स्पेन को रोकने को तैयार दक्षिण अमरीकी टीमें

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Image caption स्पेन की टीम अगर लगातार चौथा बड़ा टूर्नामेंट जीत ले तो उसके सबसे बेहतरीन टीम होने के दावे को और बल मिलेगा

स्पेन ने जैसे ही यूरो 2012 का ख़िताब जीता दुनिया भर के खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों के बीच एक नई चर्चा शुरू हो गई. स्पेन की ये तीसरे बड़े टूर्नामेंट में जीत थी और अब चर्चा ये हो रही है कि क्या ये टीम अब तक की सबसे बेहतरीन अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल टीम है.

वैसे तो आप ये कह सकते हैं कि ऐसा मानने वालों की ये निजी राय है मगर तथ्यों के ख़िलाफ़ तर्क करना मुश्किल होता है. ऐसे में अगर स्पेन ने लगातार चौथा ख़िताब अगले विश्व कप के रूप में जीत लिया तो निश्चित ही इस बहस का पलड़ा स्पेन के पक्ष में झुक जाएगा.

मगर चौथा ख़िताब ही सबसे मुश्किल होने वाला है. इसके लिए स्पेन को कुछ ऐसा करना होगा जो कोई भी यूरोपीय टीम आज तक नहीं कर सकी- दक्षिण अमरीकी ज़मीन पर आकर विश्व कप जीतना.

इतना ही नहीं, ये विश्व कप ब्राज़ील में 2014 में ऐसे समय में आयोजित होगा जबकि दक्षिण अमरीकी टीमों की चुनौती लगातार मुश्किल होती जा रही है. वैसे यूरोपीय चैंपियन टीम को अनुभव से भी इस बात का अंदाज़ा होगा.

स्पेन ने पिछले तीनों बड़े टूर्नामेंट के नॉक आउट दौर में एक भी गोल नहीं खाया है. मगर इस दौरान ये भी याद रखना होगा कि इस पूरे दौर में स्पेन का सबसे मुश्किल और सबसे बराबरी का मुक़ाबला 2010 में विश्व कप के क्वॉर्टर फ़ाइनल में पैराग्वे के विरुद्ध रहा था. उस मैच में तो पैराग्वे एक पेनल्टी भी चूक गया था.

चिली आगे

पैराग्वे वैसे दो साल में ब्राज़ील तो नहीं बन जाएगा मगर वो पिछले साल कोपा अमेरिका टूर्नामेंट के फ़ाइनल तक पहुँच चुके हैं. कोच गेरार्डो मार्टिनो ने इस्तीफ़ा दिया, उसके बाद फ़्रांसिस्को आर्चे ने बहुत जल्दी बहुत कुछ बदलने की कोशिश की और ख़ुद बदल दिए गए. अब जो भी कमान सँभालेगा उसके लिए राह मुश्किल होने वाली है.

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Image caption लियोनेल मेसी को अच्छा साथ मिले तो अर्जेंटीना बेहतरीन टीम हो सकती है

नए बोलीवियाई कोच की भी नियुक्ति के बाद वही चुनौती होगी. पेरू की तो शुरुआत और भी बुरी रही है और उनकी टीम में खिलाड़ियों के घायल होने की रफ़्तार काफ़ी तेज़ है. अब अगर वे अपने ख़तरनाक स्ट्राइकर्स को फ़िट रख सकें तो अब भी बात बन सकती है.

मगर चिली की तरह उनके पास ग़लतियाँ करने की गुंजाइश बहुत कम है. चिली ने अभी एक तिहाई क्वॉलिफ़िकेशन मुक़ाबले ही खेले हैं मगर उनके पास जगह पक्की करने के लिए ज़रूरी अंकों में से आधे आ चुके हैं. स्पेन के विरुद्ध विश्व कप में उनका मुक़ाबला काफ़ी रोचक रहा था और उसके बाद पिछले साल जब स्विटज़रलैंड में स्पेन के विरुद्ध उनका दोस्ताना मैच हुआ तो वहाँ भी स्पेन को किसी तरह अंतिम क्षणों में एक विवादास्पद पेनल्टी के ज़रिए 3-2 से जीत मिली. हालाँकि ख़तरनाक हमले के बावजूद ये सोचना मुश्किल है कि उनकी रक्षा पंक्ति स्पेन को चैंपियन की गद्दी से उतार सकेगी.

