योगेश्वर की जीत से गदगद भारतीय कैंप

  • 12 अगस्त 2012
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Image caption योगश्वर दत्त की उम्र 29 वर्ष हैं और ये उनका तीसरा ओलंपिक हैं

भारतीय पहलवान योगेश्वर दत्त की जीत बहुत खास है. एकाएक निराशा के भँवर में डूबे भारतीय ओलंपिक दल में उत्साह का संचार हो गया है.

महिला मुक्केबाज़ मेरी कॉम के पदक जीतने की सबने उम्मीद की थी. मेरी कॉम को सीधे प्री-क्वार्टर फाइनल में प्रवेश मिला था और दो मैच जीतने के बाद ही कांस्य पक्का हो गया था.

लेकिन मेरी कॉम के पदक के बाद भारतीय दल में मायूसी छाई थी. हर ओर से निराशाजनक खबर आ रही थी.

भारतीय दल का प्रदर्शन

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Image caption मेरी कॉम ने महिला मुक्केबाजी में कांस्य पदक जीता है.

पुरुष बॉक्सर कुछ नहीं कर पाए, निशानेबाजी में भी गगन नारंग और विजय कुमार के बाद कुछ नहीं हुआ.

और तो और भारतीय हॉकी टीम ओलंपिक में अपने सबसे खराब प्रदर्शन के दौर में आ गई.

पहलवानी शुरू हुई तो गीता फोगाट, अमित कुमार और नरसिंह यादव ने काफी निराश किया. ऐसा लगा बस चार ही रह जाएँगे भारत के पदक.

लेकिन योगेश्वर दत्त ने ओलंपिक खत्म होने से एक दिन पहले भारतीय दल में नई ऊर्जा भर दी.

मैच के दौरान साँस थामे बैठे भारतीय ओलंपिक दल के अधिकारी योगेश्वर की जीत के बाद खुशी से झूम रहे थे.

योगेश्वर के जीतने के बाद दावे भी होने लगे. अगर पदकों की संख्या पर जाएँ, तो भारत ने अभी तक के ओलंपिक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है. बीजिंग में तीन पदक जीतने के बाद लंदन में पदकों की संख्या पाँच हो गई है.

योगेश्वर की जीत के बाद पहलवान भी गदगद हैं. सभी अब सुशील कुमार से उम्मीद लगाए बैठे हैं.

सभी को लग रहा है कि स्वर्ण पदक का अकाल शायद सुशील ही खत्म करेंगे.

क्या ऐसा होगा, ये तो रविवार को ही पता चलेगा. तब तक भारतीय दल योगेश्वर दत्त की जीत का जश्न तो मनाएगा ही.

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