजय मिली.

ऑस्ट्रेलिया में भी भारत को 4-0 की हार मिली और इस सिरीज में द्रविड़ आठ में से छह बार बोल्ड आउट हुए थे.

सभ्य और शालीन

द्रविड़ कर्नाटक के उन महान खिलाड़ियों में शुमार करते हैं जो अपनी महानता के साथ साथ विनम्रता और शालीनता के लिए भी जाने जाते हैं.

गुंडप्पा विश्वनाथ, भागवत चंद्रशेखर, अनिल कुंबले और प्रकाश पादुकोण ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें अपनी काबिलियत पर पूरा भरोसा था लेकिन जो खुद को प्रकाश बिंदु में लाना नहीं चाहते थे.

ये एक ऐसी मनोदशा है जिसे आज के युवा खिलाड़ी समझ नहीं पाते हैं. इस तरह की दृष्टि से शायद प्रचार कम करने को मिले लेकिन उसका भी एक रूमानी आकर्षण है जो अब तेजी से खत्म होता जा रहा है.

द्रविड़ ऐसी ही परंपरा के खिलाड़ी थे.

इसके अलावा द्रविड़ उन चंद खिलाड़ियों में भी थे जो किसी भी तरह का क्रिकेट खेल सकते हैं लेकिन प्राथमिकता टेस्ट क्रिकेट ही देते हैं.

स्टीव वॉ की तारीफ

द्रवि़ड़ के खेल की तारीफ जिस तरह स्टीव वॉ ने की किसी और ने नहीं.

कोलकाता के प्रसिद्ध मैच में उनके 180 रनों की पारी को बयान करते हुए वॉ ने लिखा, "राहुल की बल्लेबाजी एक कविता के जैसे थी. उनका फॉलो थ्रू और फुटवर्क कमाल का था. उनका सर डेविड की प्रतिमा की तरह स्थिर था जिससे उन्हें जबरदस्त संतुलन मिलता था."

राहुल द्रविड़ ने अपने पहले टेस्ट मैच में लॉर्डस में 95 रन बनाए थे. लेकिन उन्हें इसके बजाए इसलिए याद रखा जाता है क्योंकि उन्होंने 'वॉक' किया था. (अंपायर ने आउट नहीं दिया था, लेकिन उन्हें लगा कि वो आउट हैं इसलिए वो पवेलियन लौट गए थे).

द्रविड़ दुनिया भर के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा के स्रोत थे. ऑस्ट्रेलिया के कप्तान रिकी पोंटिंग ने हाल ही में कहा था कि वो राहुल द्रविड़ से प्रेरणा लेते हैं.

द्रविड़ ने जब करियर की शुरुआत की थी तो उनकी मंशा थी कि उनकी गिनती गावस्कर और विश्वनाथ जैसे खिलाड़ियों के साथ की जाए. हमारे देश में जहां हीरो की पूजा की जाती है, द्रविड़ की गिनती इनसे उपर ही की जाएगी.

टेस्ट क्रिकेट में तीसरे नंबर पर खेलना क्रिकेट में सबसे ज्यादा तनावपूर्ण काम होता है. द्रविड़ को आराम चाहिए और वो उसके हकदार भी हैं.

लेकिन हम जैसे लोगों का अब क्या होगा? जब भी भारत मुश्किल में होगा हम ये नहीं कह सकेंगे, "द्रविड क्रीज पर है, चिंता की कोई बात नहीं है."

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