वेनेज़ुएला पहली बार

वैसे उरुग्वे का मामला बिल्कुल अलग है जहाँ बेहद प्रतिभाशाली स्ट्राइकर्स एक मज़बूत रक्षा पंक्ति के साथ मिलकर खेलते हैं, विपक्षी टीम को चोट पहुँचा सकने लायक मिडफ़ील्ड है और कुल मिलाकर ये टीम ऐसी है जो विपक्षी टीम की मज़बूतियों या कमज़ोरियों को ध्यान में रखकर मैदान में उतरती है.

क्वॉलिफ़िकेशन दौर की ताज़ा स्थिति
टीम कुल मैच अंक
चिली 6 12
उरुग्वे 5 11
अर्जेंटीना 5 10
इक्वेडोर 5 9
वेनेज़ुएला 6 8
कोलंबिया 5 7
बोलीविया 6 4
पैराग्वे 5 4
पेरू 5 3

इतना ही नहीं उन्होंने क्वॉलिफ़िकेशन दौर की अच्छी शुरुआत भी की है मगर ये देखना होगा कि टीम के कुछ अहम सदस्य 2014 तक उम्रदराज़ हो चुके होंगे और उन्हें बदलने की ज़रूरत होगी.

वैसे महाद्वीप के दूसरे छोर पर वेनेज़ुएला पहली बार विश्व कप में जगह बनाने की होड़ में है. उनकी अब तक की प्रगति काफ़ी ज़बरदस्त रही है. पर अगर वे विश्व कप में पहुँच भी जाते हैं तो वे स्पेन को कोई चुनौती दे पाएँगे ये कुछ मुश्किल लगता है. ऐसा ही इक्वेडोर के लिए भी कहा जा सकता है.

अर्जेंटीना और ब्राज़ील

पर मगर कोलंबिया 1998 के बाद से पहली बार क्वॉलिफ़ाई कर लेता है तो स्पेन को कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. वैसे तो टीम में अभी कुछ मुश्किलें हैं और खिलाड़ी उम्र की ढलान पर हैं मगर राडामेल फ़ाल्काओ जैसे कुछ काफ़ी ख़तरनाक सेंटर फ़ॉरवर्ड भी उनकी टीम में हैं.

इधर अर्जेंटीना के मौजूदा कोच अलेजांद्रो सबेला के सामने कुछ अलग चुनौतियाँ हैं. ये टीम अभी गठन के दौर में है और अंतिम रूप लेने की ओर बढ़ रही है. सबेला ने ख़ुद माना है कि उनकी टीम के फ़ुल बैक और सेंटर बैक में अभी मुश्किलें हैं. वैसे वो इसमें गोलकीपर का नाम भी शामिल कर सकते थे क्योंकि सर्गियो रोमेरो कई बार उतने प्रभावशाली नहीं रह जाते.

फ़्रेडरीको फ़र्नांडेज़ और इज़ेकिएल गैरे अभी सेंटर बैक में सहज होने की कोशिश कर रहे हैं. मगर कई अच्छे संकेत भी हैं. लियोनेल मेसी और सर्गियो अगुएरो का साथ करिश्माई हो सकता है. इतना ही नहीं उनका क्वॉलिफ़िकेशन का दौर चुनौती भरा भी है जिससे उन्हें विश्व कप तक एक सही संतुलन वाली टीम बनाने में मदद मिलेगी.

इधर ब्राज़ील चूँकि मेज़बान होने के नाते अपने आप ही क्वॉलिफ़ाई कर चुका है इसलिए उसे इसका फ़ायदा नहीं मिल पाएगा. कोच मैनो मेनेज़ेस 2014 की टीम बनाने की प्रक्रिया में प्रतियोगी मुक़ाबले नहीं होने पर नाराज़गी भी जता चुके हैं. ऐसे में उनके लिए लंदन ओलंपिक काफ़ी अहम साबित होगा.

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