ओलंपिक मसाला

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ओलंपिक के दौरान लेस्टर के एक शिल्पकार ने कुछ अलग करने के बारे में सोचा.

काष्ठ शिल्पकारी करने वाले 71 वर्षीय अमृत पामर ने सोचा क्यों ना लकड़ियों की जगह तरबूज़ पर हाथ आज़मा कर देखा जाए.

और इस तरह देखते-देखते उन्होंने तरबूज़ पर ब्रिटेन के स्टार पदक विजेताओं क्रिस हॉय, जेसिका एनिस और एंडी मरे के चित्रों को काढ़ दिया.

पामर बोले – "मैंने कहीं देखा था कि तरबूज़ पर ऐसी कलाकारी हो सकती है और मैंने कोशिश की, जो सफल रही और मुझे भी ये अच्छा लग रहा है."

अब पदक विजेताओं को पता नहीं क्या अधिक भाएगा – हरा तरबूज़ या सुनहरा लेटरबॉक्स?

बोल्ट हैं लेजेंड

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यूसेन बोल्ट ‘लेजेंड’ हैं कि नहीं?

कम-से-कम लंदन ओलंपिक आयोजन समिति के अध्यक्ष, ब्रिटेन के पूर्व स्वर्ण विजेता एथलीट सेबेस्टियन को ने अपनी राय साफ़ कर दी है – हाँ, वो लेजेंड हैं, बल्कि वो पहले से ही लेजेंड थे.

बोल्ट की योग्यता के बारे में लॉर्ड को की राय महत्वपूर्ण है.

क्योंकि कुछ ही दिन पहले अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के प्रमुख ने ये कहकर बोल्ट की योग्यता को छोटा करने की कोशिश की थी कि अभी लेजेंड का सम्मान हासिल करने के लिए उन्हें और कुछ करके दिखाना होगा.

आईओसी प्रमुख ज़्याक रोख़ा ने ये भी कहा कि बोल्ट अभी उस स्तर के खिलाड़ी नहीं हैं जैसा कि धावक और लंबी कूद विजेता अमरीकी चैंपियन कार्ल लुईस थे जिन्होंने कि 1984 से लेकर 1996 तक हर खेल में अपना सिक्का साबित किया.

मगर लॉर्ड को ने इस बारे में अपनी राय रखते हुए कहा – "यूसेन बोल्ट निःसंदेह लेजेंड हैं, आज तक किसी ने भी लगातार दो ओलंपिक खेलों में 100 मीटर और 200 मीटर में जीत हासिल नहीं की है."

वैसे अपने-आपको लेजेंड करार दिए जाने- नहीं दिए जाने की बहस के बीच बोल्ट ने कहा है कि वो अब भी जमैका में आराम से इधर-उधर टहल सकते हैं, वहाँ उन्हें प्रशंसकों के टूट पड़ने का डर नहीं.

बोल्ट ने कहा – "मुझे लगता है जमैका में लोग मुझे इतना अधिक देखते हैं कि वे मुझे देख पागल नहीं होते. वैसे मुझे वहाँ ऑटोग्राफ़-तस्वीरों आदि का सामना करना पड़ता है, फिर भी वहाँ ये सब विदेशों की तुलना में बहुत कम होता है.”

टेबल टेनिस की समस्या

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अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस संघ बड़ी परेशानी में है.

उनकी परेशानी जुड़ी है चीन से जिसने एक बार फिर इस खेल में अपना दबदबा साबित कर दिया.

चीन ने इस बार टेबल टेनिस में चारों के चारों स्वर्ण पदक झटक लिए. दो और रजत पदक भी मिले चीन को.

बीजिंग ओलंपिक में भी यही हुआ था. वहाँ तो चार स्वर्ण के अलावा दो रजत और दो कांस्य पदक भी मिले उसे.

टेबल टेनिस को ओलंपिक में 1988 में शामिल किया गया. तबसे अब तक 28 में से 24 स्वर्ण पदक चीन की ही झोली में गए हैं.

चीन के इसी एकछत्र अधिकार को देखते हुए अब अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस संघ के प्रमुख अधम शरारा ने कहा है – "ये रिवायत अगले चार-पाँच साल में बदलेगी. वरना फिर से एक ही देश को जीतते देखना बड़ा अजीब लगेगा. वो चाहे चीन हो, चाहे अमरीका."

गोल्डन पोस्टबॉक्स गाथा

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ब्रिटेन के गोल्डन पोस्टबॉक्स की एक और गाथा. यहाँ का डाक विभाग हर स्वर्ण विजेता के गृहनगर में एक पोस्टबॉक्स को सुनहरा कर दे रहा है.

इस बार कहानी है दक्षिणी इंग्लैंड के हैम्पशर काउंटी के शहर लिमिंगटन से.

वहाँ एक आदमी को नौकायन विजेता बेन ऐन्स्ली की जीत की खुशी में एक पोस्ट बॉक्स को गोल्डन रंग में बदल देने के लिए गिरफ़्तार कर लिया गया.

51 वर्षीय रॉब स्मिथ ने लिमिंग्टन हाइ स्ट्रीट में एक पोस्टबॉक्स को रंग दिया, जहाँ कि बेन ऐन्स्ली रहते हैं.

इससे पहले रॉयल मेल ने कह दिया था कि ऐन्स्ली के सम्मान में एक दूसरी जगह, कॉर्नवॉल में, एक लेटरबॉक्स को रंगा जाएगा जहाँ विजेता का जन्म हुआ था.

रॉब स्मिथ ने कहा – "जब उन्होंने कहा कि वे लिमिंग्टन में कुछ नहीं रंगने जा रहे हैं तो यहाँ के लोगों को बड़ा गुस्सा आया. मैंने सोचा, ये सीधा पागलपन है."

सरकारी संपत्ति को नुक़सान पहुँचाने के संदेह में गिरफ़्तार किए गए रॉब स्मिथ को बाद में ज़मानत पर रिहा कर दिया गया.

रॉयल मेल ने लोगों से अति उत्साह में लेटर बॉक्स रंगने में संयम बरतने की अपील भी जारी की है.

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