इंग्लैंड की एक जीत भी मुश्किल: वाडेकर

 बुधवार, 21 नवंबर, 2012 को 07:24 IST तक के समाचार

अहमदाबाद टेस्ट में भारत के लिए स्पिन गेंदबाज़ी कारगर रही

इंग्लैंड की क्रिकेट टीम चार टेस्ट मैचों की श्रृंखला खेलने के लिए इन दिनों भारत में है और इंग्लैंड को अहमदाबाद टेस्ट में भारत के हाथों नौ विकेट से हार का सामना करना पडा.

इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने भारत आने से पहले काफी दावे किए थे. इन दावों में दम भी दिखा क्योंकि इंग्लैंड भारत को अपने घरेलू मैदान पर चार शून्य से मात दे चुका था.

इंग्लैंड के दावों में और भी दम तब नज़र आया जब भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावास्कर ने कहा कि भारतीय टीम में इंग्लैड को उसी अंदाज़ में हराने का दम नहीं है.

सुनील गावस्कर के बयान के उलट अब भारत के पूर्व कप्तान और कोच रहे अजीत वाडेकर ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि इंग्लैंड में भारत को हराने का दम ही नहीं है.

अजीत वाडेकर के मुताबिक, “इंग्लैंड ने पहले टेस्ट में जिस तरह से भारतीय स्पिन गेंदबाज़ी का सामना किया है, उसे देखकर नहीं लगता कि इंग्लैड की टीम भारत के किसी भी टेस्ट मैच में हरा सकेगी.”

"इंग्लैंड ने पहले टेस्ट में जिस तरह से भारतीय स्पिन गेंदबाज़ी का सामना किया है, उसे देखकर नहीं लगता कि इंग्लैड की टीम भारत के किसी भी टेस्ट मैंच में हरा सके."

अजीत वाडेकर, पूर्व भारतीय कप्तान

वाडेकर कहते हैं कि भारत की बल्लेबाज़ी भी काफी मज़बूत है जो इंग्लैंड के लिए एक बड़ी चुनौती है.

वाडेकर कहते हैं, “चेतेश्वर पुजारा ने अहमदाबाद टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन किया, वीरेंदर सहवाग भी फॉर्म में वापस आ गए हैं. टीम में सचिन और कोहली जैसे खिलाड़ी हैं, जिससे भारत की बल्लेबाज़ी बहुत मज़बूत नज़र आती है.”

1971 का वो दौरा

भारतीय टीम ने इंग्लैंड को इग्लैंड में हराने का कारनामा पहली बार 1971 में किया और अजीत वाडेकर ही उस टीम के कप्तान थे.

भारतीय स्पिन गेंदबाज़ी के बारे में अजीत वाडेकर ने कहा, “आर अश्विन और प्रज्ञान ओझा ने शानदार गेंदबाज़ी की, प्रज्ञान बड़ी निरंतरता के साथ एक ही स्पॉट पर गेंदबाज़ी करने में कामयाब रहे और इसका नतीजा भी उन्हें मिला.”

अजीत कहते हैं कि जैसे-जैसे टेस्ट आगे बढ़ा आर अश्विन की गेंदबाज़ी में थोड़ी थकान नज़र आई. उनके अनुसार भारतीय टीम में तेज़ गेंदबाज़ों की कमी है और इसकी भरपाई करने की क्षमता स्पिन गेंदबाज़ी है.

अपने 1971 इंग्लैंड दौरे को याद करते हुए वाडेकर कहते हैं, “उस समय भी हमारे पास अच्छे तेज़ गेंदबाज़ नहीं थे और तब स्पिन गेंदबाज़ी और नज़दीकी फील्डिंग ने अच्छी भूमिका निभाई थी.”

अजीत कहते हैं कि उस दौरे पर जेफ्री बॉयकॉट का एक नज़दीकी कैच छूटा जाता तो उसके बाद शायद वो दोहरा शतक बना देते.

उन्होंने सचिन तेंदुलकर और केविन पीटरसन का भी बचाव किया और कहा कि बुरी फॉर्म किसी भी खिलाड़ी की हो सकती है.

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