क्रिकेट : कौन होंगे मुख्य चयनकर्ता?

बीसीसीआई
Image caption बीसीसीआई की बैठक में होगा फैसला.

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की मुंबई में गुरुवार को एक अहम बैठक हो रही है जिसमें नई चयन समिति का चुनाव होगा.

मौजूदा चयन समिति के चार सदस्यों का चार वर्षीय कार्यकाल पूरा हो रहा है जिसमें मुख्य चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत भी शामिल हैं.

दक्षिणी क्षेत्र के प्रतिनिधि के तौर पर चयन समिति में मौजूद श्रीकांत के अलावा जिन चयनकर्ताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है उनमें नरेंद्र (केंद्रीय क्षेत्र), राजा वेंकट (पूर्वी क्षेत्र) और सुरेंद्र भवे (पश्चिमी क्षेत्र शामिल हैं.)

चयन समिति के पांचवें सदस्य मोहिंदर अमरनाथ (उत्तरी क्षेत्र) अपने कार्यकाल का सिर्फ एक साल की पूरा कर पाए हैं.

ऐसे में मुख्य चयनकर्ता बनने की होड़ में जो नाम चल रहे हैं उनमें मोहिंदर अमरनाथ सबसे आगे बताए जा रहे हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब बोर्ड के सदस्य और खासकर उत्तरी क्षेत्र से सदस्य उन्हें फिर से नियुक्त कर दें.

आइए डालते हैं नजर उन लोगों पर जो भारत का मुख्य चयनकर्ता बनने की दौड़ में शामिए बताए जाते हैं.

मोहिंदर अमरनाथ

Image caption 1983 के विश्व कप की ट्रॉफी के साथ.

मोहिंदर अमरनाथ भारतीय क्रिकेट का एक जाना माना नाम हैं. उन्होंने 1969 में अपने करियर का आगाज करने बाद से ही क्रिकेट की दुनिया में बहुत से उतार चढ़ाव देखे हैं.

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज से शुरुआत के बाद मोहिंदर को मैदान पर वापसी करने में बरसों लग गए. लेकिन 1982-83 का सीजन उनके करियर का शानदार दौर कहा जा सकता है. उन्होंने वेस्ट इंडीज की दमदार टीम और चिर परिचित प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया.

इसके बाद 1983 में वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल और फाइनल में जीत में अपनी बढ़िया पारी के बाद वो भारतीय क्रिकेट के नायकों में शुमार हो गए.

लंबे क्रिकेट करियर के बाद मोहिंदर अमरनाथ 1990 के दशक में कुछ समय के लिए बांग्लादेश के कोच भी रहे लेकिन जब 1996 में बांग्लादेश की टीम विश्व कप के लिए क्वॉलिफाई नहीं कर पाई तो उन्हें बर्खास्त कर दिया गया.

इसके अलावा वो 2008 में बंगाल की रणनी टीम के सलाहकार रहे हैं. अब टीवी कार्यक्रमों में अकसर क्रिकेट का विश्लेषण करते हुए भी दिखते हैं.

रोजर बिन्नी

माना जा रहा है कि अगर उत्तरी क्षेत्र मोहिंदर अमरनाथ को बरकरार नहीं रखता है तो भारत के पूर्व हरफनमौला क्रिकेटर रोजर बिन्नी श्रीकांत के बाद जगह मुख्य चयनकर्ता बन सकते हैं.

बिन्नी भी 1983 में विश्व विजेता भारतीय टीम का हिस्सा थे. यही नहीं, उस विश्व कप में वो सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज थे. उन्होंने 18 विकेट लेकर उस वक्त विश्व कप में एक रिकॉर्ड बनाया.

मैदान पर उनकी काबलियत और दमदार प्रदर्शन के कारण वो अपने प्रशंसकों में काफी लोकप्रिय रहे हैं.

बिन्नी ने अक्टूबर 1987 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी मैच खेला जो भारत सिर्फ एक रन से हार गया था. बिन्नी ने 2000 में भारत की अंडर 19 टीम के कोच रहे और उसे विश्व विजेता बनाया.

रोजर बिन्नी भारतीय टीम के लिए खेलने वाले पहले एंग्लो-भारतीय खिलाड़ी हैं.

अबे कुरुविला

पश्चिमी क्षेत्र से भारत के पूर्व गेंदबाज अब कुरुविला का नाम भी दावेदारों में शामिल है. कुरुविला जूनियर चयन समिति की अध्यक्षता कर चुके हैं. इस समिति की चुनी गई अंडर 19 टीम ने विश्व कप जीता.

हालांकि उनका खुद का क्रिकेट करियर ज्यादा धमाकेदार नहीं रहा है. 6 फुट 6 इंच के कुरुविला भारत की तरफ से खेलने वाले संभवतः सबसे लंबे खिलाड़ी हैं. लेकिन वो 10 टेस्ट और 25 वनडे मैचों में ही वो टीम इंडिया का हिस्सा रहे.

अभी कुरुविला मुंबई की सीनियर चयन समिति के अध्यक्ष हैं.

नयन मोंगिया

Image caption नयन मोंगिया भारत के लिए लंबे समय के लिए विकेटकीपिंग करते रहे.

1990 के दशक में भारतीय क्रिकेट टीम का अहम हिस्सा रहे नयन मोंगिया भी भारत का मुख्य चयनकर्ता बनने की दौड़ में बताए जा रहे हैं.

वो न सिर्फ अच्छे विकेट कीपर रहे हैं, बल्कि अपनी बल्लेबाजी से उन्होंने कई बार अपनी टीम को संकट से उबारा है. लेकिन उन पर फिक्सिंग के आरोप भी लगे.

दिल्ली में 1996 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बनाए गए 152 रन उनकी सबसे शानदारी पारी थी. लेकिन बाद में फिक्सिंग और अन्य आरोपों में उन्हें राष्ट्रीय टीम से हटा दिया गया था. फिक्सिंग के अलावा एंपायरों के फैसले पर आपत्ति जताने के लिए भी उनके खिलाफ कार्रवाई की गई.

2004 में क्रिकेट को अलविदा कहने वाले नयन मोंगिया भी अब पूरी तरह क्रिकेट विश्लेषक बन गए हैं. टीवी और अखबारों में उनका नाम और काम दिखता रहता है.

कर्सन घावरी

पूर्व भारतीय क्रिकेटर कर्सन घावरी 1975 और 1979 में वर्ल्ड कप में खेलने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं. उन्होंने भारत की तरफ से 39 टेस्ट और 19 एकदिवसीय मैच खेले.

पुछल्ले बल्लेबाज के तौर पर भी उन्होंने कई बार टीम का साथ दिया. 1981 में क्रिकेट से संन्यास लेने वाले घावरी भी भारत के नए मुख्य चयनकर्ता बनने की दौड़ में शामिल बताए जाते हैं.

गुरुवार बीसीसीआई की बैठक को तय हो जाएगा कि इन दावेदारों में से किस को मुख्य चयनकर्ता की जिम्मेदारी सौंपी जाती है. इस बैठक में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की चयनकर्ता समिति के बारे में भी फैसला होगा.

आईपीएल से जुड़े मुद्दों पर भी बैठक में बात होगी, खास कर मुश्किलों में घिरी फ्रैंचाइजी डेक्कन चार्जर्स को लेकर चर्चा होगी. आईपीएल पहले ही इस टीम की अनुबंध खत्म कर चुका है.

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