'सांसद सचिन' से कुछ खुश, कुछ हैरान

  • 27 अप्रैल 2012
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Image caption शतकों का शतक लगाने वाले सचिन रनों के अंबार पर बैठे हैं

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को राज्यसभा में नामजद किए जाने का कई पूर्व क्रिकेटरों और खिलाड़ियों ने स्वागत किया है, जबकि कुछ इस बात पर हैरान भी हैं कि सचिन ने सरकार के प्रस्ताव के स्वीकार कैसे कर लिया.

बल्लेबाज वीरेंदर सहवाग ने तो सचिन के राज्यसभा जाने में पर दिलचस्प टिप्पणी की है. ट्विटर पर उन्होंने लिखा, “राज्यसभा सदस्य के खिलाफ मेरा पहला आईपीएल मैच. उम्मीद है कि मौसम अच्छा रहेगा और हमें पूरा मैच खेलने को मिलेगा.”

वहीं भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज आकाश चोपड़ा को उम्मीद है कि सचिन सांसद बन कर खेलों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए कुछ कर सकते हैं.

उनका कहना है, “सचिन ने नामांकन को स्वीकार कर लिया है. मुझे उम्मीद है कि उन्होंने खेलों में बदलाव के लिए इसे स्वीकार किया है. उन खेलों के लिए उन्हें काम करना चाहिए जिनकी तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा है. राजनेताओं के खेल संघ चलाने जैसे मुद्दे भी उन्हें उठाने चाहिए.”

भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया भी यही मानते हैं कि सचिन को राज्यसभा सांसद बनाने से खेलों को फायदा होगा.

वह कहते हैं, “मैं मानता हूं कि यह पूरी तरह निजी फैसला है. अगर सचिन राजनीति में जाने का फैसला करते हैं तो वे चीजों को बदल सकते हैं. मुझे लगता है कि सचिन से सब लोगों को उम्मीदें रहती हैं और यहां भी वह अच्छा काम करेंगे. संसद में अच्छे राजनेताओं और अच्छे व ईमानदार लोगों की जरूरत है.”

आईपीएल टीम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलौर के मालिक विजय माल्या सचिन के राज्यसभा में जाने से खुश हैं. उन्होंने कहा, “मुझे यह जानकार खुशी हुई कि सचिन को राज्यसभा में नामजद किया गया है.”

सांसद सचिन पर हैरानी

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Image caption सचिन को भारत रत्न दिए जाने की तो बहुत चर्चा हुई लेकिन उन्हें राज्सभा में भेजे जाने का फैसला सबके लिए हैरानी भरा रहा

लेकिन सचिन के साथ खेल चुके पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर उन लोगों में शामिल हैं जो सचिन के फैसले से हैरान हैं. वह कहते हैं कि सचिन सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी राय जताने के लिए नहीं जाने जाते हैं.

मांजरेकर कहते हैं कि सचिन शांत स्वभाव के इंसान हैं. इसलिए बतौर सांसद उन्हें मुश्किलें पेश आ सकती हैं. उनके मुताबिक सचिन तो क्रिकेट से जुड़े मुद्दों पर भी अपना रुख नहीं रखते.

मांजरेकर का कहना है, “जब मैं सोचता हूं कि सचिन क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद क्या करेंगे तो मेरे जेहन में आता है कि वह क्रिकेट, कोचिंग या इसी से जुड़ा कुछ करेंगे. लेकिन संन्यास के बाद राज्यसभा सांसद बनना या फिर करियर के इस दौर में सचिन के ये पद लेने के बारे में तो मैं दूर दूर तक नहीं सोच सकता था.”

वहीं क्रिकेट कमेंटेटर और विश्लेषक हर्षा भोगले कहते हैं कि सचिन के पास सक्रिय सांसद बनने लायक अनुभव नहीं है.

उनका मानना है, “सचिन को लेकर हर कोई बात कर रहा है. लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह कोई बहुत अच्छा विचार है. अगर बात सचिन को सम्मान देने की है तो ठीक है, लेकिन अगर आप सचिन से उम्मीद करते हैं कि वह सक्रिय सांसद की भूमिका निभाएंगे, सामाजिक सरोकारों पर ध्यान देंगे और देश के भविष्य को तय करने में अपनी मजबूत राय रखेंगे तो उन्हें इस तरह का अनुभव नहीं है.”

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