बॉक्सिंग: महिला बॉक्सर भी उतरेंगी रिंग में

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Image caption लंदन ओलंपिक में महिलाएं भी रिंग में उतरेंगी

ओलंपिक में पुरुषों के बीच बॉक्सिंग मुकाबले वर्ष 1912 से हो रहे हैं जबकि महिलाओं के बॉक्सिंग मुकाबले पहली बार लंदन ओलंपिक में ही होंगे.

इसमें पुरूष 10 भार-वर्ग और महिलाएं 10 भार-वर्ग में रिंग में उतरेंगी.

बॉक्सिंग के चैम्पियन आम तौर पर क्यूबा और अमरीका से आते रहे हैं, हालांकि बीजिंग ओलंपिक में दोनों देश कोई भी स्वर्ण पदक नहीं जीत पाए थे.

ओलंपिक में होने वाले मुकाबलों और पेशेवर बॉक्सिंग में एक बड़ा फर्क ये होता है कि ओलंपिक में प्रतिस्पर्धी हेड-गार्ड्स पहनते हैं. महिला बॉक्सर भी चेस्ट-गार्ड लगाती हैं. पुरुषों के तीन मिनट के तीन राउंड और महिलाओं के दो-दो मिनट के चार राउंड होते हैं.

इसमें भी कुशलता और तकनीक के आधार पर ही प्रतियोगियों को अंक मिलते हैं.

ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले महान बॉक्सरों में मोहम्मद अली (कैसियस क्ले), जो फ्रेजियर, जॉर्ज फोरमेन, माइकल स्पिंक्स, लेनॉक्स लुईस, व्लादीमिर क्लिश्चको और सुगर रे लियोनार्ड जैसे खिलाड़ियों को याद किया जाता है.

मुकाबले

इनमें कैसियस क्ले नामक एक ऐसे बॉक्सर भी हुए हैं जिन्होंने अमरीका में नस्ली भेदभाव के खिलाफ अपना विरोध जताने के लिए अपना पदक ओहायो नदी में फेंक दिया था.

क्यूबा के महान बॉक्सर टियोफिलो स्टीवेन्सन ने वर्ष 1972 से वर्ष 1980 के दौरान हेवीवैट मुकाबलों में तीन स्वर्ण पदक जीते थे.

उन्हें करोड़ों डॉलर की पेशकश की गई लेकिन उन्होंने पेशेवर बॉक्सर के तौर पर रिंग में उतरने से मना कर दिया था. उन्होंने क्यूबा का कोच बनना पसंद किया था.

वर्ष 1904 के ओलंपिक खेलों में महिलाओं की बॉक्सिंग एक प्रदर्शनकारी मुकाबले तक सीमित था.

हालांकि वर्ष 1722 से महिला मुक्केबाजी मुकाबले होते रहे हैं. इसे लंदन ओलंपिक में शामिल किया गया है जिसे लेकर अभी भी काफी विवाद जारी है.

लंदन ओलंपिक में महिलाएं तीन भार-वर्गों में पदक के लिए रिंग में उतरेंगी.

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