ओलंपिक में 103 टीमों के दस या कम सदस्य..

  • 6 अगस्त 2012
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अगर आपने लंदन ओलंपिक का भव्य उद्घाटन समारोह देखा है तो आपने पाया होगा कि कुछ देशों के खिलाडियों के दल काफी बड़े थे, जबकि कुछ देशों के अपेक्षाकृत कहीं छोटे.

रोचक बात ये है लंदन ओलंपिक में हिस्सा ले रहे 103 देशों के दल में शामिल लोगों की संख्या दस या दस से भी कम है.

अमरीका, ब्रिटेन और चीन के सैकड़ो एथलीट खेलों के महाकुंभ ओलंपिक में हिस्सा ले रहे हैं. इसलिए इस बात में कोई आश्चर्य नही कि पदक तालिका में भी वो शीर्ष पर ही रहेंगे.

आस्ट्रेलिया की टीम भी काफी बड़ी है और इसके एथलीटों के भी काफी समर्थन मिल रहा है.

ऑस्ट्रेलिया की ओलंपिक बॉस्केट बॉल टीम की कोच कैरी ग्राफ कहती हैं, “हमारे पास अभ्यास करने के सारे संसाधन मौजूद है. फिज़ियोथेरेपिस्ट है. डॉक्टर हैं, पूरा का पूरा लंबा चौडा दल है. बड़े देश के बड़े दल का फायदा तो होता ही है. इसमें कोई शक है ही नही.”

बड़े देशों का दबदबा

हांलाकि बड़ी टीमें पदकों की तालिका में अपना दबदबा बनाए हुए हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी राष्ट्रगीत हैं जो कभी भी सुनाई नही देते.

ओलंपिक में हिस्सा ले रही 204 टीमों में आधे से ज्यादा टीमें ऐसी हैं जिनके सदस्यों की तादाद दस या उससे भी कम है. अब तक इनमें से कुछ ने ही पदक जीते हैं.

माइक्रोनीशिया पश्चिमी प्रशांत में 600 से ज्यादा द्वीपों का समूह है. आबादी सिर्फ एक लाख है. वो लंदन ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए अब तक के एथलीटों सबसे बड़े जत्थे यानि 6 सदस्यों के साथ आए हैं.

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Image caption गौर मरिआल दक्षिण सूडान की ओर से मैराथन में हिस्सा ले रहे हैं.वो ओलंपिक के झंडे तले निर्दलीय एथलीट के रुप में दौडेंगे.

माइक्रोनीशिया के टनीग्रैम 84 किलोग्राम कुश्ती में हिस्सा ले रहे है. वो कहते हैं, “मुझे छोटा दल अच्छा लगता है क्योंकि यहाँ आप हर किसी को जानते हैं, सभी कोचों को जानते हैं, एक तरह से ये एक परिवार के जैसा है. पर हमारे पास सिर्फ एक कोच है. वही मेरा फिजियो है, वही मेरा हौसला बढ़ाने वाले मनोवैज्ञानिक भी हैं.

टनीग्रैम का कहना है,“मैं यहाँ पर किसी पदक की उम्मीद नही कर रहा, मैं प्रतिस्पर्धात्मक होना चाहता हूँ कुछ अंक हासिल करना चाहता हूँ. हो सकता है कि दस बारह साल के वो लड़के जिन्हें मैं कोचिंग दे रहा हूँ , शायद भविष्य में वो पदक हासिल कर सकें.”

साइमन रोजर गार्डियन न्यूज़पेपर के डाटा ब्लॉग का संपादन करते हैं. उन्होंने एक ऐसी वैकल्पिक पदक तालिका बनाई है जिसमें पदकों की संख्या ओलंपिक में हिस्सा ले रहे देशों के सकल घरेलू उत्पाद, आबादी और टीम की संख्या के आधार पर तय की गई है.

एक मात्र खिलाड़ी

ऐसा हो सकता है कि 2012 ओलंपिक में सबसे छोटी ओलंपिक टीम अपने देश को प्रेरित करे. गौर मरिआल ने आठ साल की उम्र में उस समय सूडान छोड़ दिया था, जब उनका अपहरण किया गया और उनके परिवार की हत्या कर दी गई थी.

ब्रैडपुअर दक्षिण सूडान के लिए मैनेजर, कोच, दोस्त सब कुछ हैं, उस खिलाड़ी गौर मरिआल के लिए जो निर्दलीय धावक के रुप में ओलंपिक में हिस्सा ले रहे है.

इस टीम में एक मात्र खिलाड़ी है.

ब्रैडपुअर कहते हैं. ''हम चाहते हैं कि गौर मरिआल ऐसा दौड़ें कि दक्षिण सूडान के लोग अपने देश पर गर्व कर सकें दक्षिण सूडान को आजाद हुए एक साल हो गया और गौर मरिआल एक मात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिनकी इस समय विश्व में पहचान है.”

गौर मरिआल ने मैराथन के लिए क्वालीफाई किया है, वो संसार के सबसे नए देश दक्षिण सूडान के लिए दौडना चाहते हैं. लेकिन वहाँ अभी भी ओलंपिक समिति नहीं है इसलिए वो ओलंपिक के झंडे तले निर्दलीय एथलीट के रुप में दौडेंगे.

अब देखना ये है कि छोटे दलों वाले छोटे देश ओलंपिक में क्या कमाल दिखाते हैं और कितने पदकों को अपनी झोली में लाते हैं.

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