मिल्खा, गोपीचंद और हरबिंदर

मिल्खा सिंह
Image caption मिल्खा सिंह कहते हैं कि ओलंपिक में पदक के लिए उन्हें कृष्णा पूनिया से बड़ी उम्मीदें हैं

लंदन ओलंपिक में पदक जीतने के इरादे से जा रहे भारतीय खिलाड़ियों की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर पूर्व ओलंपिक खिलाड़ी मिल्खा सिंह कहते हैं कि ये सिर्फ खिलाड़ी भर नहीं है, बल्कि भारतीय दूत हैं जिन पर पूरी देश की निगाहें लगी होंगी कि ये ओलंपिक में क्या करते हैं.

मिल्खा सिंह कहते हैं कि वे ओलंपिक में 400 मीटर दौड़ में पदक से चूके थे जिसकी टीस आज भी उन्हें महसूस होती है. इसलिए वे चाहते हैं कि भारत की ओर से कोई पुरुष या महिला धावक 400 मीटर में पदक जरूर जीते.

वे कहते हैं, ''दुनिया उसे मानती है जो एथलेटिक्स स्पर्धाओं में पदक जीतते हैं.''

वे कहते हैं, ''आजकल के बच्चे ड्रग्स के पीछे भाग रहे हैं, उनमें लगन और कठिन परिश्रम की कमी है. उनमें इच्छा-शक्ति का अभाव है, यही वजह है कि पहले से कहीं बेहतर सुविधाओं के बावजूद भारतीय एथलीटों को ओलंपिक में आज तक एक भी पदक नहीं मिला है.''

वे कहते हैं कि भारतीय एथलीटों में उन्हें कृष्णा पूनिया से बड़ी उम्मीदें हैं.

पुलेला गोपीचंद (बैडमिंटन)

Image caption पुलेला गोपीचंद को भारतीय बैडमिंटन टीम के सभी सदस्यों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है

खिलाड़ी और कोच की हैसियत से दो ओलंपिक खेलों में भाग ले चुके भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद कहते हैं कि ओलंपिक में खेलना एक अलग ही अनुभूति होती है.

सिडनी ओलंपिक को याद करते हुए पुलेला बताते हैं कि जब वो खेलने पहुंचे तो उन पर उम्मीदों का बड़ा दबाव था और हर खिलाड़ी के साथ यही होता है.

ओलंपिक में जा रही भारत की मौजूदा बैडमिंटन टीम के बारे में पूछे जाने पर वे कहते हैं, ''साइना, ज्वाला, अश्विनी, पी कश्यप ये सभी अच्छा खेल रहे हैं. लंदन ओलंपिक में पदक मिलने की आशा है.''

वे कहते हैं, ''पूर्ववर्ती ओलंपिक खेलों के मुकाबले लंदन ओलंपिक में तमाम स्पर्धाओं में ज्यादा पदक मिलने की उम्मीद है. शूटिंग, बॉक्सिंग, तीरंदाजी और कुश्ती के खिलाड़ी पदक के लिए आश्वस्थ नजर आ रहे हैं.''

हरबिंदर सिंह (हॉकी)

Image caption हरबिंदर सिंह कहते हैं कि भारतीय हॉकी टीम का आक्रामक अंदाज ओलंपिक में पदक की आस जगाता है

पूर्व ओलंपिक हॉकी खिलाड़ी हरबिंदर सिंह कहते हैं कि मौजूदा भारतीय टीम में एक अच्छी बात ये है कि ये अब आगे बढ़कर हमला करने के अंदाज में खेल रही है जिसकी वजह ऑस्ट्रेलियाई कोच हैं जो हमारी टीम को वहां के तरीके से खेलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

वे कहते हैं, ''क्वालीफाईंग मैचों में भारतीय टीम के जीतने की यही वजह रही है. इससे विरोधी टीम पर दबाव पड़ता है जिससे वो गलती करते हैं और इसका फायदा उठाकर हम गोल दाग देते हैं. ओलंपिक में भी इसी का फायदा मिलने की उम्मीद है.''

वे कहतें हैं, ''इसका दूसरा फायदा ये है कि इससे हमारी रक्षा-पंक्ति पर दबाव कम पड़ता है और विरोधी टीम को गोल करने के मौके कम मिलते हैं.''

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