ओलंपिक दिन 1- हिट और मिस

मिस

ओलंपिक की चमक-दमक में कई बार ऐसी घटनाएँ हो जाती हैं, जो आपको डरा सकती हैं, परेशान कर सकती हैं.

ऐसा ही कुछ हुआ ब्रिटेन के सांस्कृतिक मंत्री जेरेमी हंट के साथ.

बेलफास्ट में ओलंपिक शुरू होने के जश्न में घंटी बजा रहे हंट का हलक उस समय सूख गया, जब घंटी टूट कर पास खड़े लोगों के बीच जाकर गिर गई.

टेलीविजन कैमरों के सामने ओलंपिक की खुशी में घंटी बजा रहे जेरेमी हंट की तब जान में जान आई, जब उन्होंने पाया कि किसी को भी चोट नहीं लगी है.

बाद में उन्होंने हँस कर मामले को रफा दफा करने की कोशिश की, लेकिन तब तक ये घटना कैमरे में कैद हो चुकी थी.

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लंदन ओलंपिक के उद्घाटन समारोह से पहले शुक्रवार को तीरंदाजी के मुकाबले शुरू हुआ. मुकाबला रैंकिंग राउंड का था और तीरंदाजों में अपनी रैंकिंग बेहतर करने की होड़ थी.

अंदर पुरुष और महिला वर्ग के टीम और व्यक्तिगत मुकाबलों की रैंकिंग स्पर्धा चल रही थी. इस बीच बड़ी संख्या में लोग लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड के गेट पर जमा होने लगे.

आयोजक परेशान थे कि ऐसा क्या हो गया. पता चला कि एक गलतफहमी के कारण इतनी बड़ी संख्या में लोग तीरंदाजी देखने के लिए जमा हो गए.

ओलंपिक की वेबसाइट पर इस आयोजन को अन-टिकटिंग श्रेणी में रखा गया था. लोगों को लगा कि वे तीरंदाजी मुकाबला मुफ्त देख सकते हैं. लेकिन दरअसल रैंकिंग मुकाबले आम लोगों के लिए खुले ही नहीं थे.

मुफ्त ओलंपिक मुकाबला देखने की ख्वाहिश सैकड़ों लोगों को ऐतिहासिक लॉर्ड्स तक खींच तो लाई, लेकिन असलियत जानकर उनका मन खट्टा जरूर हो गया होगा.

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भारतीय पुरुष तीरंदाजों में गुवाहाटी के रहने वाले जयंत तालुकदार से काफी उम्मीदें थी.

लेकिन रैंकिंग मुकाबले में तालुकदार ने काफी निराश किया.

तीनों भारतीय पुरुष तीरंदाजों में जयंत सबसे पीछे छूट गए. उनकी रैंकिंग रही 53वीं.

उनके प्रदर्शन से भारतीय कैंप में काफी निराशा थी. वैसे तो वे व्यक्तिगत मुकाबले में क्वालिफाई कर गए हैं.

लेकिन अगर उनका यही हाल रहा, तो उनसे उम्मीद करना बेमानी ही होगा.

अन्य दो तीरंदाजों तरुणदीप रॉय और राहुल बनर्जी ने भी निराश किया. तरुण 31वें और राहुल 46वें स्थान पर रहे.

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भारतीय बॉक्सिंग फेडरेशन ने ओलंपिक पार्क के बाहर एक थाई रेस्तरां में भारतीय बॉक्सरों को मीडिया के सामने पेश किया.

बड़ी संख्या में जमा मीडियाकर्मियों के बीच जब किसी ने अखिल कुमार के बारे में सवाल किया, तो अधिकारियों को कोई खास जवाब देते नहीं बना.

हमेशा जोश में रहने वाले भारतीय कोच गुरबक्श सिंह संधू ने कहा कि किसी भी मुक्केबाज की तुलना पहले के मुक्केबाज से नहीं की जा सकती.

हर मुक्केबाज का अपना समय होता है. लेकिन इस सवाल के जवाब में संधू साब की खीझ कहीं कुछ और कहानी तो नहीं कह रही.

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ग्रेट ब्रिटेन और सेनेगल के बीच ओलंपिक फुटबॉल मैच 1-1 की बराबरी पर छूटा था.

ग्रेट ब्रिटेन के लिए ये अच्छी खबर नहीं, लेकिन अब कप्तान गिग्स ने सेनेगल के एक खिलाड़ी पर सवाल उठाए हैं.

उनका कहना है कि सेनेगल के खिलाड़ी साडियो मैनू ने कई बार फाउल किया और अगर ऐसा प्रीमियर लीग के मैच में हुआ होता, तो वे तीन बार मैदान से बाहर भेज दिए गए होते.

