भारतीय टेस्ट क्रिकेट की बेमिसाल चौकड़ी

 गुरुवार, 23 अगस्त, 2012 को 10:31 IST तक के समाचार

भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम के चार खिलाड़ी राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, सौरभ गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण. भारतीय क्रिकेट टीम के मध्यक्रम की जान ये चौकड़ी अक्सर टेस्ट मुकाबले में तीसरे, चौथे, पांचवे और छटे स्थान पर आती रही और जिस तरह इन चारों ने लगातार टेस्ट मुकाबलों में भारत के लिए शानदार प्रदर्शन किया उसे देखकर इस चौकड़ी का नाम पड़ा 'फ़ैब्युलस फोर' यानी बेमिसाल चार.

लेकिन आज हैदराबाद में भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच खेले जा रहे पहले टैस्ट में इस चौकड़ी के तीन खिलाड़ी नहीं खेल रहे हैं.

अगर आपको आंकड़ो से डर लगता है तो इन खिलाडियों के आंकडे आपको वाकई डरा सकते हैं. इन चारों खिलाडियों के टेस्ट रनों को मिला लिया जाए तो कुल 44751 रन बनते हैं जो शायद ही किसी दूसरी टीम के चार सदस्यों के रनों का जोड़ हो. बीबीसी संवाददाता पवन नारा के साथ जानिए बेमिसाल चौकड़ी के बारे में.

  • राहुल द्रविड

    भारतीय टेस्ट टीम में राहुल द्रविड़ की भूमिका को बयान करने के लिए दीवार शब्द बिलकुल सटीक हैं. तीसरे नम्बर पर बल्लेबाज़ी करने वाले राहुल जब क्रीज़ पर होते हैं तो गेंदबाज़ को विकेट तक पहुंचने के लिए इसी दीवार को भेदना पड़ता था जो आसान नहीं था. राहुल के 164 टेस्ट मैचों की 286 पारियों में 13288 रन बनाए जिनमें 36 शतक और 63 अर्धशतक शामिल थे. राहुल द्रविड के क्रीज़ पर बिताए गए समय का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता हैं कि उन्होंने 31258 गेंदें खेलीं यानी लगभग पांच हज़ार 209 ओवर.

    राहुल द्रविड़ की कलात्मक बल्लेबाज़ी ने टेस्ट क्रिकेट प्रेमियों को कई बेहतरीन लम्हे दिए हैं. उनका कोई एक बेहतरीन शॉट बता पाना बेहद मुश्किल है क्योंकि क्रिकेट की ज़बान में जो भी शॉट हैं वो सभी उन्होंने ऐसे खेले मानो वो उनके खेलने के तरीके को देखने के बाद क्रिकेट की किताब में शामिल किए गए हों.

    क्रिकेट जैसे खेल में जहां रातों रात खिलाड़ी सितारे बन जाते हैं वहीं राहुल का सुरुर धीरे-धीरे लोगों पर चढ़ा और ऐसा चढ़ा जो शायद ही कभी उतर पाए.

    राहुल की बल्लेबाज़ी टेस्ट क्रिकेट की कविता रही और उनका व्यहवार मानो उर्दू की शायरी. राहुल द्रविड़ आज भले ही क्रिकेट ना खेलते हों लेकिन भारतीय क्रिकेट की मज़बूत दीवार का खिताब उनके ही नाम रहेगा.

  • सचिन तेंदुलकर

    सचिन ने 16 साल की उम्र में उस वक्त विश्व के बेहतरीन तेज़ गेंदबाज़ माने जाने वाले पाकिस्तान के वसीम अकरम और वकार यूनुस के सामने टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत की और रन बनाने का जो सिलसिला 21 साल पहले शुरु हुआ वो आज तक नहीं रुका है.

    समय के अनुसार सचिन मंजते गए, रन बनाते गए और मास्टर ब्लास्टर की उपमा भी सचिन के लिए फीकी पड़ने लगी. एक समय आया जब सचिन को क्रिकेट का भगवान कहा जाने लगा.

    सचिन को पहले टेस्ट शतक के लिए 15 टेस्ट तक इंतज़ार करना पड़ा लेकिन उसके बाद सचिन लगातार खेलते रहे और सैकड़ों का सैकड़ा भी पूरा कर लिया. अभी तक उन्होंने 188 टेस्ट मुकाबलों में 51 शतक, 65 अर्धशतक और 15470 रन बनाए हैं. 'फैब्यूलस फोर' में यही इकलौते खिलाड़ी हैं जो अब भी खेल रहे हैं.

