विदेशी मीडिया की लाड़ली मैरी कॉम

  • 7 अगस्त 2012
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पाँच बार की विश्व चैम्पियन रहीं एम सी मैरी कॉम कॉम का लोहा पूरी दुनिया मानती है.

उन्होंने अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित भी किया है.

लंदन ओलंपिक के दौरान शायद ही किसी भारतीय खिलाड़ी की मांग इतनी है, जितनी मैरी कॉम कॉम की है.

ओलंपिक में पहली बार महिला मुक्केबाजी को शामिल किया गया है. लेकिन इस प्रतियोगिता को कवर करने के लिए देश-विदेश के पत्रकार टूट पड़े हैं.

लेकिन मैरी कॉम कॉम की बात ही निराली है.

मैच के बाद मैरी कॉम कॉम का इंतजार करते समय पत्रकारों के लिए बनाई गई विशेष जगह खचाखच भर गई थी.

Image caption मेरीकॉम का इंटरव्यू करने आई जापान की एक पत्रकार गोटो नायोमी

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो या प्रिंट मीडिया- सब मैरी कॉम कॉम से बात करना चाह रहे थे.

भीड़ इतनी थी कि मैरी कॉम कॉम के वहाँ पहुँचते ही धक्का-मुक्की शुरू हो गई.

लेकिन कुछ तुनकमिजाज भारतीय खिलाड़ियों से अलग मैरी कॉम कॉम ने सबकी बातें सुनी और हँसते हुए सबको इंटरव्यू भी दिया.

वहीं मेरा सामना जापान की एक पत्रकार गोटो नायोमी से हो गया. वो वहाँ चक्कर लगा रही थी.

पूछा तो पता चला कि वे मैरी कॉम कॉम के इंटरव्यू के लिए वहाँ आई हैं.

मुझे थोड़ी और उत्सुकता हुई तो उन्होंने बताया कि जापान में महिला मुक्केबाजी काफी लोकप्रिय है और मैरी कॉम कॉम भी उतनी ही हैं.

तो उधर थाईलैंड के पत्रकार उन पर एक सिरीज कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि मैरी कॉम कॉम के हर मैच पर उनकी नजर होती है.

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