जब अभिनव बिंद्रा इधर-उधर चक्कर लगा रहे थे

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Image caption हार इंसान को अंदर तक हिला देती है.

वर्ष 2008 के बीजिंग ओलंपिक में अभिनव बिंद्रा की जय-जयकार हो रही थी, लेकिन लंदन ओलंपिक में हालात बिल्कुल उलट थे.

क्वालिफाइंग राउंड के टॉप आठ में जगह न बना पाने के कारण बिंद्रा 10 मीटर एयर राइफल के फ़ाइनल में जगह नहीं बना पाए.

जबकि बीजिंग ओलंपिक में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था.

इस खिलाड़ी ने वर्ष 2008 का वो दौर भी देखा था, जब पूरा देश उनका गुणगान कर रहा था.

लेकिन लंदन ओलंपिक में स्थिति बिल्कुल पलट गई थी.

किसी ने ठीक ही कहा है कि उगते सूरज को सभी सलाम करते हैं. गगन नारंग के कांस्य पदक जीतने के बाद पूरा का पूर मीडिया उनके पीछे पागल हुआ जा रहा था.

तो दूसरी ओर अभिनव बिंद्रा अपना सूटकेस लिए इधर-उधर चक्कर लगा रहे थे.

लोगों ने प्रतिक्रिया के लिए उनसे संपर्क किया, तो उन्होंने नारंग को बधाई दी.

लेकिन उस समय सबको आश्चर्य हुआ जब पता चला कि वे फ़ाइनल मैच के लिए स्टेडियम में अंदर ही नहीं घुस पाए.

हालाँकि उन्हें किसी ने रोका नहीं था, लेकिन अंदर भीड़ के कारण उन्हें नहीं जाने दिया गया.

यानी अभिनव बिंद्रा, गगन नारंग का मैच नहीं देख पाए. जब उन्हें किसी ने बताया, तो उन्हें जानकारी मिली.

गगन के बारे में उनसे पूछकर मीडियाकर्मी वहाँ से चलते बने और अभिनव बिंद्रा चुपचाप अपने कोच के साथ अपना सूटकेस लिए आगे बढ़ गए.

निराशा उनके चेहरे से झलक रही थी. सफलता का रंग हमेशा चटकीला होता है और नाकामी अंदर तक हिला देती है.

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