टी-20 विश्वकप: इन खिलाड़ियों पर रहेगी नजर

  • 13 सितंबर 2012

टी-20 विश्वकप में यूं तो कई टीमें और खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं लेकिन चंद खिलाड़ियों पर हमारी और तमाम दर्शकों की भी नज़र रहेगी. ऐसे ही कुछ खिलाड़ियों के नाम और कारनामे.

विराट कोहली

भारतीय क्रिकेट टीम में मध्यक्रम के बल्लेबाज़ विराट कोहली वक्त पड़ने पर सलामी बल्लेबाज़ भी बन जाते हैं.

उनकी कप्तानी में भारत ने मलेशिया में वर्ष 2008 में अंडर-19 क्रिकेट विश्वकप जीता था. विराट ने अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मैचों में वर्ष 2008 में ही पदार्पण किया.

वे भारत को वर्ष 2011 में क्रिकेट विश्वकप जिताने वाली टीम में भी शामिल थे. उन्होंने इसी वर्ष वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना पहला टैस्ट मैच खेला.

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में उन्होंने अपना पहला टैस्ट शतक लगाया. क्रिकेट का कोई भी रूप हो, भारतीय क्रिकेट टीम में उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

जॉर्ज बेली

टी-20 क्रिकेट विश्वकप में ऑस्ट्रेलिया की कमान जॉर्ज बेली के हाथों में होगी. साल 2009 से उनके सितारों ने बुलंदी छूना तब शुरू किया जब उन्हें डेनियल मार्श की जगह कप्तानी की जिम्मेदारी सौंपी गई.

वे एक अच्छे बल्लेबाज़ हैं और टीम के सदस्यों के साथ अपने उम्दा तालमेल के लिए भी जाने जाते हैं. आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स की तरफ से खेलने वाले बेली के बारे में कहा जाता है कि वो एक ऐसे बल्लेबाज़ हैं जो चंद ओवर में मैच का रुख़ पलट सकते है.

क्रिस गेल

वेस्टइंडीज के लिए खेलने वाले जमैका के क्रिस गेल किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं. वर्ष 2007 से 2010 तक टेस्ट मैचों में वेस्टइंडीज की कप्तानी करने वाले क्रिस गेल आईपीएल में अपनी धुंआधांर बल्लेबाज़ी के लिए ज्यादा पहचाने जाते हैं.

वैसे गेल उन चार खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्होंने टेस्ट मैचों में एक नहीं बल्कि दो बार तिहरा शतक जड़ा है. पहली बार ये कारनामा उन्होंने साल 2005 में किया था जब उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 317 रन बनाए थे.

पांच साल बाद भी उनके दमखम में कमी नहीं आई. इसका सबूत उन्होंने वर्ष 2010 में श्रीलंका के खिलाफ 333 रन बनाकर दिया.

कामरान अकमल

कामरान अकमल पाकिस्तान के एक निर्भीक और आक्रामक बल्लेबाज़ हैं. उन्होंने समय-समय पर अपने को एक अच्छा विकेटकीपर भी साबित किया है. जब विकेट के पीछे उनकी भूमिका पर आलोचकों ने सवाल उठाएं, कामरान ने विकेट के आगे बल्ले के बूते टीम में अपनी जरूरत का उन्हें एहसास कराया.

यही वजह है कि टी-20 विश्वकप के लिए चयनकर्ता उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सके. साल 2006 में भारत के खिलाफ तीसरे टेस्ट मैच में कामरान आठवें नंबर के बल्लेबाज़ के तौर पर मैदान पर उतरे थे और उन्होंने शतक जड़कर पाकिस्तान को अविश्वसनीय जीत दिलाई थी.

जेम्स फ्रैंकलिन

हरफ़नमौला खिलाड़ी जेम्स फ्रेंकलिन ने न्यूज़ीलैंड की ओर से अपना पहला मैच लगभग 11 वर्ष पहले खेला था. बीते कुछ वर्षों में टीम में अपनी जगह बरक़रार रखने के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ा है.

घरेलू दर्शक और चयनकर्ता दोनों ही उनसे बहुत उम्मीद करते हैं. उन्हें इसका ख़ामियाज़ा भी भुगतना पड़ा. साल 2010 में टी-20 विश्वकप के लिए टीम में उनकी मौजूदगी को ज़रूरी नहीं समझा गया.

लेकिन इसके बाद घरेलू मैचों में उन्होंने एक बार फिर अपने बल्ले का जौहर दिखाया. अब उन्हें 20 ओवर के मैचों के लिए न्यूज़ीलैंड का अच्छा बल्लेबाज़ माना जाता है.

