कई बार गलतियाँ हो जाती हैं: विजेंदर

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Image caption क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उजबेकिस्तान के मुक्केबाज अब्बोस अतोएव विजेंदर सिंह पर भारी पड़े.

बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले मुक्केबाज विजेंदर सिंह से लंदन ओलंपिक में भी काफी उम्मीदें थीं. लेकिन क्वार्टर फाइनल में मिली हार के बाद ये उम्मीदें अब चकनाचूर हो गई हैं.

उजबेकिस्तान के मुक्केबाज अब्बोस अतोएव के खिलाफ मैच में विजेंदर पहले राउंड तक बराबरी पर चल रहे थे. लेकिन दूसरे राउंड में पासा पलट गया, जो आखिरकार विजेंदर पर भारी पड़ा.

मैच के बाद बीबीसी के साथ बातचीत में विजेंदर ने कहा, "कई बार गलतियाँ हो जाती हैं. मुझे पीठ में परेशानी भी थी. इसलिए मैं थोड़ा धीमा पड़ गया था."

मुक्केबाज अब्बोस अतोएव के खिलाफ विजेंदर पहले भी मैच खेल चुके हैं.

विजेंदर का कहना है कि ये मुक्केबाज अच्छे हैं और इस मैच में बराबरी का मुकाबला चल रहा था, लेकिन अब वे हार गए तो क्या कर सकते हैं.

दूसरी ओर मुक्केबाजी कोच गुरबख्श सिंह संधू का कहना है कि पहले राउंड तक सब ठीक था.

बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में उन्होंने कहा, "पहले राउंड तक मुकाबला बराबरी का था. दूसरे राउंड में हमने सोचा था कि ये हमारा है, लेकिन अंक प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को मिले. तीसरा राउंड भी हमने अपने पक्ष में सोचा था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ."

उन्होंने बताया कि इस मैच के लिए भी रणनीति बनाई गई थी और योजना के मुताबिक ही विजेंदर लड़े. लेकिन दूसरे और तीसरे राउंड में हमने जैसा सोचा था, वैसा नहीं हुआ.

निराशा

विजेंदर के मैच हारने के बाद पूरे भारतीय कैंप में निराशा की लहर थी. विजेंदर का मैच देखने आए कई अधिकारी काफी निराश नजर आए.

कुछ दिन पहले प्री-क्वार्टर फाइनल में विजेंदर की जीत के बाद नारेबाजी करने वाले भारतीय समर्थक भी विजेंदर की हार के बाद खामोशी से निकल गए.

विजेंदर के पदक की दौड़ से बाहर हो जाने के बाद पुरुष वर्ग में अब एक ही मुक्केबाज बच गए हैं. देवेंद्रो सिंह आठ अगस्त को अपना क्वार्टर फाइनल मैच खेलेंगे.

वैसे मेरी कॉम ने सेमी फाइनल में जगह बनाकर भारत के लिए एक और पदक तो पक्का कर ही दिया है.

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