आनंद सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी नहीं

  • 31 मई 2012
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Image caption मैच के दौरान कास्परोव ने कहा कि यह पहला चैंपियनशिप है जिसमें दोनों ही खिलाड़ी सर्वश्रेष्ठ नहीं हैं

यह काफी दिलचस्प था कि मास्को के ट्रेटीकोव गैलरी में 20 साल से 30 साल के बीच के अति प्रतिभाशाली शतरंज के खिलाड़ी वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप को देखने के लिए जमा हो रहे थे.

वे चालीस वसंत देख चुके दो खिलाड़ियों के खेल को देखने के अलावा खेल पर प्रतिक्रिया भी देने आए थे. उन लोगों में लेव अरोनियन, व्लादिमीर क्रमनिक और एंटनी कारपोव, जैसे खिलाड़ी शामिल थे.

खेल के बीच में ही शतरंज के महानतम खिलाड़ी गैरी कास्परोव भी आए. उन्होंने बताया कि शतरंज के खेल में यह पहली बार हो रहा है कि विश्व चैंपियनशिप के लिए मैच हो रहा है, लेकिन इसमें खेलने वाले दोनों खिलाड़ी सर्वश्रेष्ठ नहीं हैं.

लेकिन ऐसा क्यों? आनंद वर्ष 2007 से विश्व चैम्पियन है और बोरिस गेलफैंड ने भी कई वरीयता प्राप्त बड़े खिलाड़ियों को पहले हराया है.

किसी का दोष नहीं

अब इसमें किसे दोषी ठहराया जा सकता है अगर विंबलडन के पहले दौर में ही किसी अनजान खिलाड़ी ने पहली वरीयता प्राप्त खिलाड़ी को हरा दिया हो.

बोरिस गेलफैंड के बारे में कहा जाता है कि उनकी जीत में तकदीर ने उनकी हमेशा मदद की थी. गेलफैंड सोवियत संघ में उस समय पले-बढ़े, जब कास्पारोव, एंटनी कारपोव और बाद में व्लादिमिर कार्मनिक जैसे शतरंज के खिलाड़ी थे.

वो ऐसे खिलाड़ी नहीं थे जिनके पीछे लोग दीवाने थे. लेकिन आप किसी भी खिलाड़ी से पूछिए वो आपको बताएगा कि बोरिस कितना अच्छा खिलाड़ी था.

आनंद का कहना है, “बोरिस ऐसा खिलाड़ी है जो गलतियां नहीं के बराबर करता है. वह जोरदार है.”

आनंद ने उस समय शतरंज खेलना शुरु किया जब गैर सोवियत भूभाग से बहुत कम लोग शतरंज खेलने आते थे. आनन्द को जब 1992 में पहली बड़ी सफलता मिली थी तब वह 11 खिलाड़ियों में इकलौते खिलाड़ी थे जिनका सोवियत संघ या फिर उनके खिलाड़ियों से कोई वास्ता नहीं था.

शांत खिलाड़ी

भारतीय खेल फेडरेशन अपने खिलाड़ियों के साथ भेदभाव बरतने में बेजोड़ है.

इसलिए आनंद शतरंज खेलने के लिए देश छोड़कर स्पेन और यूरोप चले गए और वहीं से वह विश्व चैंपियन बने.

वह चुप्पी साधकर खेल खेलते रहे और अपनी बारी का इंतजार करते रहे.

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Image caption मुकाबला काफी मुश्किल था, जो काफी लंबा चला

लेकिन वर्ष 2007 से वह बिना किसी शक के विश्व विजेता हैं. इससे क्या फर्क पड़ता है कि उन्होंने पिछले दो वर्षों में कोई बड़ा खिताब नहीं जीता है.

अगर उनका नाम चौथे नंबर पर है तो उससे भी क्या फर्क पड़ता है. महत्वपूर्ण बात यह है कि वह खेल खेलने के लिए तैयार हैं और वह अभी भी विश्व चैंपियनशिप जीत सकते हैं.

मुश्किल जीत

हो सकता है कि आनंद और गेलफैंड बहुत बेहतर खेल न खेले हों और यह भी हो सकता है कि यह बेहतर जीत न हो, लेकिन वह मैच बहुत ही मुश्किल था.

उनके मैच को कोई उबाऊ कह सकता है, लेकिन इस मैच से वे एक-दूसरे का दिमाग पढ़ रहे थे.

शुरु में गेलफैंड ने आंनंद को छकाया लेकिन आनन्द ने इसे बहुत ही समझदारी से खेला.

यह कुछ वैसा ही था कि दो आदमी एक दूसरे के दिमाग को पढ़ने की कोशिश कर रहे हैं और लोग अनुमान लगा रहे हैं कि वे खिलाड़ी क्या सोच रहे हैं.

उसके बाद सांतवे गेम में गेलफैंड ने अपने को असहाय महसूस किया क्योंकि गेलफैंड की चाल का आनंद के पास कोई काट नहीं था. आनंद ने अपने आपको फिर से सहेजा और अगले दिन उन्हें विजय मिल गई.

लय में लौटा

विजय के बाद आनंद ने कहा, “अगर मुझे कहना पड़े तो मैं कह सकता हूं कि आठवें गेम में मैं अपनी लय में लौट पाया. मैं मानता हूं कि यह बोरिस का श्रेष्ठ गेम नहीं था, लेकिन मैं सांतवें गेम को अपना सबसे खराब खेल मानता हूं. उस रात मैं ठीक से सो नहीं पाया. उस दिन मुझे लगा कि मैंने मैच गंवा दिया है, हालांकि यह धीरे धीरे मुश्किल खेल होता जा रहा था. इसलिए आठवां गेम मेरे मनोबल के लिए काफी अच्छा रहा.”

वर्ष 1995 में आनंद ने कास्पारोव के खिलाफ नौंवी गेम में जीत हासिल की थी, लेकिन कास्पारोव ने बाद में उसे बुरी तरह हराया और उसे काफी पीछे छोड़ दिया.

इस हार से चैंपियन आनन्द ने काफी कुछ सीखा. कास्पारोव ने उस समय सीखा और आनंद ने पिछले हफ्ते सीखा.

टाई ब्रेकर मुश्किल

ट्राई ब्रेकर के बाद आनन्द ने कहा, “ठीक है कि आज का टाई ब्रेकर काफी मुश्किल था जिसपर कुछ भी दावा करना ठीक नहीं है. मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि मैं बेहतर खेल रहा था. इन चार गेमों में भी इतना उतार-चढ़ाव हो रहा था कि मैं त्रिशंकु की तरह झूल रहा था, इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कह सकता हूं.”

टाइब्रेकर का पहला मैच 33 चालों के बाद ड्रा पर छूटा जबकि दूसरे मैच में आनंद ने गेलफैंड को 77 चालों के बाद मात दे दी.

टाइब्रेकर के चार में से शेष दो गेम भी ड्रा पर छूटे और इसके साथ ही आनंद ने ये खिताब जीत लिया.

अब विश्वविजेता का खिताब आनन्द के पास फिर से दो साल के लिए आ गया है.

(वी कृष्णास्वामी ने 1995 में मास्को में गैरी कास्परोव के साथ हुए आनन्द के पहले मैच को कवर किया था. इस बार भी वह आनन्द और गेलफ्रैंड के बीच इस महत्वपूर्ण मैच को कवर करने के लिए वो मास्को में थे.)

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