ज्वाला के लिए पार्टी है ओलंपिक

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Image caption बैडमिंटन स्टार ज्वाला गुट्टा को लगता है कि ओलंपिक में सिर्फ चीनियों से ही नहीं कोरियन. इंडोनेशियन. मलयेशियन, सिंगापुर के खिलाड़ी से भी मिलेगी टक्कर

ओलंपिक ज्यादा दिन दूर नहीं है. हर दिन कम होने के साथ अधिकतर खिलाड़ियों, कोचों और टीमों पर दबाव महसूस किया जा सकता है.

लेकिन भारतीय बैडमिंटन स्टार ज्वाला गुट्टा ओलंपिक के दबाव से मीलों दूर हैं. ज्वाला का मानना है कि ओलंपिक उनके लिए पार्टी की तरह रहेगा.

बीबीसी के साथ बातचीत में ज्वाला ने कहा, “मेरा परिवार और दोस्त भी लंदन जा रहे हैं. हमारे लिए ओलंपिक पार्टी जैसी होगी. हम जबरदस्त खेलेंगे और पार्टी भी करेंगे. मेरा यही मानना है कि अच्छा खेलों और इन्जॉय करो. ”

इतिहास

ज्वाला इतिहास बना कर लंदन ओलंपिक में जा रही हैं. मिक्स्ड डबल्स और वीमेंस डबल्स के लिए क्वालिफाई करने वाली वह पहली भारतीय खिलाड़ी हैं.

ज्वाला गुट्टा ने कहा, “डबल्स को भारत में ज्यादा तरजीह नहीं दी जाती. इसके बावजूद मैंने ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया है. मेरे लिए यह बहुत ही बड़ी उपलब्धि है. यहां तक पहुंचना आसान नहीं था. इसलिए मैं ज्यादा खुश हूं.”

ज्वाला ने इस साल कई मौकों पर काफी अच्छा खेला है. इसलिए वह ओलंपिक में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद कर रहीं हैं.

ज्वाला ने बताया, “पिछले साल मिक्स्ड डबल्स में हमने चीन की नबंर दो जोड़ी को हराया. ओलंपिक के बराबर कहा जाने वाले चायनीज ओपन में भी हम सेमीफाइनल तक पहुंचे. यकीनी तौर पर अगर हम बेहतर न करते तो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करना आसान नहीं था. दोनों इवेंट में हमारा काफी अच्छा चांस है. ”

अच्छा तालमेल

अपनी जोड़ीदार अश्विनी पोनप्पा के साथ तालमेल के बारे में ज्वाला ने बताया, “ मैं और अश्विनी पिछले तीन साल से साथ खेल रहे हैं. पहले एक दो टूर्नामेंटों में तालमेल बिठाने में थोड़ी दिक्कत हुई थी. लेकिन एक-दो महीने के बाद हमने पीछे मुड़ कर नहीं देखा. एक मजबूत साझेदार का होना अच्छा लगता है.”

बैडमिंटन में चीनी खिलाड़ी पूरी दुनिया के लिए चुनौती होंगे, लेकिन ज्वाला को लगता है कि सिर्फ चीनियों से ही टक्कर नहीं मिलेगी..

ज्वाला ने कहा, “हम विश्व की 16 शीर्ष जोड़ियां हैं. किसी खास के खतरा नहीं कहा जा सकता इनमें सभी जोड़िया काफी मजबूत हैं. लेकिन हमने सभी को हराया हुआ है. हालांकि हम किसी को भी कमजोर नहीं आंक रहे हैं. हम काफी रिलेक्स होकर ओलंपिक में जा रहे हैं. चीनी, कोरियन. इंडोनेशियन. मलेशियन, सिंगापुर और हांगकांग के खिलाड़ी, सभी काफी तगड़ी चुनौती हैं.”

किसी की क्यों सुनूं

ज्वाला कोर्ट पर अपने खेल से ज्यादा कोर्ट के बाहर विवादों के कारण खबरों में रही हैं. उन्हें एक बागी के रूप में भी देखा जाता है. लेकिन इस तरह की संज्ञाओं का जवाब ज्वाला अपने ढंग से देती हैं.

ज्वाला ने कहा, “ मैं किसी पक्षपात की बदौलत नहीं बल्कि अपने प्रदर्शन के कारण चुनी जाती रही हूं. मैं पिछले दस सालों से नेशनल चैंपियन हूं. ऐसे में किसी की बात क्यों सुनूं. कोई अनजान सी शख्सियत आ कर मुझ से यह नहीं कह सकती कि अब मैं तुम्हारे खेल को चलाउंगा. ”

ज्वाला ने कहा कि उन्होंने कभी कुछ गलत नहीं किया है. इसलिए उनके पास डरने या झुकने का कोई कारण नहीं है.

पिछले कुछ सालों में सरकार ने खिलाड़ियों पर काफी पैसा खर्चा किया है. इसके बावजूद शिकायतें कभी कम नहीं हुई हैं. लेकिन ज्वाला ने सरकार की कोशिशों को काफी सराहा है. हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार अभी और कर सकती है.

उन्होंने कहा, “प्राइवेट अकादमी में सुविधाए काफी अच्छी हैं. सरकार को भी प्राइवेट साझेदारों की मदद लेनी चाहिए. क्योंकि जो मदद सरकार कर सकती है, वह कोई दूसरा नहीं कर सकता. वैसे सरकार की बदौलत ही खिलाड़ियों को मौके मिले हैं. इसके लिए सभी को सरकार का शुक्रिया अदा करना चाहिए.

ज्वाला बैडमिंटन के अलावा टेनिस, वॉलीबाल, जिम्नास्टिक और क्रिकेट भी खेल चुकी हैं. उनकी मां चीनी मूल की हैं. छोटी थी तो टेनिस खेलने जाती थी. गर्मी के कारण ज्वाला की त्वचा न खराब हो जाए, मां ने टेनिस से हटा कर बैडमिंटन में डाल दिया.

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