बैडमिंटन और इंडोनेशिया का पहला स्वर्ण पदक

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Image caption बैरी डेविस लंदन ओलंपिक खेलों की मशाल के साथ

बीबीसी के ब्रॉडकास्टर बैरी डेविस 44 साल से ओलंपिक खेलों को कवर कर रहे हैं. वे इन वर्षों के अपने अनुभवों के बारे में दस लेख लिख रहे हैं. प्रस्तुत है इसी श्रृंखला में बात 1992 के बार्सिलोना ओलंपिक खेलों की.

ये इस खेल का पहला स्वर्ण पदक था और एक बड़े देश इंडोनेशिया के लिए भी पहला ही सोने का तमगा.

बैडमिंटन को बार्सिलोना ओलंपिक खेलों में पहली बार शामिल किया गया था. मैं जिमनास्टिक के बाद बैंडमिंटन में महिलाओं के एकल फाइनल में पहुंचा था और मेरे पास तैयारी का खास वक्त भी नहीं था.

मेरे साथ मेरे सह-कमेंटेटर क्रेग रीडी बैठे थे. ये वही शख़्स थे जिन्होंने बैडमिंटन को ओलंपिक में शामिल करवाने में एक बड़ी भूमिका निभाई थी.

मुझे इस खेल के बारे में अधिक पता नहीं था. मैंने इसे अन्य लोगों की तरह थोड़ा-बहुत खेला था लेकिन इसकी किसी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया था.

साल 1978 में उस समय के विश्व के नंबर एक खिलाड़ी गिलियन गिल्क्स के साथ इंटरव्यू करने के बाद मुझे बैंडमिंटन कवर करने के लिए एजबेस्टन कॉमनवेल्थ खेलो में भेजा गया था और तब से मैं इस खेल के लिए कमेंटरी कर रहा हूं.

क्रेग रीडी का उत्साह

लेकिन क्रेग के रूप में मेरे साथ एक विशेषज्ञ मौजूद थे जो बैडमिंटन एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष थे और अब अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति में हमारा एक प्रतिनिधि था.

जब तक मैं कमेंटरी बॉक्स में बैठता क्रेग करीब 30 प्रतिशत ‘हाइपर’ हो चुके थे. वे चाहते थे कि ओलंपिक में बैडमिंटन की शुरुआत कामयाब रहे और हमारे सामने एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी.

पांच फुट तीन इंच लंबी इंडोनेशिया की स्टार सुसी सुसांती...वो जीतती नज़र आ रही थीं.

जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता गया क्रेग रीडी और उत्तेजित होते गए. मैं चाहता था कि वो इस उत्तेजना से बाहर निकलकर हमें ये बताएं की सुसांती अपनी इंडोनेशियाई प्रतिद्वंद्वी पर क्यों भारी पड़ रही हैं.

क्रेग ने मुझे बाद में बताया कि मैंने उन्हें एक पर्ची पर लिखकर ये संदेश दिया – तकनीक के बारे में बताएँ...

मुझे याद है कि मैंने बिना भावुक हुए कमेंटरी करने का आग्रह ज़रुर किया था.

और मैं भी खो गया...

लेकिन आख़िर में, मैं भी इस मैच में उतना ही खो गया था जितना क्रेग रीडी. सभी इस मैच में खो गए थे. सुसांती ने इंडोनेशिया के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता. इस लम्हे की प्रतिक्रिया स्टेडियम से लेकर इंडोनेशिया की गलियों तक हुई देखी गई.

अगले दिन सुसी सुसांती के ब्वॉय फ्रैंड एलन बुदीकुसुमा ने पुरुषों का एकल मुकाबला भी जीत लिया. इंडियोनेशिया के पहले दो ओलंपिक गोल्ड मेडल और वो भी उस देश के पसंदीदा खेल में. जकार्ता पहुंचने पर उनके स्वागत के लिए लाखों लोग उमड़े. इतना असर था इस जीत का.

बहरहाल मुझे स्टेडियम के भीतर के माहौल ने प्रभावित किया. मैच ख़त्म होने से पहले ही दर्शकों को अहसास हो गया था कि सुसी सुसांती जीतने वाली हैं. और प्रतिक्रिया....ब्रिटेन में ये खेल खेला जाता रहा है लेकिन आपको ऐसे उल्लास के दृश्य देखने को कभी नहीं मिलेंगे.

ओलंपिक के बारे में ये याद रखना बहुत ज़रुरी है...हर देश किसी न किसी खेल में माहिर होता है. और इंडोनेशिया के लिए ये खेल बैडमिंटन था.