ओलंपिक के करीब लेकिन अलग है पैरालंपिक

 बुधवार, 29 अगस्त, 2012 को 16:55 IST तक के समाचार
पैरालंपिक्स

लंदन में बुधवार से शुरु हो रहे पैरालंपिक खेलों को लेकर पिछले दिनों खत्म हुए ओलंपिक जैसा गजब का उत्साह है

लंदन ओलंपिक की कामयाबी के बाद अब पैरालंपिक को लेकर जबरदस्त उत्साह है. यह खेल भी लंदन में ही बुधवार से शुरु हो रहे हैं. लेकिन आखिरकार पैरालंपिक और सामान्य खेलों में क्या फर्क हैं. आइए जानते हैं कि इन दोनों आयोजनों में पांच सबसे बड़े फर्क क्या हैं.

ओलंपिक नहीं है पैरालंपिक्स

पैरालंपिक शब्द के आखिरी हिस्से को सुनने से इसमें ओलंपिक का अक्स नजर आता है.

लेकिन यह खेल ओलंपिक नहीं है. इसलिए इसमें ओलंपिक की पहचान रिंग्स का इस्तेमाल नहीं होता.

इसकी जगह लाल, हरी और नीले रंग के तीन भुजाकार आकृतियां इन खेलों का प्रतिनिधित्व करती है.

इसके अलावा इन दोनों खेलों का आयोजन बिलकुल अलग-अलग संस्थाओं के हाथ में है. इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी और इंटरनेशनल पैरालंपिक कमेटी की पहचान बिलकुल अलग है.

1960 में रोम ओलंपिक खेलों के खत्म होने के एक हफ्ते बाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक खेलों का आयोजन किया गया था. लेकिन 1968 में मैक्सिको ने ओलंपिक के बाद पैरालंपिक खेलों का आयोजन करने से इनकार कर दिया था.

2001 में इसे नियमित कर दिया गया. ओलंपिक की मेजबानी करने वाले देश को पैरालंपिक खेलों के लिए भी दावेदारी करनी पड़ती है.

कुछ बदलाव

इन खेलों में एथलेटिक्स, तैराकी और साइक्लिंग ओलंपिक की स्पर्धाओं की तरह ही खेले जाते हैं.

लेकिन इन्हें कई तरह के वर्गों में बांटा गया है. व्हीलचेयर पर रग्बी, बैठ कर वॉलीबाल और ब्लाइंड फुटबाल को एकबारगी देखने से सामान्य खेल की तरह ही नजर आएंगे.

इन खेलों में इस्तेमाल होने वाली फुटबाल सामान्य की तुलना हल्की और कम उछाल वाली होती है.

इसमें बाल बियरिंग्स रहते हैं ताकि इसकी आवाज से खिलाड़ियों को बॉ़ल अपनी ओर आने का अंदाजा हो जाए.

लेकिन फुटबॉल काफी सख्त सतह पर होती है और एक तरफ पांच खिलाड़ी ही होते हैं. इसके अलावा मैदान सामान्य फुटबाल ग्राउंड से छोटा होता है.

जिन खिलाड़ियों को हल्का नजर आता है वे अपनी आंखों पर पट्टी बांधते हैं. गोलकीपर पूरी तरह से देख सकता है.

लेकिन उसे अपना इलाका छोड़ कर जाने की इजाजत नहीं होती. इसके अलावा खिलाड़ियों की मदद के लिए गोल के पीछे एक गाइड भी रहता है.

दो खास खेल

पैरालंपिक में दो ऐसे खेल भी हैं जो सामान्य ओलंपिक का हिस्सा नहीं हैं. गोलबॉल और बोकिया केवल इन ही खेलों का हिस्सा हैं.

गोलबाल में तीन खिलाड़ी ऐसे होने चाहिएं जो बिलकुल देख नहीं सकते. दो बहरे होने चाहिएं. इस खेल को विशेष तौर पर चिन्हित समानान्तर चतुर्भुज आकार के कोर्ट पर खेला जाता है.

इसमें घंटियों के भरी भारी गेंद को विपक्षी टीम के नेट की तरफ उछाला जाता है जिसे खिलाड़ियों को अपने शरीर से रोकना पड़ता है.

बोकिया में खिलाड़ी पूरी तरह से नेत्रहीन होते हैं. यह खेल 50 से भी ज्यादा देशों में काफी प्रतिस्पर्धा के साथ खेला जाता है.

बाऊल की तरह बोकिया इंडोर कोर्ट में खेला जाता है. इसमें व्यक्तिगत, टीम और युगल स्पर्धाएं होती हैं.

खिलाड़ी गेंदों को निशाने तक पहुंचाने के लिए फेंक और ठोकर से मार सकते हैं.

तुरंत तैयारी

ओलंपिक खत्म होने के तुरंत बाद ओलंपिक गांव को पैरालंपिक विलेज के लिए तैयार करना होता है.

लंदन ओलंपिक के बाद ऐसा करने में सिर्फ पांच दिन का समय लगा.

स्टेडियमों की सीटों को हटा कर या फिर से व्यवस्थित कर अधिक से अधिक विकलांगों की व्हीलचेयर के लिए जगह बनाई जाती है.

इसके अलावा नेत्रहीन खेल प्रेमियों को सुनने के लिए उपकरण मुहैया करवाए जाते हैं. साथ ही जो सुन नहीं सकते उन्हें ऐसी जगह बिठाया जाता है जहां से वे बड़ी स्क्रीन पर भी खेलों को देख सकें.

डोप टेस्ट

इन खेलों में प्रतिबंधित दवाओं के सेवन को लेकर काफी गंभीरता बरती जाती है. अगर किसी खिलाड़ी के बीमारी, दर्द या किसी और कारण से किसी खास दवा का सेवन जरूरी हो जाता है तो उसके लिए पहले से लिखित में अनुमति लेना जरुरी होता है.

सामान्य ओलंपिक की तरह ऐसे हर आवेदन पर एक मेडिकल कमेटी विचार करती है. सामान्य खिलाड़ियों की तरह पैरालंपिक में हिस्सा लेने वालों को भी दवा के सेवन के लिए अनुमति पत्र ग्रहण करना पड़ता है जिसे ‘टीयूई’ कहा जाता है.

पैरालंपिक और सामान्य ओलंपिक में प्रतिबंधित दवाओं की सूची एक जैसी ही है. डॉक्टरी सलाह पर दवाएं लेने वाले खिलाड़ियों को यह साबित करना पड़ता है कि उनके पास ली गई दवाओं का कोई दूसरा विकल्प नहीं था.

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