एक सौ एक साल के फौजा सिंह का आखिरी मैराथन

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लंदन मैराथन में रविवार को करीब 37 हजार 500 दौड़ने वालों, खिलाड़ियों, सेलिब्रिटी और लोगों ने हिस्सा लिया. ये मैराथन 26.2 मील का था.

कीनिया के विल्सन किपसांग ने लंदन मैराथन में पुरुष वर्ग में जीत हासिल की है. उन्होंने दो घंटे, चार मिनट और 43 सैंकेड का समय लिया. महिलाओं का खिताब भी कीनिया की ही मेरी को गया. उन्होंने दो घंटे, 18 मिनट और 33 सैंकेड लिए.

भारत और भारतीय मूल के लोगों के लिए मैराथन में विशेष रुचि रही. 101 साल के फौजा सिंह ने भी इसमें हिस्सा लिया. माना जाता है कि वे दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन धावक हैं.

ये उनका अंतिम मैराथन था हालांकि पूर्वी लंदन के रहने वाले फौजा सिंह दौड़ना नहीं छोड़ेंगे.

वे अब पांच और 10 किलोमीटर की कम दूरी वाली दौड़ों में हिस्सा लेंगे.

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पोतो-पड़पोतों वाले फौजा सिंह के लिए लंदन मैराथन काफी खास है. 12 साल पहले जब वे 89 साल के थे तब टीवी पर इसकी कवरेज देखकर ही उन्हें इस खेल को अपनाने की प्रेरणा मिली.

फौजा सिंह के कोच हरमंदर सिंह बताते हैं, "उन्हें उनके पहले मैराथन के लिए प्रशिक्षण देने के लिए मेरे पास केवल 10 हफ्ते थे. वे पहले तीन तीन पीस सूट और जूते लेकर आए थे. फिर जल्द ही उन्होंने मैराथन में भागने के लिए ट्रैक सूट खरीदा. उसके बाद उन्होंने कभी मुड़कर नहीं देखा."

फौजा सिंह ने कुल आठ मैराथन में हिस्सा लिया है जिसमें लंदन और न्यूयॉर्क मैराथन शामिल है. उनके लिए टोरंटो मैराथन काफी यादगार रहा है क्योंकि इसी से उन्हें विश्व के सबसे बुजुर्ग मैराथन रनर का खिताब मिला.

हालांकि उनकी उम्र को लेकर थोड़ा विवाद भी है क्योंकि उनके पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं है.

उनके कोच कहते हैं, "ये आलोचना सही नहीं है. फौजा सिंह का जन्म भारत में ऐसे समय हुआ था जब जन्म प्रमाणपत्र नहीं होते थे. उनके पास ब्रितानी पासपोर्ट है. महारानी ने उनके 100वें जन्मदिन पर बधाई संदेश भी भेजा था."

फौजा सिंह के प्रशंसकों का मानना है कि असल बात तो ये है कि मैराथन में दौड़ना एक मुश्किल काम है चाहे उम्र कितनी भी हो.

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