नए टर्फ़ पर जूझती ओलंपिक हॉकी टीम

भारत-ऑस्ट्रेलिया मैच इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption चार देशों के पहले टेस्ट मैच में विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 3-0 से हराया

ओलंपिक अभ्यास प्रतियोगिता खेलने लंदन पहुँची भारतीय हॉकी टीम को नए तरह के नीले टर्फ और पीली गेंद से खेलने में कठिनाई आ रही है.

भारत अपने पहले टेस्ट मैच में बुधवार को ऑस्ट्रेलिया से 3-0 से हार गया जबकि उससे एक दिन पहले एक अभ्यास मैच में ऑस्ट्रेलिया ने उसे 12-1 से हराया.

लंदन में हो रही चार देशों की ओलंपिक टेस्ट प्रतियोगिता में भारत का अगला मैच ग्रेट ब्रिटेन के साथ है जबकि इसके बाद उसका मुकाबला पिछले ओलंपिक विजेता जर्मनी से होगा.

मगर भारतीय टीम का कहना है कि चार देशों की इस टेस्ट प्रतियोगिता में वे हार-जीत से अधिक मैदान और माहौल का अनुभव लेने के लिए उतरे हैं इसलिए अभी उसके प्रदर्शन के बारे में कोई राय बनाना ठीक नहीं.

भारतीय टीम के ऑस्ट्रेलियाई कोच माइकल नॉब्स कहते हैं,”जब आप दुनिया की पहले नंबर की टीम के सामने हों और एक नए तरह के मैदान पर, तो हार होती है, मगर दूसरे मैच में हमारा प्रदर्शन बेहतर हुआ“.

लंदन ओलंपिक में पहली बार हॉकी के मैच नीले रंग के कृत्रिम मैदान पर खेले जाएँगे. गेंद का रंग पीला होगा और मैदान के चारों ओर गुलाबी रंग की पट्टी लगी होगी ताकि बॉल दिखाई देती रहे.

नया टर्फ़

कोच माइकल नॉब्स कहते हैं कि अपने पहले मैचों में भारतीय खिलाड़ियों के सामने नए मैदान को लेकर मुश्किलें आ रही हैं.

उन्होंने बताया,”इसपर फिसलन है, ये धीमी है, इसपर गेंद उछलती है, इसपर अभी काफी खिलाड़ी फिसलकर गिर रहे हैं, उनसे अजीब-अजीब गलतियाँ हो रही हैं.

"कल ग्रेट ब्रिटेन और जर्मनी के मैच में पहले हाफ़ में आठ खिलाड़ी गिरे. तो इसपर अभ्यस्त होना आसान नहीं. हमने तो इससे पहले ऐसा टर्फ़ देखा भी नहीं था."

मगर उन्होंने कहा कि ओलंपिक से पहले भारत को ऐसे मैदानों पर कई और मैच खेलने के मौके मिलेंगे जिनसे भारतीय टीम को फायदा हो सकेगा.

नॉब्स ने कहा,”हम ओलंपिक से पहले मलेशिया, स्पेन, फ्रांस और भारत में ऐसे ही मैदानों पर कोई 14 मैच खेलने जा रहे हैं और इनमें से कई मैच ऐसी टीमों के विरूद्ध होंगे जिनकी रैंकिंग हमसे ऊपर है“.

भारतीय कोच का कहना है कि अच्छी तैयारी के लिए ये बहुत ज़रूरी है कि मैच दुनिया की सबसे अच्छी टीमों के विरूद्ध हों.

नॉब्स कहते हैं,"डच टीम ने नीले टर्फ़ वाला एक इनडोर स्टेडियम बनाया हुआ है जिसमें हर खिलाड़ी की पोज़ीशन देखने के लिए हेलिकॉप्टर की तरह के वीडियो लगे हुए हैं. वे पिछले छह से नौ महीने से वहाँ अभ्यास कर रहे हैं.

"आपको समझना होगा कि दुनिया की सबसे बेहतरीन टीमें पिछले छह साल से तैयारी कर रही हैं जबकि भारत ने केवल सात महीने पहले अपनी तैयारी शुरू की."

लक्ष्य

भारतीय हॉकी पिछले कई सालों से उथल-पुथल के दौर में रही जब उसे आंतरिक समस्याओं से भी उलझना पड़ा.

बीजिंग ओलंपिक भारतीय हॉकी के इतिहास में एक दुखद अध्याय था जब 1928 के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब भारत खेलों के लिए क्वालिफ़ाई नहीं कर सका.

पर इस साल फरवरी में भारत ने दिल्ली में हुए क्वालिफ़ाइंग मुक़ाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए लंदन ओलंपिक के लिए क्वालिफ़ाई किया.

नॉब्स कहते हैं,"हमने क्वालिफ़ाई कर अपना पहला लक्ष्य पूरा किया, अब अगले कदम के रूप में हम पहली बार बड़ी टीमों के विरूद्ध खेल रहे हैं और नए टर्फ़ पर खेल रहे हैं.

"हमारा लक्ष्य भारतीय हॉकी को फिर से तैयार करना है, हम चाहते हैं कि भारत लंदन ओलंपिक के बाद दुनिया की छह बड़ी टीमों में गिना जाए. वो अभी दसवें नंबर पर है, तो उसका एक कारण है."

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