कैसे मिलते हैं मुक्केबाज़ी में अंक

इमेज कॉपीरइट AP

स्कोरिंग मुक्का

हर स्कोरिंग मुक्के को बिना किसी रुकावट के बंद मुठ्ठी के साथ विरोधी के शरीर पर कमर से ऊपर पड़ना चाहिए. जो घुस्सा घुमा के पड़ता हैं उस पर भी अंक मिलते हैं.

बदलाव

नए स्कोरिंग सिस्टम के तहत ये ज़रूरी नहीं है कि सभी जज(बहुमत यानी 5 जजों में से तीन) एक साथ एक सैकेंड के अंदर स्कोरिंग बटन दबाएं और तभी एक स्कोरिंग अंक गिना जाए.

मुक्कों की स्कोरिंग

एआईबीए के नए स्कोरिंग सिस्टम में सभी पांच जजों द्वारा दिए अंकों को माना जाता है. हर जज अपनी जगह पर बैठकर देखते हुए अपने विवेक के अनुसार स्कोरिंग मुक्के पर कितनी बार भी स्कोरिंग बटन दबा सकता हैं.

अगर जज को लगे की खिलाड़ी ने तीन स्कोरिंग पंच लगाए हैं वो तीन बार स्कोरिंग बटन दबा सकता है.

कैसे काम करता हैं नया स्कोरिंग सिस्टम

हर जज का स्कोर अलग- अलग गिना जाता है.

हर राउंड में पांच में से तीन जजों द्वारा दिए गए नज़दीकी अंको का औसत निकाला जाता है और उसी आधार पर अंक दिए जाते हैं.

राउंड के दौरान स्कोर नहीं दिखाए जाते

खिलाड़ियों को दी गई चेतावनी किसी खिलाड़ी के निजी स्कोर से जुड़ी हुई नहीं होती.

अंक गिनने का तरीका

हर दौर के बाद दोनों मुक्केबाज़ों के अलग-अलग स्कोर गिने जाते हैं.

हर दौर में पांच जजों के अंको में से सिर्फ तीन जजों के ही अंक लिए जाते हैं. जिन तीन जजों के अंक आपस में मेल खाते हैं उन अंकों को गिना जाता है और उनका औसत एक खिलाड़ी का स्कोर होता है.

अगर इसके बाद भी दोनो मुक्कोबाज़ों का एक जैसा स्कोर आए तो ट्रिम्ड मीन का इस्तेमाल होता हैं. यानी जिस जज ने सबसे ज्यादा अंक दिए हैं और जिस जज ने सबसे कम अंक दिए हैं उन अंको को नहीं गिना जाता और बाकि बचे जजों के अंको के आधार पर फैसला होता है.

संबंधित समाचार