    सचिन के खेल में क्रिकेट की कलात्मक्ता भी हैं और रनों की बौछार करने वाला जलवा भी. सचिन टेस्ट की सफेद वर्दी में भी उतने की लाजवाब हैं जितने वनडे की रंगीन पोशाक में.

    सचिन के खेल आकंड़ों पर हज़ारों किताबें लिखी जा सकती हैं लेकिन सचिन तेंदुलकर के बारे में शब्दों में बंया कर पाना बहुत मुश्किल लगता है.

    वो कहते हैं ना कि नाम ही काफी है-सचिन तेंदुलकर.

  • वीवीएस लक्ष्मण

    आस्ट्रेलिया जैसा विरोधी हो, लगातार 16 टेस्ट जीत का सिलसिला हो और कोलकाता की पिच पर फॉलोऑन का सामना करता भारत.

    इस स्थिती में टेस्ट को जीत पाने की कल्पना खेल के जानकार तो दूर, टीम पर अंधविश्वास करने वाले भी नहीं कर सकते थे.

    ऐसी स्थिती में वीवीएस लक्ष्मण ने 'भारतीय दीवार' राहुल द्रविड़ के साथ मिलकर इस टेस्ट को जीत लिया. लक्ष्मण ने बनाए 281 रन, राहुल ने बनाए 180 रन और भारत को मिला वैरी-वैरी स्पेशल लक्ष्मण.

    एक समय लक्ष्मण डॉक्टरी की पढ़ाई करते थे लेकिन किसको पता था कि लोगों का इलाज करने के बजाय वो अपनी बल्लेबाजी़ से विरोधियों को दर्द देंगे.

    शॉट खेलते वक्त लक्ष्मण की कलाईयों का इस्तेमाल देखते ही बनाता था. वीवीएस लक्ष्मण ने 134 टेस्ट मैचों में बनाए 8781 रन जिसमें 17 शतक और 56 अर्धशतक शामिल रहे.

    लक्ष्मण ने मज़बूत आस्ट्रेलिया के खिलाफ सबसे ज्यादा 6 शतक बनाए. लक्ष्मण को न्यूज़ीलैंड के खिलाफ टीम में शामिल किया गया था लेकिन उन्होंने उससे पहले ही क्रिकेट को अलविदा कह दिया. हालांकि ये सवाल क्रिकेट प्रेमियों के मन में अब भी है कि आखिर इतनी हड़बडी में क्यों और भारत के ड्रेसिंग रुम में क्या वाकई सब ठीक है?

  • कोच जॉन राइट के साथ सौरव गांगूली

    बेमिसाल चार की श्रेणी में सौरभ गांगुली को सिर्फ उनकी बल्लेबाज़ी की वजह से ही नहीं गिना जाता. सौरभ गांगुली ने भारतीय टीम को बनाया और सबसे बड़ी बात ये कि भारतीय टीम को जीत के लिए ‘किलर इंस्टिंग्ट’ यानी मरने मारने का जज़्बा दिया.

    सौरभ गांगुली की कप्तानी में भारत भले ही विश्व कप ना जीत पाया हो लेकिन टीम में नया जोश भरने का श्रेय गांगुली को ही जाता है.

    गांगुली कप्तान के तौर पर अपने फैसलों को लेकर अडिग थे और कई बार कोच के साथ उनकी तक़रार की बात भी सामने आई.

    लेकिन इन सब से ऊपर उठकर उन्होंने नए खिलाड़ियों को तराशने का ऐसा काम किया जिसने भारतीय क्रिकेट की किस्मत बदल दी.

    विरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह, युवराज सिंह, ज़हीर खान जैसे खिलाड़ियों को सौरभ ने तराशा.

    विरेंद्र सहवाग जैसे विस्फोटक छवि वाले खिलाड़ी से टेस्ट मैच में ओपनिंग करवाने का फैसला आखिर कौन ले सकता है. ये बोल्ड फैसला भी गांगुली ने लिया.

    सौरव गांगुली बंगाल टाईगर से प्रिंस ऑफ कोलकाता बने. जैफ्री बॉयकॉट ने सौरभ के बारे में एक बार कहा था कि ऑफसाईड में या तो भगवान हैं या फिर सौरभ गांगुली.

    सौरभ ने 113 मैचों में 7212 रन बनाए जिनमें 16 शतक और 35 अर्धशतक शामिल हैं.

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