जॉनी बेयरस्टोव

इंग्लैंड के बल्लेबाज़ बेयरस्टोव की पहचान उनकी आक्रामक बल्लेबाज़ी है. साल 2011 में उन्होंने एकदिवसीय मैचों में पदार्पण किया और पहले ही मैच में 21 गेंदों पर 41 रन बनाकर अपने इरादे ज़ाहिर कर दिए.

बेयरस्टोव की ख़ासियत मानी जाती है कि दबाव में उनकी आक्रामकता निखरकर सामने आती है. टैस्ट मैचों में बेयरस्टोव कुछ ज्यादा करके नहीं दिखा सके, लेकिन एकदिवसीय और टी-20 मैचों में मध्यक्रम में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है.

युवराज सिंह

362 रन, 15 विकेट, चार 'मैन ऑफ द मैच' और 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' का खिताब. ये वो उपलब्धियां हैं जो युवराज सिंह ने वर्ष 2011 के क्रिकेट विश्वकप के दौरान अपने नाम की थीं. इसके साथ ही वर्ष 2007 के टी-20 विश्वकप में स्टुअर्ट ब्रॉ़ड के एक ओवर में छह छक्के जड़ने का कीर्तिमान भी कहीं पीछे छूट गया.

इन तमाम उपलब्धियों के बावजूद युवराज सिंह का करियर बॉलीवुड की किसी नाटकीय फिल्म की तरह रहा है जिसमें हर तरह के उतार-चढ़ाव आए हैं.

चोटिल युवराज सिंह को विवादों के साए में कैंसर से भी जूझना पड़ा जिससे अब वे उबर आए हैं और टी-20 विश्वकप में एक बार उनके चाहने वाले उनसे किसी नए कीर्तिमान की उम्मीद करते हैं.

शमिंदा इरांगा

शमिंदा इरांगा के नाम अनोखे कीर्तिमान दर्ज हैं. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में चाहे टेस्ट मैच हो, एकदिवसीय मैच या टी-20 मुकाबला, अपने पहले ही ओवर में उन्होंने विरोधी टीम का विकेट चटकाया है.

ये कारनामा करने वाले वो पहले गेंदबाज़ हैं. लेकिन चोटिल होने की वजह से उनके खेल पर असर पड़ा है. इसकी वजह से बीते एक वर्ष में वे केवल एक टैस्ट, तीन एकदिवसीय और एक ही टी-20 मैच खेल पाए हैं.

ब्रैड हॉग

ऑस्ट्रेलिया के ब्रैड हॉग को बहुत बढ़िया क्रिकेट खिलाड़ी तो नहीं माना जाता, लेकिन उनके पास 17 वर्ष का गाढ़ा अनुभव है जो किसी भी टीम के लिए मुश्किल हालात में नयी राह दिखाने वाला साबित हो सकता है.

गेंद को कब, कहां, कैसे टप्पा खिलाना और फिर उछाल देना है, ब्रैड हॉग बखूबी जानते हैं. उम्र भले ही 41 साल हो गई है, लेकिन हॉग अभी भी टी-20 के हिसाब से ऑस्ट्रेलिया की टीम के लिए मूल्यवान खिलाड़ी हैं.

रिचर्ड लेवी

दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज़ रिचर्ड लेवी की न्यूज़ीलैंड के खिलाफ हेमिल्टन में इसी वर्ष खेली गई पारी क्रिकेट-प्रेमी हमेशा याद रखेंगे. इस मैच में उन्होंने 51 गेंदों पर 13 छक्कों की मदद से 117 रन बनाए थे.

ध्यान देने वाली बात है कि ये कोई एकदिवसीय मैच नहीं बल्कि टी-20 मुकाबला था. उनका यही हमलावर अंदाज़ बरकरार रहा तो इस टी-20 विश्वकप में भी कई धुरंधर गेंदबाज़ों की धुनाई होना तय है.

आंड्रे रसेल

वेस्टइंडीज़ के हरफ़नमौला खिलाड़ी आंड्रे रसेल ने 20 ओवर की बजाए 50 ओवर के मैचों में कहीं ज्यादा बेहतर प्रदर्शन किया है. वर्ष 2011 में विश्वकप मुकाबलों के दौरान इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने अपनी धाकड़ बल्लेबाज़ी और धारदार गेंदबाज़ी से दर्शकों का मन मोह लिया था.

इसी वर्ष उन्होंने एंटिगा में भारत के खिलाफ तीसरे एकदिवसीय मैच में आठ चौकों और पांच छक्कों की मदद से 64 गेंदों में 92 रन बनाए थे. ये उनकी यादगार पारी है.

न्यूज़ीलैंड के खिलाफ हालिया एकदिवसीय श्रृंखला में उन्होंने जमकर पसीना बहाया है जो टी-20 विश्वकप में निश्चित तौर पर उनके काम आएगा.

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