टी20 विश्वकप पर दांव लगाने के ख़तरे

टी-20 विश्व कप विजेता की भविष्यवाणी करना एक मुश्किल प्रक्रिया है. ये खेल अपने आप में एक लॉटरी जैसा है और अगर आपका दिन अच्छा है तो जीत भी आप ही की होगी.

पिछले तीन विश्व कपों के तीन अलग विजेता इस बात का प्रतीक है कि टी-20 क्रिकेट में अनिश्चितता भरी हुई है. शायद इसी वजह से टीमों की कागज़ पर आंकी जाने वाली ताकत और फॉर्म यहाँ पूरी तरह सच नहीं हो पाते.

श्रीलंका में हो रही प्रतियोगिता शायद इसी वजह से कयासों से भरी रही है.

इस बार टीमों में ज्यादा गहराई और प्रतिभा भी है. अब तक टी-20 क्रिकेट का स्वरूप सभी टीमों के खिलाड़ी पूरी तरह समझ चुके हैं और यही वजह है कि 2007 में पहली बार आयोजित हुई इस प्रतियोगिता से इसका स्वरूप बिलकुल अलग है.

नई प्रतिभा

Image caption इंग्लैंड की टीम मौजूदा विश्व विजेता है.

क्रिकेट के इस स्वरूप में नई प्रतिभा तराशने का श्रेय निश्चित रूप से इंडियन प्रीमियर लीग को दिया जाना चाहिए, भले ही इसकी कितनी आलोचना होती रहे.

वेस्टइंडीज़ का ही उदाहरण ले लीजिए. क्रिस गेल, केरॉन पोलार्ड, ड्वेन ब्रावो और आंद्रे रसेल आईपीएल के वो सितारें हैं जो विश्व कप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

इसी के चलते कुछ विशेषज्ञों का मत है कि वेस्टइंडीज़ की टीम इस बार की प्रबल दावेदार है. टीम में बड़े शॉट लगाने वाले, बेहतरीन फील्डरों के साथ साथ अच्छे ऑलराउंडर भी मौजूद हैं. हालांकि इस बात में कोई दो राय नहीं कि दक्षिण एशियाई देशों की दावेदारी अपने मैदानों पर होने वाली बड़ी प्रतियोगिताओं में हमेशा से ही प्रबल रही है.

घरेलू पिचों पर इस मौसम में खेलने के आदी भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका के खिलाड़ी हमेशा ही ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड की टीमों पर थोड़े भारी दिखे हैं.

दावेदारी

Image caption भारतीय टीम ने पहला टी20 विश्वकप 2007 में जीता था.

भारत की बात हो तो पूर्व चैम्पियन होने के अलावा भारत के पास 20-20 क्रिकेट के लिए एक मज़बूत टीम भी है.

कुछ महीने पहले भारतीय टीम ने श्रीलंका में जीत का स्वाद भी चखा था और हाल ही में उसने न्यूजीलैंड को टेस्ट श्रंखला में मात भी दी है.

सबसे अहम बात है खिलाड़ियों का फॉर्म. विराट कोहली, धोनी और आर आश्विन तीनों अच्छी लय में दिख रहे हैं और वीरेंदर सहवाग अब भी दुनिया के सबसे विस्फोटक सलामी बल्लेबाजों में गिने जाते हैं.

लेकिन भारत के लिए इस प्रतियोगिता में बल्लेबाज़ी से ज्यादा गेंदबाज़ी और फील्डिंग चिंता बन सकती है. घरेलू मैदानों पर श्रीलंका को हराना हमेशा ही मुश्किल रहा है. उसके पास जयवर्धने, संगकारा, मैथ्यूज और मलिंगा जैसे खतरनाक बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ हैं जो टी-20 के हिसाब से विरोधी टीम को मुश्किल में डाल सकते हैं.

गौर से देखा जाए तो श्रीलंका ही ऐसी टीम है जो बीते पांच वर्षों से टी-20 मैचों में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करती आई है.

पाकिस्तान भी तैयार

Image caption पाकिस्तान ने 2009 में खिताब जीत कर सबको चौंका दिया था.

भारतीय क्रिकेट टीम के चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को भी कम करके नहीं आंका जा सकता.

पाकिस्तान के खिलाड़ियों में दमखम तो जैसे कूट-कूटकर भरा है. सईद अजमल तो जैसे अकेले ही सौ पर भारी पड़ने का दम रखते हैं.

टीम के दूसरे खिलाड़ी भी इस मौके का इस्तेमाल खुद को दोबारा स्थापित करने में करना चाहेंगे. टीम के पास बल्ले का दम है और गेंदबाज़ी की धार भी.

ऑस्ट्रेलिया की बात करें तो इस टीम ने संयुक्त अरब अमीरात में पाकिस्तान की टीम के विरुद्ध बेहद उमस भरे मौसम में जमकर पसीना बहाया है.

इसलिए उसे श्रीलंका की आबोहवा में अपने पैर जमाने में दिक्कत नहीं होगी.

रही बात खिलाड़ियों की, तो ऑस्ट्रेलिया के पास टी-20 फॉर्मेट के लिए खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है. जिन दो टीमों को श्रीलंका में बहुत ज्यादा हाथ-पैर मारने पड़ सकते हैं, वो हैं इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका.

इंग्लैंड की टीम को अपने तूफानी बल्लेबाज़ केविन पीटरसन की कमी बहुत खलेगी क्योंकि टूर्नामेंट के दौरान पीटरसन के हाथों में इस बार बल्ले की जगह माइक होगा.

टी-20 मुकाबलों के इस भव्य आयोजन में ज्यादातर टीमें एक-दूसरे से 19-20 ही हैं.

जिस तरह लॉटरी में भविष्यवाणी नहीं की जा सकती, टी-20 में भी ऐसा करना सही नहीं होगा. ये खेल अपने आप में एक लॉटरी जैसा है और अगर आपका दिन अच्छा है तो जीत कदम चूम लेगी, वरना हार तो गले पड़ ही जाएगी.

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