अखाड़े में आँसू - ओलंपिक मसाला

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बिलखती बाला

तलवार उठानेवाले की आँखों में क्या होना चाहिए – लहू, उग्रता, आक्रामकता. मगर लंदन ओलंपिक में दक्षिण कोरिया की तलवारबाज़ शिन लाम की आँखों में मुक़ाबले के बाद आँसू ही आँसू थे.

सेमीफ़ाइनल में हारने के बाद वो फूट-फूटकर रोने लगीं. कारण भी था इसका क्योंकि उनकी हार कोई सामान्य हार नहीं थी.

दरअसल मुकाबले के दौरान उन्हें और उनके कोच को लगा कि वो जीत चुकी हैं जब अचानक उन्होंने देखा कि घड़ी को रीसेट कर दिया गया, जो समय ज़ीरो था वो अचानक वन हो गया.

और जैसे ही समय मिला, जर्मन तलवारबाज़ और चार साल पहले की स्वर्ण विजेता ने ऐसा वार किया कि उसके आधार पर वो फ़ाइनल में पहुँच गईं.

इसके बाद आग-बबूला हो उठे दक्षिण कोरियाई कोच ने फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की, फ़ैसला आधे घंटे बाद आया, अपील नामंज़ूर हो गई और शिन लाम एक बार फिर से आँसुओं में डूब गईं.

यही नहीं वो मुक़ाबले की जगह पर ही जम गईं, जिससे लोगों को लगा कि कहीं वे धरना देने तो नहीं बैठ गईं.

फिर एक अधिकारी समझाने-बुझाने आया मगर वो जाने को ही तैयार नहीं थीं और रोए जा रही थीं.

अंततः मुक़ाबला पूरा होने के एक घंटे के बाद वो वापस लौटीं.

वो रोती-बिलखती अखाड़े से बाहर निकल रही थीं और दर्शक जमकर ताली बजा रहे थे. खुश तो होंगे ही वो, आए थे गंभीर मुक़ाबला देखने, देखने को मिल गया ड्रामा, जिसमें रहस्य-रोमांच-ऐक्शन-इमोशन सब शामिल था.

रिकॉर्ड नहीं, पदक तोड़ा

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Image caption अपने पदक से बहुत ज़्यादा प्यार भारी पड़ा

ओलंपिक में लगातार रिकॉर्ड टूटने की ख़बरें आ रही हैं. मगर ब्राज़ील के एक खिलाड़ी के साथ एक दूसरी ही घटना हो गई, उसका मेडेल ही टूट गया.

ये खिलाड़ी हैं ब्राज़ील के जूडो खिलाड़ी फ़ेलिपे कितादाई जिन्होंने जूडो स्पर्धा का कांस्य पदक जीता.

पदक उनको इतना प्यारा लगा कि वो उसे हर समय गले में लटकाए, सीने से सटाए हुए थे.

मगर नहाते वक्त, पदक को भींगने से बचाने के लिए उन्होंने इसे गले से निकाल कहीं रखने की कोशिश ही की थी कि पदक उनके हाथ से फिसल नीचे फ़र्श पर जा गिरा.

मेडल का धागा जिस हिस्से में बँधता है, वही हिस्सा टूट गया है जिसके बाद अब उसे धागे में डालकर गले में लटकाना मुश्किल है. साथ ही उनका कहना है कि ये एक जगह से मुड़ भी गया है.

फ़ेलिपे की जूडो की लड़ाई तो ख़त्म हो गई, अब वो दूसरी लड़ाई में लगे हैं, कि कैसे टूटा पदक बदलवाया जाए.

खबर देनेवाले ही खबरों में

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Image caption बेचारे खिलाड़ी के सर बिना बात ही ताज सज गया

अमरीकी ब्रॉडकास्टर एनबीसी खूब ज़ोर-शोर के साथ लंदन ओलंपिक कवर करने पहुँचा है.

मगर चैनल ओलंपिक खबरें देने के बजाय खुद ही रोज़ ख़बरों में आ रहा है.

सबसे पहले तो उसे ओलंपिक ओपनिंग के ही दिन अपने दर्शकों की नाराज़गी झेलनी पड़ी जब चैनल ने सीधा प्रसारण ये कहते हुए रोक लिया कि इसे वो अपने प्राइम टाइम के समय दिखाएँगे.

अब इसके बाद भी चैनल यही कर रहा है, अक्सर खेलों का सीधा प्रसारण ना कर वो उनकी रिकॉर्डिंग प्राइम टाइम के समय दिखा रहा है जब अधिक दर्शक टीवी देखते हैं और इसलिए विज्ञापन भी अधिक मिलते हैं.

मगर इसके दर्शक शिकायत कर रहे हैं, चैनल पर मैच के प्रसारण से पहले ही प्रोमो और समाचारों में दिखा दिया जा रहा है कि कौन जीता कौन हारा.

एक और मज़ेदार वाकये में एक दिन एनबीसी के प्रसारण में चैनल का लोगो एक खिलाड़ी के सिर पर कुछ यूँ जा चस्पां हुआ कि दर्शक मुस्कुराए बिना ना रह सके.

तेल के लिए इतनी दूर!

Image caption लंदन की पहचान हैं ब्लैक कैब टैक्सियाँ

लंदन की एक पहचान हैं शहर की ब्लैक कैब टैक्सियाँ. वैसे ब्लैक कैब ड्राईवर ओलंपिक से बहुत खुश नहीं हैं और वे ओलंपिक लेनों में टैक्सियों के जाने पर लगी रोक के विरोध में प्रदर्शन भी कर चुके हैं.

मगर वो अलग कहानी है. इस बार के ओलंपिक में ब्लैक कैब के साथ एक ख़ास प्रयोग किया जा रहा है.

ओलंपिक के लिए तीन ख़ास ब्लैक कैब टैक्सियाँ चलाई जा रही हैं जो लो एमिशन टैक्सियाँ हैं यानी जिनसे प्रदूषण बहुत कम होता है. ये टैक्सियाँ हाईड्रोजन से चलती हैं.

मगर एक दिक्कत हो गई है, इनमें हाईड्रोजन भरने के लिए ओलंपिक पार्क के पास जो पंप था उसे सुरक्षा कारणों से बंद करना पड़ा.

इसके बाद से हाईड्रोजन भरवाने के लिए टैक्सियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है. बल्कि उन्हें दूसरे शहर ही जाना पड़ रहा है - स्विन्डन जाना पड़ रहा है जो लंदन से 10-20 नहीं, पूरे 130 किलोमीटर दूर है.

यानी गैस भराने जाने और भराकर आने में ही बेचारी स्पेशल ब्लैक कैब को 260 किलोमीटर की दूरी तय करना पड़ रहा है!

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