दूसरी ओर सेनेगल के कोच का कहना है कि उनके खिलाड़ियों के रुख में कोई गलत बात नहीं थी.

वैसे अब तो आने वाले ही समय बताएगा कि सेनेगल के साथ ग्रेट ब्रिटेन का ड्रॉ मैच किसपर भारी पड़ता है

हिट

चार साल पहले बीजिंग में हुए ओलंपिक के उदघाटन समारोह ने सबको चकाचौंध कर दिया था. लेकिन लंदन ओलंपिक में उद्घाटन समारोह ने एक अलग तान छेड़ी है.

स्लमडॉग मिलिनेयर के निर्देशक डैनी बॉयल ने लंदन ओलंपिक के लिए एक अलग ही थीम चुना.

ब्रितानी संस्कृति और बदलाव को दर्शाती छोटी-छोटी कहानियाँ.

कई मनमोहक दृश्य और साथ में नाच-गाना भी. अब अगले कुछ दिनों तक इस पर चर्चा चलती रहेगी कि लंदन बीजिंग से आगे रहा या पिछड़ गया.

जो भी हो डैनी बॉयल ने सादगी से भरी अपनी पेशकश से लोगों का दिल तो जरूर जीता.

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दुनिया की नंबर एक तीरंदाज और पदक की बड़ी दावेदार मानी जा रही दीपिका कुमारी से भारत को काफी उम्मीदें हैं.

लेकिन रैंकिंग राउंड में एक बार दीपिका पिछड़ती जा रही थी. लेकिन अनुभवी दीपिका ने समय रहते वापसी की और आखिरकार व्यक्तिगत रैंकिंग में आठवाँ स्थान हासिल किया.

नंबर एक खिलाड़ी के लिए आपको ये रैंकिंग अच्छी न लगे, लेकिन जिस तरह उन्होंने शुरुआत की थी, उसके बाद उनकी वापसी शानदार रही.

एक समय वे 14वें स्थान तक पहुँच गई थी. दीपिका से तीरंदाजी कोच लिम्बा राम और टीम मैनेजर परेश मुखर्जी ने काफी उम्मीदें बाँध रखी हैं.

उनका कहना है कि दीपिका के लिए आने वाला दिन बेहतर होगा, क्योंकि हर दिन नया होता है.

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इसी तीरंदाजी मुकाबले में लंदन ओलंपिक का पहला विश्व रिकॉर्ड बना.

दक्षिण कोरिया के तीरंदाजों ने एक नहीं बल्कि दो विश्व रिकॉर्ड्स पर निशाना साधा.

इम डोंग ह्यून की नजर कमजोर है, लेकिन उन्होंने इस कमजोरी को अपनी शक्ति बनाया और लक्ष्य पर अच्छा निशाना लगाया.

ह्यून को 699 अंक हासिल हुए. व्यक्तिगत मुकाबले में विश्व रिकॉर्ड के अलावा कोरियाई तीरंदाजों ने टीम मुकाबले में भी नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया.

ह्यून ने किम बुबमिन और ओह जिन हेक के साथ मिलकर कुल 2087 अंक हासिल किए.

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डेविड बेकम को जब ओलंपिक की फुटबॉल टीम में जगह नहीं मिली, तो वे निराश थे. उन्होंने अपनी निराशा छिपाई भी नहीं.

ओलंपिक में खेलने का सबका सपना होता है और बेकम भी इससे अछूते नहीं थे.

लेकिन इस निराशा के बीच बेकम ने ओलंपिक खेलों के प्रति समर्थन कभी कम नहीं किया.

लंदन को ओलंपिक दिलाने के लिए जो अभियान चलाया गया था, उसमें बेकम की अहम भूमिका थी.

बेकम का कहना है कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि उन्होंने लंदन को ओलंपिक की मेजबानी दिलाने में सहयोग किया. ये होती है असली खेल भावना.

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किसी भी बड़े आयोजन में स्वयंसेवकों की अहम भूमिका होती है. लंदन ओलंपिक में भी स्वयंसेवकों ने कई मोर्चा संभाल रखा है.

स्वयंसेवक न सिर्फ व्यवस्था में अपनी मदद दे रहे हैं, बल्कि उद्घाटन समारोह में भी उन्होंने जम कर हिस्सा लिया.

इन स्वयंसेवकों ने उदघाटन समारोह के कार्यक्रमों के लिए 150 घंटे का रिहर्सल किया.

आप अंदाजा लगा सकते हैं कि पेशेवर कलाकार न होने के बावजूद इन स्वयंसेवकों ने कितने जी-जान से सहयोग किया है.

इन स्वयंसेवकों में कोई डॉक्टर है तो कई सरकारी अधिकारी. सबकी एक ही भावना है लंदन ओलंपिक को सफल बनाना.

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