मैरीकॉम या मदर मैरी पर टिकी स्वर्ण की उम्मीद

  • 7 अगस्त 2012
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महिला मुक्केबाज़ एम सी मैरीकॉम से जहां देश ओलंपिक के गोल्ड मेडल की उम्मीद कर रहा हैं वहीं उनके जुडवां बच्चों की फरमाइशें कुछ अलग हैं और वो फोन पर अपनी मां से संपर्क में हैं.

मैरीकॉम के लिए ट्विटर और फेसबुक पर बधाईयों का तांता तो लगा ही हुआ है लेकिन उसके साथ ही लोग उनसे उम्मीदें भी कर रहे हैं.

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने लिखा है चलिए एक मेडल तो मिलेगा ही उम्मीद है कि वो मेडल मिले जो अभी तक नहीं मिला है. थैक्स मैरीकॉम.

मैरीकॉम के घर पर मैच देखने वाले अरिजीत सेन ने फोटो लगाई है और लिखा है कि मैरीकॉम के घर पर बिजली नहीं थी और जेनरेटर पर मैच देखा गया.

खेल मंत्री अजय माकन ने ट्वीट किया है..'' हमारे यहां पंजाबी में मैरीकॉम के लिए कहेंगे बड़ी दाड्डी कुड़ी है. ''

जाने माने पत्रकार दिबांग ने लिखा है कि मैंने मैरीकॉम को आटोरिक्शा वालों के सामने हाथ जोड़ते हुए देखा है कि उन्हें स्टेडियम ले जाए. उम्मीद करता हूं कि मेडल मिलने के बाद ये स्थिति बदलेगी.

टैंकमैन नामक एक व्यक्ति ने लिखा है- ट्विटर पर चेतन भगत और मैरीकॉम क्यों ट्रेंड कर रहे हैं. क्या मैरीकॉम ने चेतन को घूंसा जड़ दिया है.

सचिन कालबाग लिखते हैं कि अगर किसने फिर से मैरीकॉम को कांस्य पदक मिलने की बात की तो मुझसे कुछ सुनेगा. पांच बार की विश्व चैंपियन गोल्ड से कम पर क्यों माने.

बच्चों की मांग

भारत की महिला बॉक्सर मैरीकॉम ने जब रविवार को अपना प्री-क्वार्टर फाइनल मैच जीता था, तो उन्होंने अपने मैच अपने जुड़वा बच्चों को समर्पित किया था, जिनका रविवार को जन्मदिन था.

अब मैरीकॉम सेमी फाइनल में पहुँच गई हैं. यानी भारत का एक पदक और पक्का हो गया है.

लेकिन मैरीकॉम का कहना है कि मैच जीतने के बाद बच्चों की फरमाइश बढ़ गई है.

क्वार्टर फाइनल जीतने के बाद खुशी से गदगद मैरीकॉम ने पत्रकारों को बताया कि वे अपने बच्चों से लगातार संपर्क में हैं.

मैरीकॉम उन्हें हमेशा फोन करती रहती हैं.

लेकिन पहले राउंड का मैच जीतने के बाद जब उन्होंने अपने बच्चों को फोन किया, तो उन्होंने अपनी मांगों की लंबी सूची उन्हें थमा दी.

मैरीकॉम बताती हैं, "एक ने मुझसे स्कूटर की मांग की है, तो एक को खूब सारे खिलौने चाहिए."

लेकिन मम्मी मैरीकॉम को इसकी चिंता नहीं. देश के लिए कम से कम एक पदक पक्का करने वाली मैरीकॉम कहती हैं कि वे अपने बच्चों की मांग खुशी से पूरा करेंगी.

वे ऐसा करें भी क्यों नहीं, उन्होंने पदक की देश की मांग तो पूरी कर ही दी है.

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