अभी अलविदा मत कहो सचिन.....

 बुधवार, 5 सितंबर, 2012 को 09:20 IST तक के समाचार

आइज़ा बर्लिन ने अपने प्रसिद्ध निबंध में एक लोमड़ी और साही का ज़िक्र किया है. लोमड़ी चालाक है और उसे कई काम आते हैं. साही को सिर्फ एक बड़ा काम आता है.

सचिन तेंदुलकर भी उसी साही की तरह हैं. उन्हें पता होगा कि वो अपने शानदार करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं. लेकिन न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ असफलता के बावजूद उनका करियर अभी ख़त्म नहीं हो सकता.

हां, वो धीमे हो गए हैं, पिछली तीन पारियों में बोल्ड आउट हुए हैं और एक कमज़ोर आक्रमण के खिलाफ नाकाम रहे हैं.

लेकिन उनकी नाकामी को सिर्फ़ नंबर का खेल बनाकर ये कहना ग़लत होगा कि अगर आप ज़्यादा बोल्ड आउट हो रहे हैं मतलब आप बूढ़े हो गए हैं.

बंगलौर की पहली पारी में वो फ़ैसला नहीं ले पाए कि आगे आकर खेले या क्रीज़ से ही. इसी उहापोह में वो आउट हुए. दूसरी पारी में उन्होंने टिम साउदी की गेंद पर दो बार स्क्वैयर ड्राइव खेले, जिससे उनका भरोसा जगा होगा.

लेकिन अपने स्वभाव के विपरीत उन्होंने एक गेंद को लाइन के विरुद्ध खेला और बोल्ड हो गए.

बढ़ती उम्र का सवाल

सचिन को सीधे बल्ले से शॉट खेलने चाहिए.

ये कोई उम्र या फ़िटनेस की वजह से नहीं हुआ था. सचिन तो एक ख़तरनाक शॉट खेलना चाहते थे जिससे विरोधी टीम को धराशाई कर सके.

हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि तेंदुलकर की बल्लेबाज़ी में कोई दिक्कत नहीं है. वो 39 साल के हो गए हैं और पिछले 23 साल से क्रिकेट खेल रहे हैं.

उन्हें कई बार फ़िटनेस की गंभीर समस्याएं आईं. एक बार तो वो इतने अनफ़िट हुए कि हाथ से कॉफी का मग भी नहीं उठा सकते थे.

और अब राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के रिटायर होने के बाद उनपर एक बार फिर भारतीय क्रिकेट को संवारने का जिम्मा है.

अभी भारत को घर में सात टेस्ट मैच खेलने है और उसके बाद दक्षिण अफ्रीका, न्यूज़ीलैंड और इंग्लैंड में सिरीज़ खेली जानी है.

पांचवे नंबर पर खेले

अब जब सचिन के सिर से 100वें शतक का बोझ हट गया है, वो अपने करियर पर एक क़रीबी नज़र डाल सकते हैं.

जहां तक वनडे मैचों का सवाल है, वहां उन्हें साबित करने के लिए अब कुछ नहीं रह गया है.

उनका ध्यान अब टेस्ट क्रिकेट पर होना चाहिए. हालांकि भारत ने न्यूज़ीलैंड को 2-0 से हरा दिया लेकिन भारतीय बल्लेबाज़ी पहले जैसा विश्वास पैदा नहीं करती. सिर्फ विराट कोहली फ़ॉर्म में लग रहे हैं.

ऐसे में जब द्रविड़ और लक्ष्मण संन्यास ले चुके हैं, तो सचिन तेंदुलकर को भी अलविदा कह देना ठीक नहीं होगा.

अगले महीने इंग्लैंड की टीम भारत का दौरा कर रही है और सचिन को पांचवे नंबर पर बल्लेबाज़ी करने के बारे में सोचना चाहिए.

चेतेश्वर पुजारा तीसरे नंबर पर जम रहे हैं और चौथे नंबर पर उस बल्लेबाज़ को खेलना चाहिए जो पिछले एक साल में भारत का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ दिखा है.

विराट कोहली जब चौथे नंबर पर बल्लेबाज़ी करेंगे तो तेंदुलकर को भी अपने खेल में ज़रूरी बदलाव करने में आसानी होगी क्योंकि उनपर भारतीय पारी को अपने कंधे पर ढोने का दबाव नहीं होगा.

विश्वनाथ से लें सलाह

अगर सचिन महान बल्लेबाज़ गुंडप्पा विश्वनाथ से सलाह लेते हैं, तो उन्हें लाभ मिल सकता है.

सचिन हाल के दिनों में ख़राब शॉट के चयन से आउट हुए हैं और गुंडप्पा उन्हें बताएंगे किस तरह बढ़ती उम्र के साथ शॉट कम खेलने चाहिएं और बल्ला सीधा होना चाहिए.

विश्वनाथ भारत के सबसे कलात्मक बल्लेबाज़ों में एक थे और उन्होंने भी अपने करियर की सांझ में अपना स्टांस (बल्ले के साथ क्रीज़ पर खड़ा होने का अंदाज़) बदला था और लेग स्टंप की बजाए मिडिल स्टंप का गार्ड लेने लगे थे.

तेंदुलकर ने इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के दौरों पर बहुत बड़ा स्कोर तो नहीं बनाया था लेकिन वो अच्छी लय में दिखे थे. उनके करियर में अब वो पड़ाव आ गया जहां उन्हें सही फ़ैसले लेने चाहिए.

वनडे क्रिकेट से अलविदा कहकर उन्हें आईपीएल मैच भी कम खेलना चाहिए. इससे उनके और भारतीय टीम का भा भाग्य दोबारा जागेगा. अभी उन्हें क्रिकेट को काफ़ी कुछ देना बाक़ी है.

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