विंबलडन में नवरातिलोवा और इवान लैंडल

  • 8 जुलाई 2012
मार्टिना नवरातिलोवा (फाइल फोटो)
Image caption मार्टिना नवरातिलोवा कई बार विंबलडन ख़िताब जीत चुकी हैं.

मार्टिना नवरातिलोवा ने जब अपना पहला विंबलडन ख़िताब जीता था तो उसे देखने के लिए उनके माता पिता मौजूद नहीं थे क्योंकि कम्युनिस्ट चेकोस्लवाकिया के शासकों नें उन्हें देश छोड़ने की अनुमति नहीं दी थी.

मार्टिना 1975 में चेकोस्लवाकिया छोड़ कर अमरीका चली गई थीं. इसका बदला वहाँ के शासकों ने मार्टिना के माता पिता से लिया.

यहाँ तक कि मार्टिना के मैच चेक टीवी पर भी नहीं दिखाए गए. जब मार्टिना अपना पहला विंबलडन टूर्नामेंट जीतने वाली थीं तो उनके माता पिता जर्मन सीमा से लगे चेक इलाके पिलसेन चले गए जहाँ जर्मन टीवी के सिग्नल दिखाई देते थे.

अगले साल 1979 में डचेज़ ऑफ़ केंट ने चेक सरकार से अनुरोध किया कि मार्टिना के माता पिता को बेटी का मैच देखने के लिए विंबलडन आने की अनुमति दी जाए.

लेकिन इसके बावजूद सिर्फ़ उनकी माता ही उनका खेल देखने विंबलडन आ पाई थी.

उनके पिता को तब भी देश से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई थी.

विंबलडन आई नवरातिलोवा ने याद किया कि वक़्त कितना बदल गया है.

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Image caption एंडी मर्रे की जीत ने कई लोगों के तयशुदा कार्यक्रम को प्रभावित किया

पिछले दिनों जब उन्हीं के देश की पेट्रा क्वीतोवा विंबलडन में खेल रही थीं तो उनके माता पिता रॉयल बॉक्स में बैठ कर उनका मैच देख रहे थे.

जीत से कार्यक्रम तहस नहस

विंबलडन में एंडी मर्रे की जीत ने कई ब्रितानी राजनीतिज्ञों के सप्ताहांत के प्लान तहस नहस कर दिए हैं.

प्रधानमंत्री कैमरन ने ऐलान किया है कि वह यह मैच देखने के लिए सेंटर कोर्ट में मौजूद रहेंगे.

साथ ही रविवार को उनके निवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट पर यूनियन जैक के साथ साथ स्कॉटिश सल्टायर का झंडा भी लहराएगा.

एंडी मर्रे स्कॉटलैंड के रहने वाले हैं. सकॉटिश फ़र्स्ट मिनिस्टर एलेक्स सालमंड ने भी मर्रे को अपनी शुभकामनाएं भेजी हैं.

वैसे वह चाहते हैं कि स्कॉटलैंड ब्रिटेन से अलग हो जाए.

उनका कहना है कि पूरा स्कॉटलैंड एंडी मर्रे के पीछे खड़ा है और वह खुद उनका मनोबल बढ़ाने विंबलडन में मौजूद रहेंगे.

राज कुमार विलियम्स की पत्नी भी मर्रे का जोश बढ़ाने के लिए रॉयल बॉक्स में बैठीं होंगी.

हांलाकि महारानी एलिज़बेथ और राजकुमार विलियम्स पहले से व्यस्त कार्यक्रम के कारण यह मैच नहीं देख पाएंगे.

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Image caption विंबलडन की घांस

अब तक मर्रे और फ़ेडेरर के बीच 15 मैच हुए हैं जिसमें 8 में मर्रे की जीत हुई है लेकिन ग्रैड स्लैम फ़ाइनल में मर्रे एक बार भी नहीं जीत पाए हैं.

विंबलडन की घांस

सालों तक प्रयास करने के बाद जब इवान लैंडल विंबलडन नहीं जीत पाए तो एक पत्रकार ने उनसे पूछ ही लिया कि इसके पीछे कारण क्या है.

लैंडल ने खीज कर इसका जो जवाब दिया उसकी पूरी दुनिया में बहुत चर्चा हुई.

लैंडल ने कहा कि 'ग्रास इज़ फ़ॉर काउज़' यानि घांस तो गायों के लिए है.

लेकिन पिछले साल जब जोकोविच ने विंबलडन जीता तो उन्होंने सेंटर कोर्ट की घांस खा कर इसका जश्न मनाया.

जोकोविच के कोच मरियन वाजदा ने एक और राज़ बताया कि इस बार भी जब जोकोविच औरंगी पार्क में अभ्यास करने आए तो उन्होंने वहाँ की घांस भी खाई.

उन्होंने ही नहीं उनकी टीम के सभी लोगों ने वहीँ की घांस चखी और सब ने एक सुर में कहा कि यह अच्छी घांस है. इसका स्वाद अच्छा है और इसमें काफ़ी रस भी है.

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